देवघर के प्राचीन शनि मंदिर में शनि अमावस्या, शनि जन्मोत्सव और मंदिर के 25वें स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन किया गया। शनिवार को स्टेशन रोड स्थित मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर में तड़के सुबह करीब 4 बजे से पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। सबसे पहले शनि महाराज का विधि-विधान से तेलाभिषेक किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा, आरती और भक्तों द्वारा दर्शन-पूजन का क्रम दिनभर जारी रहा। श्रद्धालुओं ने शनि देव को सरसों का तेल, काला तिल, फूल-माला और प्रसाद अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। स्टेशन रोड स्थित यह शनि मंदिर शहर के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस वर्ष मंदिर अपना 25वां स्थापना दिवस भी मना रहा है, जिसके चलते विशेष आयोजन किए गए। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। मंदिर के पंडित उत्तम ठाकुर ने बताया कि यह मंदिर मनोकामना शनि मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार शनि जन्मोत्सव और शनि अमावस्या एक ही दिन पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। शाम के समय शनि महाराज का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद मुंबई से आए कलाकारों द्वारा भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दिनभर मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह बना रहा।
देवघर शनि मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़:शनि अमावस्या और 25वें स्थापना दिवस पर दिनभर हुई पूजा
देवघर के प्राचीन शनि मंदिर में शनि अमावस्या, शनि जन्मोत्सव और मंदिर के 25वें स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन किया गया। शनिवार को स्टेशन रोड स्थित मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर में तड़के सुबह करीब 4 बजे से पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। सबसे पहले शनि महाराज का विधि-विधान से तेलाभिषेक किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा, आरती और भक्तों द्वारा दर्शन-पूजन का क्रम दिनभर जारी रहा। श्रद्धालुओं ने शनि देव को सरसों का तेल, काला तिल, फूल-माला और प्रसाद अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। स्टेशन रोड स्थित यह शनि मंदिर शहर के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस वर्ष मंदिर अपना 25वां स्थापना दिवस भी मना रहा है, जिसके चलते विशेष आयोजन किए गए। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। मंदिर के पंडित उत्तम ठाकुर ने बताया कि यह मंदिर मनोकामना शनि मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार शनि जन्मोत्सव और शनि अमावस्या एक ही दिन पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। शाम के समय शनि महाराज का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद मुंबई से आए कलाकारों द्वारा भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दिनभर मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह बना रहा।


