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झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी पत्नी अनुकंपा पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने मार्था मुर्मू की ओर से दाखिल एलपीए (लेटर पेटेंट अपील) खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा कि किसी समुदाय के प्रथागत कानून में दूसरी शादी की अनुमति होने के बावजूद सरकारी कर्मचारी पर लागू सेवा आचरण नियमों का पालन जरूरी है। पहली पत्नी के रहते और सरकारी अनुमति के बिना की गई दूसरी शादी के आधार पर दूसरी पत्नी सरकारी नौकरी में अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मांग सकती। दोनों पत्नियों ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं बरनवास माल्टू की मृत्यु के बाद अनुकंपा पर नौकरी के लिए पहली बार 2013 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी। पहली पत्नी सरोजिनी किस्कू और दूसरी पत्नी मार्था मुर्मू ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। दिवंगत कर्मचारी के दस्तावेजों में भी दोनों महिलाओं का उल्लेख था। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पहली पत्नी और दूसरी पत्नी के नाबालिग बेटे के अधिकारों पर भी विचार किया। अदालत ने बच्चे को मृत कर्मचारी का क्लास-1 कानूनी उत्तराधिकारी माना था। यानी बच्चे के वैधानिक अधिकार और दूसरी पत्नी के व्यक्तिगत सेवा लाभ के दावे को अलग-अलग माना गया। संथाल समुदाय में दूसरी शादी की प्रथा का दिया था हवाला साहिबगंज के बोरियो प्रखंड में पंचायत सेवक रहे बरनवास माल्टू की सेवाकाल के दौरान 11 जुलाई 2011 को मृत्यु हो गई थी। उनकी पहली पत्नी सरोजिनी किस्कू थीं। बाद में मार्था मुर्मू ने खुद को उनकी दूसरी पत्नी बताते हुए अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया। उनका कहना था कि वह और दिवंगत कर्मचारी संथाल समुदाय से हैं और संथाल प्रथागत व्यवस्था में दूसरी शादी की अनुमति है। इसलिए उन्हें अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। प्रथागत कानून में दूसरी शादी की अनुमति हो, फिर भी नियम आड़े आएंगे इस फैसले का असर दूसरी शादी करने वाले सरकारी कर्मचारियों के परिवारों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। फैसले से साफ है कि प्रथागत कानून में दूसरी शादी की अनुमति होने के बावजूद सरकारी कर्मचारी सेवा आचरण नियमों से बाहर नहीं हो सकते। बिना सरकारी अनुमति दूसरी शादी करने पर बाद में सेवा लाभ से जुड़े विवाद में दूसरी पत्नी का दावा मुश्किल हो सकता है। हालांकि, दूसरी पत्नी से पैदा बच्चे के अधिकार को कोर्ट ने अलग माना है। बच्चे को पिता की संपत्ति या अन्य अधिकारों से सिर्फ इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि माता-पिता की शादी सेवा नियमों के लिहाज से विवादित थी।
हाईकोर्ट का फैसला:पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी पत्नी सरकारी नौकरी में अनुकंपा नियुक्ति का हक नहीं मांग सकती
