जैंतगढ़| जैंतगढ़ में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ ऐतिहासिक जंताल पर्व मनाया गया। यह पर्व मुख्य रूप से गांव की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल की कामना को लेकर हर साल मनाया जाता है। इस अवसर पर आस-पास के सात मौजा के मानकी मुंडा सहित भारी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए। ग्राम देवता की पूजा और अनुष्ठान की शुरुआत सबसे पहले जैंतगढ़ के मुख्य ग्राम देवता और ग्राम देवी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाज से देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया। पूजा संपन्न होने के बाद पहले बकरे की बलि चढ़ाई गई। ग्राम देवी-देवता की पूजा के बाद सभी ग्रामीण जैंतगढ़ से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित जटिया पहाड़ पहुंचे। पहाड़ के नीचे स्थित जटिया पाठ स्थल पर मुख्य अनुष्ठान किया गया। यहां पूजा-अर्चना के बाद मन्नत पूरी होने और सुख-शांति की कामना के साथ सैंकड़ों बकरों की बलि दी गई।
