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जामताड़ा के गांधी चौक पर चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्री्स ने 0.4% एमडीआर बिल के खिलाफ एक घंटे का उपवास रखा। इसमें चैंबर और कई व्यापारी शामिल हुए। चैंबर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि यह एमडीआर बिल व्यापारियों के जरिए आम लोगों से वसूला जाने वाला टैक्स है। व्यापारियों ने डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा किया है। संजय अग्रवाल ने कहा कि पूरे भारत में यूपीआई से सवा तीन लाख करोड़ रुपए का लेनदेन होता है। यह टैक्स लागू हुआ तो सरकार व्यापारियों से लगभग 84 हजार करोड़ रुपए वसूलेगी। चैंबर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी लगाई है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि अगर 15 अक्टूबर तक यह बिल वापस नहीं हुआ, तो वे यूपीआई आंदोलन करेंगे। 2 अक्टूबर को होने वाला यूपीआई ट्रांजैक्शन डे फिलहाल टाल दिया गया है, क्योंकि वित्त मंत्री ने एमडीआर पर विचार का आश्वासन दिया है। संजय अग्रवाल ने कहा कि सरकार गोल-गोल बातें करके लोगों को भ्रमित कर रही है। अगर यह लागू हुआ तो व्यापारी सीधे-सीधे कंज्यूमर से इसकी राशि लेंगे और जब कस्टमर या शुल्क नहीं देंगे तो हम व्यापारी सीधे नगद कैस लेने पर मजबूर होंगे। इससे प्रधानमंत्री का सपना डिजिटल इंडिया खत्म हो जाएगा। वहीं, फतेहपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अरविंद मंडल ने कहा कि सरकार के द्वारा यह बिल लगाए जाना बेहद ही दुखद विषय है। इससे हम सभी व्यापारी प्रभावित होंगे और हमें मजबूरन जो यूपीआई ट्रांजैक्शन की ओर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने सरकार से मांग किया कि इस बिल को वापस लिया जाए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रकार के स्लोगन के बोर्ड लगाए गए, जिसमें 0.4% कल नियम मुर्दाबाद, डिजिटल इंडिया का ढोंग बंद करो अपनी जेब में भरना बंद करो जैसे स्लोगन के बोर्ड लगाकर अपनी बातों को सरकार के समक्ष रखकर ध्यान आकृष्ट कराने का प्रयास किया।
जामताड़ा में 0.4% MDR के विरोध में व्यापारियों का उपवास:सरकार से बिल वापस लेने की मांग, UPI आंदोलन की चेतावनी
