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विजयादशमी के अवसर पर सदर प्रखंड के मन्हो गांव में पारंपरिक जतरा का आयोजन किया गया। इसमें लोहरदगा सांसद सह छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन समिति द्वारा उनका पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप के साथ स्वागत किया गया। वहीं सांसद ने कहा कि जतरा आदिवासियों का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम है। यह हमें हमारे पूर्वजों से विरासत में मिला है। हमारे पूर्वजों की सोच बहुत दूरदर्शी और अच्छी थी। पुराने जमाने में आवागमन का कोई साधन नहीं था। सड़कें नहीं थीं। ऐसे समय में हमारे पूर्वजों ने समाज की कुरीतियों को दूर करने, समाज की उन्नति और विकास पर चर्चा करने के लिए जतरा को एक माध्यम बनाया। वे जतरा के बहाने एक जगह बैठते थे। वे समाज की बुराइयों को दूर करने का प्रयास करते थे। उन्होंने कहा कि जतरा में रिश्तों का भी आदान-प्रदान होता है। शादी-विवाह के रिश्ते भी यहीं तय होते थे। यही नहीं, यह सामुदायिकता और भाईचारे की भी मिसाल है। इसमें सभी वर्गों और सभी समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। वहीं उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपनी परंपरा को बचाए रखने की अपील की। मौके पर आलोक कुमार साहू, अविनाश उरांव, वीरेंद्र यादव, जीवन राम, नवीन शाहदेव, गांव के पाहन-पूजार सहित अन्य लोग उपस्थित थे। लोहरदगा|विजयादशमी के अवसर पर शहर के दुर्गाबाड़ी परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें लोहरदगा सांसद सह छत्तीसगढ़ राज्य प्रभारी सुखदेव भगत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने मां दुर्गा को नमन किया। उन्होंने आशीर्वाद लिया। उन्होंने पूरे झारखंड प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रतीक है। मां दुर्गा शक्ति, साहस और नारी सम्मान की प्रतीक हैं। विजयादशमी हमें यह सीख देती है कि चाहे कितनी भी बड़ी बुराई क्यों न हो, अंत में जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। मां दुर्गा के नौ रूप हमें जीवन में शक्ति, धैर्य और करुणा का संदेश देते हैं।
दुर्गाबाड़ी में भंडारे का आयोजन, सांसद ने की झारखंड में सुख, शांति और समृद्धि की कामना
