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पढ़ाई में दूरी को बाधक नहीं बनने दिया, कई किलोमीटर दूर कॉलेज जा रहीं; सुबह का वक्त है। गांव में घरों की दिनचर्या शुरू हो रही है और बेटियां किताबों का बैग लेकर साइकिल उठाती हैं। सामने कॉलेज की राह है। रास्ता छोटा नहीं है। कई छात्राओं को गांव से जिला मुख्यालय तक 10 से 15 किमी तक का सफर तय करना पड़ता है। खूंटी और सिमडेगा के गांवों में भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आई यह तस्वीर बताती है कि झारखंड के गांवों की बेटियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच सिर्फ दाखिले का सवाल नहीं है। कॉलेज तक पहुंचना भी रोज की परीक्षा है। कॉलेज पहुंचकर क्लास करनी है, नोट्स बनाने हैं, परीक्षा की तैयारी करनी है और छुट्टी के बाद घर भी लौटना है। कहीं सड़क लंबी है, कहीं नियमित आवागमन का साधन नहीं। ऐसे में साइकिल ही सहारा बनती है। सुबह का समय सफर में जाता है और वापसी में भी वही दूरी तय करनी होती है। फिर भी बेटियां कॉलेज जा रही हैं, क्योंकि उन्हें पढ़ाई छोड़ देना मंजूर नहीं।
ढ़ाई छोड़ देना मंजूर नहीं:15 किलोमीटर साइकिल… फिर कॉलेज, पढ़ाई के लिए तपस्या कर रहीं बेटियां

