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अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकारी और निजी क्षेत्र के चिकित्सकों ने आंदोलन तेज कर दिया है। मंगलवार को सिमडेगा सदर अस्पताल में चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर मरीजों का इलाज किया और सरकार के प्रति विरोध दर्ज कराया। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वे अपनी नियमित सेवाएं जारी रखेंगे, लेकिन 21 अक्टूबर तक मांगों पर ठोस पहल नहीं होने पर 22 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जा सकता है। ऐसा होने पर जिले की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। चिकित्सकों का यह आंदोलन बेहतर चिकित्सा व्यवस्था, डॉक्टरों की सुरक्षा, सरकारी चिकित्सकों की कैरियर प्रगति, अस्पतालों के लंबित भुगतान और स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े नियमों में सुधार समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर चल रहा है। आंदोलन में विभिन्न चिकित्सा संगठनों के शामिल होने से इसके व्यापक होने के संकेत मिल रहे हैं। चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन और स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है, ताकि वे बिना किसी भय के मरीजों को सेवाएं दे सकें। इसके अलावा सरकारी चिकित्सकों के लिए समयबद्ध डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन लागू करने, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाने की मांग की गई है। क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों में यथोचित राहत देने के साथ मरीजों के हित में गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर की ड्यूटी, आठ सूत्री मांगों के लिए तेज करेंगे आंदोलन, चेताया
