खास बातें
Mamata vs Ritabrata 21 July Rally: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अंदरूनी कलह एक ओर थाने पहुंचा है, तो दूसरी ओर 21 जुलाई को आयोजित होने वाले शहीद दिवस रैली (Martyrs’ Day Rally) पर केंद्रित हो गया है. विधानसभा चुनाव में करारी हार और पार्टी के दोफाड़ होने के बाद, अब ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के वफादार गुट और रीतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के नेतृत्व वाले बागी गुट के बीच इस प्रतिष्ठित रैली के आयोजन और उसकी विरासत को लेकर जंग छिड़ गयी है. दोनों ही गुटों ने एक ही दिन कोलकाता की सड़कों पर अपनी-अपनी ताकत दिखाने का फैसला किया है.
ममता बनर्जी की धर्मतल्ला रैली को बागी गुट देगा चुनौती
हर साल 21 जुलाई को ममता बनर्जी कोलकाता के धर्मतल्ला (Esplanade) में विशाल जनसभा करती रही हैं. यह रैली वर्ष 1993 के युवा कांग्रेस के 13 शहीदों की याद में आयोजित होती है. हालांकि, इस बार मुख्यधारा की राजनीति से अलग हो चुके बागी गुट के नेता रीतब्रत बनर्जी ने इसी दिन ‘शहीद स्मरण’ कार्यक्रम का ऐलान कर दिया है. इसे ममता बनर्जी के एकाधिकार को सीधी चुनौती माना जा रहा है.
रीतब्रत गुट ने 19 जुलाई 10 बजे से काम शुरू करने की मांगी अनुमति
ममता बनर्जी गुट ने 27 जून को कोलकाता पुलिस को चिट्ठी लिखकर एस्प्लेनेड में रैली करने की अनुमति मांगी. दूसरी तरफ रीतब्रत गुट ने भी पुलिस से ऐसे ही कार्यक्रम के लिए अनुमति देने का आग्रह किया है. चिट्ठी में कहा गया था कि 19 जुलाई सुबह 10 बजे से वहां मंच आदि तैयार करने का काम शुरू हो जायेगा. रैली खत्म होने के बाद मंच हटाने तक जगह आवंटित करने की मांग की गयी है.
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21 जुलाई किसी की बपौती नहीं, हर बंगाली के खून का हिस्सा – रीतब्रत बनर्जी
बागी खेमे के नेता रीतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी गुट पर निशाना साधते हुए कहा- 21 जुलाई की शहादत किसी एक व्यक्ति या परिवार की जागीर नहीं है. यह बंगाल के उन युवाओं का बलिदान था, जिन्होंने तानाशाही के खिलाफ जान दी थी. हम भी उस आंदोलन का हिस्सा रहे हैं, इसलिए हमें भी शहीदों को श्रद्धांजलि देने का पूरा अधिकार है. बागी गुट का दावा है कि उनकी रैली में टीएमसी के कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ेगी, जो अब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से तंग आ चुके हैं.
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Mamata vs Ritabrata 21 July Rally: कोलकाता में टकराव की आशंका, पुलिस और प्रशासन अलर्ट
इस सियासी खींचतान के बाद कोलकाता पुलिस और राज्य गृह विभाग अलर्ट मोड में हैं. आशंका है कि 21 जुलाई को कोलकाता की सड़कों पर दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आने से कानून-व्यवस्था का संकट (Law and Order Crisis) पैदा हो सकता है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाये हुए है, ताकि किसी भी तरह की हिंसक झड़प को रोका जा सके.
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