करीब छह वर्षों से अटकी धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना अब आगे बढ़ती दिख रही है। प्रथम चरण में 100 हेक्टेयर भूमि पर एयरपोर्ट विकसित करने की तैयारी है। इस जमीन से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेज दी गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने भी उड़ान योजना के तहत छोटे विमानों के संचालन की संभावनाओं पर रिपोर्ट मांगी है। शनिवार को मानगो स्थित वन विभाग के गेस्ट हाउस में सांसद विद्युत वरण महतो, डीएफओ सबा आलम अंसारी और वन विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में परियोजना की प्रगति और लंबित प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई। सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि जमशेदपुर से करीब 55 किमी दूर स्थित धालभूमगढ़ में एयरपोर्ट बनने से क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। उनके अनुसार, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 75 हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है। साथ ही जमशेदपुर-धालभूमगढ़ के बीच औद्योगिक और आवासीय कॉरिडोर विकसित होने की संभावना भी बढ़ेगी। पहले चरण के लिए चिह्नित सौ हेक्टेयर भूमि की भेजी रिपोर्ट
वर्ष 2019 में धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना का भूमिपूजन हुआ था। तब अनुमानित लागत 300 करोड़ थी, जिसमें 51% हिस्सेदारी एएआई और 49% राज्य सरकार की थी। केंद्रीय बजट 2026 में इसे फिर से उड़ान योजना में शामिल किया गया है और 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है। अभी वन भूमि क्लीयरेंस की दिशा में काम चल रहा है। डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि प्रथम चरण के लिए चिह्नित 100 हेक्टेयर क्षेत्र की विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी गई है। जमशेदपुर के यात्रियों को अब नहीं आना पड़ेगा रांची धालभूमगढ़ एयरपोर्ट बनने के बाद जमशेदपुर और आसपास के लोगों को हवाई यात्रा के लिए रांची नहीं जाना पड़ेगा। इससे यात्रा समय ढाई-तीन घंटे से घटकर करीब एक घंटे रह जाएगा। इसका लाभ घाटशिला, बहरागोड़ा, चाईबासा, चक्रधरपुर, सरायकेला, आदित्यपुर, मुसाबनी और पोटका के लोगों को मिलेगा। इसके अलावा ओडिशा के बारीपदा और रायरंगपुर तथा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और झाड़ग्राम क्षेत्र भी इससे जुड़ेंगे।

