भास्कर न्यूज|गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने बुधवार को सदर अस्पताल गुमला का औचक निरीक्षण किया। उनके साथ अनुमंडल पदाधिकारी अखिलेश कुमार, नगर परिषद के प्रशासक मनीष कुमार व गुमला बीडीओ भी मौजूद थे। निरीक्षण की सूचना पूर्व में नहीं होने के कारण अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जानकारी मिलते ही कई चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी जल्दबाजी में अस्पताल पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सबसे पहले उपाधीक्षक कार्यालय का जायजा लिया, जहां कार्यालय में ताला लटका मिला। इसके बाद उन्होंने ओपीडी कक्ष संख्या-112 का निरीक्षण किया। यहां मौजूद चिकित्सक डॉ. सचना प्रसाद से उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों के उपचार संबंधी जानकारी ली। इसके बाद उपायुक्त ने इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण कर उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की व वहां प्रतिनियुक्त नर्सों की रोस्टर के अनुसार उपस्थिति की जांच की। उपायुक्त ने अस्पताल के कक्ष संख्या-103 में संचालित जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा का भी निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित रजिस्टरों की जांच करते हुए यह देखा कि ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मी उपस्थित हैं या नहीं। साथ ही बुधवार को जिन चिकित्सकों की ड्यूटी निर्धारित थी, उनकी उपस्थिति की भी जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान डीसी कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) में अपेक्षा से कम बच्चों की मौजूदगी देखकर नाराज हो गए। उन्होंने उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर से कहा कि प्रत्येक समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया जाता है कि स्क्रीनिंग के माध्यम से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें तत्काल एमटीसी में भर्ती कराया जाए, ताकि समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद बेड खाली रहना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने व्यवस्था में तत्काल सुधार लाने और स्क्रीनिंग अभियान को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। इसके बाद उपायुक्त ने सीएनसीयू सहित अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण कर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, चिकित्सकों एवं कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी, उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर, प्रधान लिपिक प्रवीण एक्का, एचएम, ड्रेसर दिनेश कुमार सहित अस्पताल के कई अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे।

