Wednesday, September 9, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

नालंदा के अमृत राजकुमार बने सेना में लेफ्टिनेंट:चीन सीमा पर संभालेंगे मोर्चा, सातवें प्रयास में सीडीएस क्रैक; 4 सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट में हुए शामिल


बिहार शरीफ के बड़ी पहाड़ी के रहने वाले राजीव रंजन कुमार के बेटे अमृत राजकुमार भारतीय सेना में बतौर अधिकारी (लेफ्टिनेंट) चयनित हुए हैं। 5 सितंबर 2026 को ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई की प्रतिष्ठित पासिंग आउट परेड के साथ ही अमृत सेना का हिस्सा बने। सेना की सबसे जांबाज शाखा—पैदल सेना (इन्फेंट्री) की ‘4 सिख लाइट इन्फेंट्री’ रेजिमेंट में उन्हें कमीशन प्राप्त हुआ है। अमृत की सफलता की नींव वर्षों पहले अमृत के दादाजी शांति लाल ने रखी थी। परिवार में पांच पीढ़ियों से किसी ने भी इस तरह की कामयाबी का स्वाद नहीं चखा था। दादाजी का एक ही सपना था कि उनका पोता पढ़-लिखकर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में पहुंचे और एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनकर फौज में अफसर बने। अमृत जब बहुत छोटे थे, तभी नानी ने जन्म के बाद उनका पालन-पोषण किया और दादाजी ने उंगली पकड़कर आगे का रास्ता दिखाया। परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि आसानी से महंगी पढ़ाई का खर्च उठाया जा सके। इसके बावजूद दादाजी ने अपने इलाज या निजी जरूरतों के लिए बैंक बैलेंस की परवाह किए बिना पोते की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। उन्होंने पाई-पाई जोड़कर सैनिक स्कूल की भारी-भरकम फीस का इंतजाम किया और अमृत का दाखिला सैनिक स्कूल में कराकर ही दुनिया को अलविदा कहा। अमृत की माता मंजू देवी भारी मन और गर्व भरी आवाज में कहती हैं कि आज दादाजी स्वर्ग में बैठकर अपने पोते के कंधों पर सितारे देखकर सबसे ज्यादा सुकून महसूस कर रहे होंगे। उनका देखा ख्वाब आज पोते ने अपनी मेहनत से हकीकत में तब्दील कर दिखाया है। पिता का हौसला और समाज की बदौलत मुश्किल राहें हुईं आसान अमृत के पिता राजीव रंजन कुमार नालंदा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में वकालत करते हैं। एक स्थानीय अदालत में प्रैक्टिस करते हुए इतने बड़े परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना कभी भी आसान नहीं रहा। राजीव रंजन बताते हैं कि जीवन के इस लंबे सफर में कई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां सामने आईं, कदम-कदम पर कमियां महसूस हुईं, लेकिन उन्होंने कभी धैर्य और साहस का दामन नहीं छोड़ा। पिता के अनुसार, समाज से मिले इसी सकारात्मक सहयोग और भरोसे की बदौलत वे बच्चों को बिना किसी रुकावट के पढ़ा सके। पिता का मानना है कि असली गर्व उस दिन महसूस होगा जब उनका बेटा सीमा पर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और बहादुरी के साथ देश की रक्षा करेगा और देश सेवा के लिए सम्मानित होकर घर लौटेगा। शुरुआती पढ़ाई से लेकर सैनिक स्कूल और दिल्ली विश्वविद्यालय का सफर अमृत की शुरुआती स्कूली शिक्षा बिहार शरीफ के स्थानीय ‘बिहार पब्लिक स्कूल’ से हुई। प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कक्षा छह में सैनिक स्कूल की प्रवेश परीक्षा पास की और वहां दाखिला लिया। सैनिक स्कूल के अनुशासित माहौल में उन्होंने लगातार सात वर्षों तक कड़ा परिश्रम किया और वर्ष 2021 में वहां से पास आउट हुए। सैनिक स्कूल ने उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, शारीरिक दृढ़ता और देशप्रेम का ऐसा बीज बोया जिसने उनके लक्ष्य को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया था। