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दरभंगा जिले में ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत जीविका दीदियां अपने हुनर, मेहनत और समर्पण से राष्ट्रभक्ति की मिसाल पेश कर रही हैं। जिले के सभी 18 प्रखंडों की हजारों जीविका दीदियां सिलाई केंद्रों के साथ-साथ अपने घरों में भी तिरंगा तैयार करने में जुटी हैं। तिरंगा निर्माण उनके लिए रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनने के साथ राष्ट्रसेवा में योगदान का अवसर भी बन गया है। जिलाधिकारी कौशल कुमार के दिशा-निर्देश और जीविका की डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी के नेतृत्व में अभियान को गति दी जा रही है। जिलाधिकारी लगातार तिरंगा निर्माण कार्य का जायजा ले रहे हैं और जीविका दीदियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने हुनर और मेहनत से राष्ट्रीय ध्वज तैयार कर जीविका दीदियां राष्ट्रसेवा के साथ महिला सशक्तीकरण की प्रेरक मिसाल पेश कर रही हैं। उप विकास आयुक्त स्वप्निल ने भी जीविका दीदियों को गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित मानकों के अनुरूप तिरंगा निर्माण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तिरंगा निर्माण में गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। जीविका दीदियां अपने हुनर और मेहनत से राष्ट्रसेवा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं, यह गर्व की बात है। 18 प्रखंडों में तैयार होंगे 76 हजार तिरंगा डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिले के प्रत्येक प्रखंड में करीब 4 हजार तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर भी करीब 4 हजार तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं। इस तरह जिले में कुल करीब 76 हजार तिरंगे तैयार कर संबंधित विभागों और संस्थानों को उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। तिरंगा निर्माण में निर्धारित मानक, गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। तैयार तिरंगों की गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग के बाद जिला प्रशासन के निर्देशानुसार संबंधित विभागों एवं संस्थानों को इसकी आपूर्ति की जा रही है। प्रशिक्षण से मिला हुनर, अब तिरंगा बनाने में हो रहा उपयोग डीपीएम ने बताया कि हाल के दिनों में जिले के 18 प्रखंडों के विभिन्न ग्राम संगठनों में हजारों जीविका दीदियों को प्रशिक्षित प्रशिक्षकों के माध्यम से कपड़ा सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाएं अब अपने हुनर का उपयोग तिरंगा निर्माण में कर रही हैं। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार के माध्यम से जीविका दीदियों को तिरंगा निर्माण एवं आपूर्ति की जिम्मेदारी दी गई है। विभिन्न सिलाई केंद्रों पर स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और संकुल संघों से जुड़ी महिलाएं सक्रिय रूप से इस कार्य में भागीदारी कर रही हैं। जीविका के संचार प्रबंधक राजा सागर ने बताया कि सिलाई एवं वस्त्र निर्माण का प्रशिक्षण हजारों दीदियों के लिए आजीविका और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन रहा है। कई महिलाएं आंगनबाड़ी बच्चों के वस्त्र निर्माण से भी आय अर्जित कर रही हैं, जबकि प्रशिक्षित दीदियां अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी रोजगार से जोड़ रही हैं। ‘तिरंगा बनाकर लगता है कि देश के लिए योगदान दे रही हूं’ किरतपुर प्रखंड की जीविका दीदी रिंकी सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अपने हाथों से तिरंगा बनाने और राष्ट्रध्वज निर्माण में योगदान देने का अवसर मिलेगा। अपने हाथों से तैयार किए गए तिरंगे को देखकर मन गर्व से भर जाता है। यह काम उनके लिए सिर्फ आय का जरिया नहीं, बल्कि हुनर और देशभक्ति का संगम है। 9 से 17 अगस्त तक चलेगा अभियान जिले में इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष की थीम पर हर घर तिरंगा अभियान आयोजित किया जा रहा है। 9 से 17 अगस्त तक जिले के सभी प्रखंडों और पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज की उपलब्धता एवं वितरण सुनिश्चित करने की योजना है। अभियान के दौरान तिरंगा थीम पर आधारित प्रकाश स्तंभ, मेरी माटी-मेरा देश और जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा वंदे मातरम् प्रदर्शनी, तिरंगा रैली, वंदे मातरम् का सामूहिक गायन, सेल्फी विद तिरंगा, तिरंगा यात्रा और संकल्प विद तिरंगा जैसे कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। ‘संकल्प विद तिरंगा’ कार्यक्रम का होगा आयोजन अभियान के दौरान तिरंगा थीम पर आधारित प्रकाश स्तंभ, मेरी माटी-मेरा देश और जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा वंदे मातरम् प्रदर्शनी, तिरंगा रैली, वंदे मातरम् का सामूहिक गायन, सेल्फी विद तिरंगा और संकल्प विद तिरंगा जैसे कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। जीविका दीदियों के सामूहिक प्रयास से जिले में तिरंगा निर्माण और वितरण का लक्ष्य समय पर पूरा करने की तैयारी है। इससे एक ओर जहां हर घर तिरंगा अभियान को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को उनके हुनर के जरिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिलेगा।
