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बेतिया व्यवहार न्यायालय ने दुष्कर्म के एक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (रेप एवं पॉक्सो एक्ट) अरविंद कुमार गुप्ता की अदालत ने अभियुक्त हसीना खातून को दोषी करार देते हुए सात वर्ष एक माह के कठोर कारावास और 10,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला बेतिया मुफस्सिल थाना कांड संख्या 232/2005 से संबंधित है। पीड़िता मामा के घर रहकर करती थी पढ़ाई अनन्य विशेष लोक अभियोजक जय शंकर तिवारी ने बताया कि घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र की है। पीड़िता उस समय अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी। आरोप के अनुसार, पीड़िता की चचेरी नानी हसीना खातून उसे बहला-फुसलाकर एक कमरे में ले गई, जहाँ नेयाज आलम पहले से मौजूद था। इसके बाद नेयाज आलम ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। लोक अभियोजक ने आगे बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य अभियुक्त नेयाज आलम की मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण उसके विरुद्ध विचारण समाप्त हो गया। हालांकि, सह-अभियुक्त हसीना खातून के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रही। दोनों पक्षों की दलीलों, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने हसीना खातून को अपराध का दोषी पाया। कोर्ट ने 10,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार गुप्ता ने हसीना खातून को भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 109, 341 और 376 के तहत दोषी ठहराया। उन्हें सात वर्ष एक माह के कठोर कारावास के साथ 10,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अभियुक्ता जुर्माने की राशि जमा नहीं करती है, तो उसे एक माह सात दिन का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
