
Jharkhand High Court, रांची, (सतीश सिंह की रिपोर्ट): झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को माध्यमिक आचार्य नियुक्ति से जुड़े विवाद पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने अर्चना कुमारी एवं अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से साफ इंकार कर दिया. अदालत ने मामले की गंभीरता और इससे जुड़े तकनीकी पहलुओं को देखते हुए इसे खंडपीठ (Division Bench) में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है, जहां इसे इसी मुद्दे से संबंधित ‘तालेश्वर महतो’ की जनहित याचिका के साथ सुना जाएगा.
एक ही प्रकृति के मामले पर JSSC की दलील
सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने पुरजोर तरीके से अपना पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को सूचित किया कि याचिकाकर्ताओं ने जो मुद्दे उठाए हैं, वे पहले से ही तालेश्वर महतो बनाम झारखंड राज्य मामले में विचाराधीन हैं. उन्होंने तर्क दिया कि जब खंडपीठ पहले से इस मामले को देख रही है, तो अलग-अलग अदालतों में एक जैसी सुनवाई असामनता पैदा कर सकती है.
8 मई की पुनर्परीक्षा और मॉडल आंसर पर विवाद
याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जी में जेएसएससी को मॉडल आंसर उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की थी ताकि वे उन पर वैज्ञानिक आपत्ति दर्ज करा सकें. साथ ही, एक संशोधन याचिका के जरिए 23 अप्रैल 2026 को जारी जेएसएससी के उस नोटिस को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें 2819 अभ्यर्थियों को आगामी 8 मई 2026 को पेपर-2 की पुनर्परीक्षा में बैठने का निर्देश दिया गया है. हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस नोटिस या परीक्षा पर रोक लगाने से मना कर दिया है.
आंसर शीट दिखाने की भी है मांग
उल्लेखनीय है कि इस विवाद में 50 से अधिक अभ्यर्थियों ने हस्तक्षेप याचिका दायर की है. उनकी मुख्य मांग जेएसएससी से ओरिजिनल आंसर शीट दिखाने और मॉडल आंसर के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने की सुविधा प्रदान करना है. अब इस पूरे मामले का भविष्य खंडपीठ की सुनवाई पर टिका है.
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