Wednesday, August 19, 2026

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'डीएमसीएच की विरासत पर हमें गर्व':दरभंगा मेडिकल कॉलेज के 101वें स्थापना दिवस पर बोले संजय कुमार झा, एआई से बदलेगा चिकित्सा का भविष्य


दरभंगा में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा दरभंगा मेडिकल कॉलेज के 101वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आने वाले वर्षों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाला है। चिकित्सा ऐसा क्षेत्र है, जहां निरंतर नवाचार होता रहता है और अब एआई इसकी दिशा और गति दोनों को बदल रहा है। उन्होंने हाल ही में दिल्ली में आयोजित एआई अंतरराष्ट्रीय समिट का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की मजबूत उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका-चीन के बाद भारत एआई के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल है। ऐसे में अब समय की मांग है कि चिकित्सा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में एआई का प्रभावी समावेश किया जाए और मेडिकल फैकल्टी को भी तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जाए। संजय झा ने कहा कि आने वाले 5 से 10 वर्षों में एआई चिकित्सा क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रोबोटिक सर्जरी, आधुनिक निदान प्रणाली और उपचार की नई तकनीकों में तेजी से प्रगति हो रही है। इन नवाचारों को व्यवस्थित रूप से स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना आवश्यक है, ताकि मरीजों को बेहतर और सटीक उपचार मिल सके। संस्थान ने 100 साल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी की कहा कि डीएमसीएच और यहां की डॉक्टर कॉलोनी कभी गौरव का केंद्र हुआ करती थी। बचपन में स्कूल जाते समय इस संस्थान को देखकर गर्व की अनुभूति होती थी। मिथिला क्षेत्र के लिए यह संस्थान लंबे समय से प्रतिष्ठा और भरोसे का प्रतीक रहा है।
1925 में स्थापित इस संस्थान ने 100 साल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी की है। यहां कई प्रतिष्ठित चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दी हैं। मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. शीतल प्रसाद का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके उपचार को सफलता की गारंटी माना जाता था। देश के विभिन्न हिस्सों में डीएमसीएच से पढ़े चिकित्सक आज भी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाद डीएमसीएच उत्तर बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल रहा है, जहां नेपाल तक से मरीज इलाज के लिए आते रहे हैं।
उत्तर बिहार में एम्स की स्थापना असंभव सी लग रही थी संजय झा ने कहा कि दरभंगा को एम्स की स्वीकृति मिलना ऐतिहासिक उपलब्धि है। पटना के बाद उत्तर बिहार में एम्स की स्थापना असंभव सी लग रही थी, क्योंकि पहले इसकी स्वीकृति अन्य स्थान के लिए दी जा चुकी थी, लेकिन सरकार के प्रयासों से निर्णय में बदलाव कर दरभंगा को यह महत्वपूर्ण संस्थान दिया गया। दरभंगा में बुनियादी ढांचे के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि एयरपोर्ट का निर्माण एक बड़ा परिवर्तन है। अब दिल्ली जैसी दूरस्थ जगहों की यात्रा एक ही दिन में संभव हो गई है, जो पहले कल्पना से परे था।
युवाओं को कुशल बनाना जरूरी कहा कि बिहार युवाओं का राज्य है और लगभग 58 प्रतिशत आबादी युवा है। इन युवाओं को चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुशल बनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि राज्य और देश के विकास में उनकी सक्रिय और महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. यूसी झा, आयोजन सचिव डॉ. विजेंद्र मिश्रा, अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा, पूर्व कुलपति डॉ. एसपी सिंह, पूर्व प्राचार्य डॉ. अल्का झा, पूर्व अधीक्षक डॉ. शीला साहू, सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मीना महासेठ, एलुमनाई एसोसिएशन के सचिव डॉ. सुशील कुमार सहित अनेक चिकित्सक, शिक्षक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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