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झारखंड की धरती से तीन दशकों का खूनी लाल आतंक लगभग साफ हो गया है। करीब डेढ़ साल पहले राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के रडार पर 150 इनामी नक्सली सक्रिय थे। शुक्रवार को पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष पांच लाख के इनामी सब जोनल कमांडर समीर महतो उर्फ मंगल और दो लाख की इनामी एरिया कमांडर मालती मुर्मू के सरेंडर के बाद अब रिकॉर्ड में सिर्फ सात इनामी नक्सली बच गए हैं। ये भी किसी दस्ते या कैडर के बिना सीमावर्ती जंगलों में निष्क्रिय पड़े हैं। राज्य में अब 15 लाख से ऊपर का कोई इनामी नक्सली नहीं बचा है। कभी आतंक का पर्याय माने जाने वाले बूढ़ा पहाड़, पारसनाथ, बुलबुल और सारंडा-कोल्हान जंगल भी अब पूरी तरह सुरक्षा बलों के नियंत्रण में हैं। सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति और जंगलों में स्थाई फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित होने से नक्सलियों की पाइपलाइन कट चुकी है। संगठन को नया कैडर मिलना बंद हो गया है। ठेकेदारों, खनन और कारोबारियों से होने वाली करोड़ों की रंगदारी और लेवी का नेटवर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिससे नक्सलियों की आर्थिक रीढ़ टूट गई। ये सात इनामी नक्सली सिर्फ कागजों में सिमटे 1. रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन 15 लाख पटमदा, जमशेदपुर-दस्ता विहीन पूरी तरह निष्क्रिय 2.नितेश यादव उर्फ इरफान 15 लाख गया, बिहार-प्रभाव क्षेत्र खत्म छिपने को मजबूर 3. मनोहर गंझू उर्फ सोहन 10 लाख बालूमाथ, लातेहार दस्ता पूरी तरह तितर-बितर 4. गोदराय यादव उर्फ संजय 10 लाख छतरपुर, पलामू कोर नेटवर्क से कटा 5. मीता उर्फ नयनतारा 10 लाख पुरुलिया, प. बंगाल संगठन में कोई सक्रिय भूमिका नहीं 6. पंकज कोरवा 5 लाख रंका, गढ़वा दस्ता खत्म, संपर्क विहीन 7. राजू भुइयां 5 लाख डंडई, गढ़वा जमीनी नेटवर्क पूरी तरह शून्य ऑपरेशन ने छीनी जमीन, नई दिशा ने छीने हथियार झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा और झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियानों ने लाल आतंक की रीढ़ तोड़ी। वहीं सरकार की आत्मसमर्पण नीति ‘नई दिशा’ के प्रभाव से 1 करोड़, 25 लाख और 15 लाख के बड़े इनामी नक्सलियों ने हथियार डाल दिए, जबकि कई बड़े चेहरे मुठभेड़ों में मारे गए। बचे-खुचे 150 इनामी कैडरों का खात्मा होने के बाद अब झारखंड की वादियां नक्सलियों से आजाद हो चुकी हैं।
झारखंड में नक्सलियों का किला ध्वस्त:झारखंड में डेढ़ साल पहले थे 150 इनामी नक्सली, अब मंगल-मालती के सरेंडर के बाद बचे सिर्फ 7; वो भी निष्क्रिय
