जहानाबाद में संभावित बाढ़, सुखाड़, हीट वेव और पेयजल संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। बुधवार को जिले की प्रभारी सचिव डॉ. आशिमा जैन ने समाहरणालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने मानसून से पहले सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान डॉ. जैन ने मौसम संबंधी आंकड़ों की नियमित निगरानी, कटाव निरोधक कार्यों को मानसून से पूर्व पूरा करने और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने सभी प्रखंडों के वरीय पदाधिकारियों को स्थल निरीक्षण कर योजनाओं की प्रगति और गुणवत्ता की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा में बताया गया कि सुखाड़ से निपटने के लिए जिले में 475 मनरेगा और 121 जल संरक्षण योजनाएं चल रही हैं। इसके अतिरिक्त, 2166 जलाशयों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य भी प्रगति पर है। प्रभारी सचिव ने इन योजनाओं की जमीनी जांच और सतत अनुश्रवण के निर्देश दिए। पेयजल व्यवस्था की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि जिले में 12,127 चापाकल और 1230 ‘हर घर नल’ योजनाएं क्रियाशील हैं। डॉ. जैन ने सभी चापाकलों का निरीक्षण कर खराब पड़े चापाकलों की तत्काल मरम्मत कराने और गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि पेयजल संबंधी किसी भी समस्या की सूचना जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के 24 घंटे कार्यरत हेल्पलाइन नंबर 9431805088, 06114-295072 और 06114-295071 पर दें। अनुमंडल स्तरीय नियंत्रण कक्ष के नंबर 06114-223013 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बैठक में जिला पदाधिकारी अलंकृता पाण्डेय, उप विकास आयुक्त डॉ. प्रीति सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
जहानाबाद में आपदा प्रबंधन की तैयारी तेज:प्रभारी सचिव ने दिए जमीनी निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश
जहानाबाद में संभावित बाढ़, सुखाड़, हीट वेव और पेयजल संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। बुधवार को जिले की प्रभारी सचिव डॉ. आशिमा जैन ने समाहरणालय में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने मानसून से पहले सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान डॉ. जैन ने मौसम संबंधी आंकड़ों की नियमित निगरानी, कटाव निरोधक कार्यों को मानसून से पूर्व पूरा करने और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने सभी प्रखंडों के वरीय पदाधिकारियों को स्थल निरीक्षण कर योजनाओं की प्रगति और गुणवत्ता की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा में बताया गया कि सुखाड़ से निपटने के लिए जिले में 475 मनरेगा और 121 जल संरक्षण योजनाएं चल रही हैं। इसके अतिरिक्त, 2166 जलाशयों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य भी प्रगति पर है। प्रभारी सचिव ने इन योजनाओं की जमीनी जांच और सतत अनुश्रवण के निर्देश दिए। पेयजल व्यवस्था की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि जिले में 12,127 चापाकल और 1230 ‘हर घर नल’ योजनाएं क्रियाशील हैं। डॉ. जैन ने सभी चापाकलों का निरीक्षण कर खराब पड़े चापाकलों की तत्काल मरम्मत कराने और गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि पेयजल संबंधी किसी भी समस्या की सूचना जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के 24 घंटे कार्यरत हेल्पलाइन नंबर 9431805088, 06114-295072 और 06114-295071 पर दें। अनुमंडल स्तरीय नियंत्रण कक्ष के नंबर 06114-223013 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बैठक में जिला पदाधिकारी अलंकृता पाण्डेय, उप विकास आयुक्त डॉ. प्रीति सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