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। वहां से अमृत ने बीएससी मैथमेटिक्स ऑनर्स की डिग्री हासिल की। गणित जैसे कठिन और तार्किक विषय में स्नातक की पढ़ाई करते हुए भी उनका ध्यान अपने एकमात्र लक्ष्य सेना की वर्दी से कभी नहीं भटका। एनडीए की नाकामी से टूटे नहीं, सातवें प्रयास में सीडीएस क्रैक कर रचा इतिहास अमृत की यह यात्रा केवल सफलताओं से भरी नहीं रही, बल्कि इसमें असफलताओं के गहरे घाव भी शामिल रहे। सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एनडीए की कठिन चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। लिखित परीक्षा और एसएसबी इंटरव्यू पास करने के बाद जब अंतिम मेरिट लिस्ट जारी हुई, तो कम रैंक होने के कारण वे अंतिम चयन से बाहर हो गए। इस झटके ने किसी भी सामान्य युवा का मनोबल तोड़ दिया होता, लेकिन अमृत ने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों से सीखा। दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक के अंतिम वर्ष में पहुंचते ही उन्होंने सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। असफलताएं लगातार उनका इम्तिहान लेती रहीं, लेकिन उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा। लगातार छह प्रयासों में मनमुताबिक परिणाम न मिलने के बावजूद अमृत डटे रहे और आखिरकार अपने सातवें प्रयास में उन्होंने सीडीएस परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। इसके साथ ही उनका चयन ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई के लिए सुनिश्चित हो गया। ओटीए चेन्नई की 11 महीने की कड़ी ट्रेनिंग और कंधों पर चमके सितारे सीडीएस पास करने के बाद अमृत राजकुमार चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी पहुंचे। वहां 11 महीनों तक चलने वाली भारतीय सेना की सबसे कठिन और थका देने वाली सैन्य ट्रेनिंग की शुरुआत हुई। शारीरिक सहनशक्ति, सामरिक युद्ध कौशल, मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को तराशने वाले इस कठिन प्रशिक्षण को अमृत ने पूरे जज्बे के साथ पूरा किया। 5 सितंबर 2026 को जब पासिंग आउट परेड के दौरान उनके कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे सजाए गए, तो परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अमृत को पैदल सेना (इन्फेंट्री) की विख्यात ‘4 सिख लाइट इन्फेंट्री’ में अधिकारी पद पर कमीशन मिला, जो अपने शौर्य और पराक्रम के लिए भारतीय सेना में एक विशिष्ट पहचान रखती है। संयुक्त परिवार की ताकत: सात भाई-बहनों का अटूट संबल अमृत की सफलता के पीछे केवल उनके माता-पिता ही नहीं, बल्कि उनके पूरे संयुक्त परिवार की सामूहिक ताकत रही है। परिवार में चाचा रवि कुमार और चाची सुनीता देवी ने हमेशा अमृत को अपने बेटे की तरह प्यार और संबल दिया। अमृत का अपना छोटा भाई नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमसीएच) से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। इसके अलावा चाचा के बेटे राजा और प्रजा, फुफेरी बहनें स्वीटी व डॉली और छोटा भाई निशांत कुमार—इन सभी सात भाई-बहनों का आपस में गहरा लगाव रहा है। एक बड़े संयुक्त परिवार में माता-पिता, चाचा-चाची, बुआ और दादी के एक साथ रहने से घर में हमेशा सकारात्मक और सहयोगी माहौल बना रहा, जिससे अमृत बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रख सके। पहली पोस्टिंग हिमाचल के स्पीति में, चीन सीमा पर रक्षा का मिला दायित्व सैन्य अफसर बनने के बाद लेफ्टिनेंट अमृत राजकुमार को उनकी पहली तैनाती देश के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में मिली है। उन्हें हिमाचल प्रदेश के स्पीति वैली में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी भारत-चीन सीमा के निकट मोर्चा संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दुर्गम पहाड़ों, अत्यधिक ऊंचाई और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच देश की सीमा की निगहबानी करना किसी भी युवा अधिकारी के लिए बड़ी चुनौती और उतना ही बड़ा सम्मान है। अमृत 20 दिनों की पारिवारिक छुट्टी पूरी करने के तुरंत बाद स्पीति वैली के लिए रवाना होंगे। उनका कहना है कि वे इस दुर्गम और खूबसूरत मोर्चे पर देश की हिफाजत के लिए पूरी तरह तैयार और उत्साहित हैं। नालंदा जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर देश की रक्षा पंक्ति के शीर्ष पर खड़े होने तक का अमृत का यह सफर हर उस युवा के लिए एक मिसाल है, जो विपरीत परिस्थितियों के आगे झुकने से इनकार कर देता है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles