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बिहारशरीफ प्रखंड के चकरसलपुर गांव में बना अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। बुधवार को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमा खां के द्वारा विद्यालय के पहले शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ किया जाएगा। इसके बाद विद्यालय में पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इस आवासीय विद्यालय के शुरू होने से जिले के अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब और मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने में बड़ी सहूलियत मिलेगी। कार्यक्रम दोपहर बाद चार बजे से शुरू होगा। जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि मंत्री के आगमन को लेकर विद्यालय परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आठ साल के इंतजार के बाद बनकर तैयार हुआ स्कूल बिहार राज्य अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय योजना के तहत नालंदा में इस स्कूल के निर्माण की स्वीकृति वर्ष 2018-19 में मिली थी। इसके बाद देवीसराय मौजा स्थित चकरसलपुर गांव में तीन एकड़ जमीन चिह्नित की गई और भवन निर्माण की जिम्मेदारी बिहार राज्य भवन निर्माण निगम को सौंपी गई। जनवरी 2025 में विद्यालय की चहारदीवारी बनाकर काम की शुरुआत हुई थी। 56 करोड़ रुपये की लागत से बना यह विद्यालय झारखंड के मशहूर नेतरहाट स्कूल की तर्ज पर तैयार किया गया है। यहां एक साथ 560 बच्चे रहकर पढ़ाई कर सकेंगे, जिसमें 280 सीटें लड़कों और 280 सीटें लड़कियों के लिए तय हैं। इसके अलावा 75 फीसदी सीटें ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं। अप्रैल में हुई थी प्रवेश परीक्षा, राज्यभर से हुआ चयन इस साल अप्रैल में जब नौवीं और 11वीं में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए, तो एक मई तक आवेदन की प्रक्रिया चली। नालंदा के अलावा कैमूर, कटिहार, जमुई और मुजफ्फरपुर के अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों के लिए भी एक साथ यह प्रक्रिया अपनाई गई थी। 17 मई को राज्यभर में दो घंटे की 100 अंकों की वस्तुनिष्ठ प्रवेश परीक्षा हुई और 28 मई को परिणाम जारी किया गया। मेधा सूची के आधार पर बच्चों का चयन किया गया। मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल होने के पात्र थे। नौवीं में दाखिले के लिए अधिकतम आयु 16 वर्ष और 11वीं के लिए 18 वर्ष तय की गई थी। साथ ही अभ्यर्थी के परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए थी। अब वही चयनित छात्र-छात्राएं बुधवार से चकरसलपुर के इस स्कूल में पढ़ाई शुरू करेंगे। बच्चों को घर जैसी सुविधा देने की तैयारी यहां पढ़ने वाले बच्चों को कुछ भी अपनी जेब से खर्च नहीं करना होगा। रहना, खाना, कपड़े, किताबें, तेल-साबुन और इलाज तक की पूरी व्यवस्था स्कूल प्रबंधन करेगा। जलपान भी तय मीनू के अनुसार दिया जाएगा। कक्षा, कॉमन रूम, पुस्तकालय, आधुनिक प्रयोगशाला, शौचालय के साथ ही शिक्षक-कर्मचारी आवास और खेलकूद-मनोरंजन की सुविधाएं भी विद्यालय परिसर में उपलब्ध कराई गई हैं। 11वीं में विज्ञान और कला दोनों संकाय की पढ़ाई हो सकेगी, ताकि आगे चलकर बच्चे मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में भी जा सकें। विद्यालय में विशेष कोचिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण की भी व्यवस्था रहेगी। दसवीं और 12वीं की परीक्षा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यम से ली जाएगी। बहाली की प्रक्रिया जारी, बीपीएससी से आएंगे शिक्षक विद्यालय के सुचारू संचालन के लिए कुल 40 शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद सृजित किए गए हैं। इनमें एक प्राचार्य, एक उप प्राचार्य, उच्च माध्यमिक के 20 और माध्यमिक के नौ प्रशिक्षित शिक्षक, एक छात्रावास प्रबंधक, एक पुस्तकालयाध्यक्ष, तीन उच्च वर्गीय लिपिक, तीन निम्न वर्गीय लिपिक और तीन प्रयोगशाला सहायक के पद शामिल हैं। शैक्षणिक पदों पर बहाली बीपीएससी से चयनित शिक्षकों के माध्यम से की गई है।
नालंदा- अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय का मंत्री आज करेंगे उद्घाटन:नेतरहाट जैसी मिलेंगी सुविधाएं, 56 करोड़ रुपए है लागत; 8 साल के इंतजार के बाद बिल्डिंग तैयार
