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मुजफ्फरपुर में दूसरी सोमवारी से पहले शनिवार को बाबा गरीबनाथ मंदिर के बाहर फूल-माला की दुकानें हटाने को लेकर हंगामा हो गया। प्रशासन की टीम ने दुकानों को हटाने का निर्देश दिया था। दुकानदारों की ओर से दुकानें नहीं हटाने पर टीम ने उन्हें जबरन हटवा दिया, जिसके बाद दुकानदार आक्रोशित हो गए और मौके पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि उनकी दुकानें हटवाने में वार्ड पार्षद केपी पप्पू की भूमिका है। उनका कहना था कि पार्षद ने ही प्रशासन को भेजकर मंदिर के बाहर से दुकानें हटवाई हैं। दुकानदारों ने यह भी बताया कि वे लंबे समय से यहां फूल-माला और पूजा सामग्री बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। अचानक दुकानें हटाए जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हंगामे की 3 तस्वीरें देखिए पुलिस ने दुकानदारों को समझा बुझाकर शांत कराया हंगामे की सूचना मिलते ही नगर एसडीपीओ-1 सुरेश कुमार, एसडीएम पूर्वी आनंद उत्सव और नगर थानेदार जयप्रकाश मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दुकानदारों से बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें समझाकर स्थिति को शांत कराया। प्रशासन के अनुसार, बाबा गरीबनाथ मंदिर में दूसरी सोमवारी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर के आसपास भीड़ और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए यह कार्रवाई की गई। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मंदिर के बाहर के रास्ते को खाली रखना और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारू बनाए रखना है। अधिकारियों के समझाने के बाद दुकानदार शांत हो गए, लेकिन दुकानें हटाए जाने को लेकर उनमें अभी भी नाराजगी बनी हुई है। पहली सोमवारी पर एक लाख से अधिक शिवभक्तों की उमड़ी थी भीड़ उत्तर बिहार के प्रसिद्ध ‘देवघर’ कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर में सावन की पहली सोमवारी पर करीब 1 लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया था। सोनपुर के पहलेजा घाट से लगभग 85-87 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा कर पहुंचे कांवड़ियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों के बीच श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। मंदिर परिसर से लेकर शहर के मुख्य रास्तों और कांवरिया पथ पर चप्पे-चप्पे पर CCTV कैमरों और ड्रोन से निगरानी रखी गई थी। जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रात भर खुद सुरक्षा और व्यवस्था की कमान संभालते दिखे थे। मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर दूर तक बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध व्यवस्था बनाई गई ताकि भीड़ अनियंत्रित न हो। वहीं, भारी संख्या में पुरुष व महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। जलाभिषेक के लिए अरघा लगाए गए थे मंदिर के गर्भगृह में भीड़ और धक्का-मुक्की से बचने के लिए बाहर ही ‘अरघा’ लगाया गया था, जिसके माध्यम से सभी श्रद्धालुओं ने सुगमता से जल अर्पित किया था। मंदिर प्रबंधन समिति और सेवादल के सैकड़ों स्वयंसेवक (Volunteers) श्रद्धालुओं को कतार में व्यवस्थित करने और मार्गदर्शन देने में लगे रहे थे। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए अलग लाइन और सहायता केंद्र बनाए गए थे। मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक के अनुसार, पहली सोमवारी की रात बाबा गरीबनाथ का विशेष महाशृंगार और आकर्षक सजावट की गई थी। सोनपुर (पहलेजा घाट) से गंगाजल लेकर 87 किमी पैदल चल कर आए कांवरियों ने बताया था कि “कठिन रास्ते और पैरों के छालों के बावजूद बाबा की भक्ति और ‘बोल बम’ के जयकारों के आगे सारी थकान दूर हो जाती है।”

