कर्ज के दलदल से बाहर निकलने और लेनदारों को गुमराह करने के लिए नालंदा के कतरीसराय थाना क्षेत्र में अपहरण की साजिश की। एक युवक ने खुद ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपने अपहरण का हाई-वोल्टेज ड्रामा रचा था। ये परिवार से 10 लाख वसूलने के फिराक में था। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और तकनीकी सूझबूझ के आगे यह साजिश महज साढ़े तीन घंटे में ढह गई। पुलिस ने मुख्य आरोपी युवक सहित तीन साजिशकर्ताओं को नवादा के वारसलीगंज से गिरफ्तार कर लिया है। फर्जी ‘साइबर सेल अधिकारी’ बनकर आए थे दोस्त कतरीसराय के संगत टोला निवासी स्वर्गीय टुनटुन प्रसाद का 28 वर्षीय बेटा रौशन कुमार कर्ज के भारी दबाव में था। खुद को इस स्थिति से निकालने के लिए उसने एक हैरान करने वाली योजना बनाई। योजना के तहत उसके कुछ दोस्त उसके घर पहुंचे। उन्होंने खुद को समस्तीपुर साइबर सेल का अधिकारी बताया और रौशन के परिजनों को बकायदा मुहर लगा हुआ एक फर्जी सरकारी पत्र भी दिखाया। पूछताछ का बहाना बनाकर वे रौशन को अपने साथ ले गए। शुरुआती तौर पर रौशन के परिजन इसे असली पुलिसिया कार्रवाई समझकर शांत रहे, लेकिन काफी देर तक संपर्क न होने पर उन्हें अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने तुरंत स्थानीय कतरीसराय थाने को इसकी सूचना दी। कतरीसराय पुलिस की मुस्तैदी से साढ़े तीन घंटे में भंडाफोड़ मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कतरीसराय के अपर थानाध्यक्ष आदित्य कुमार ने तुरंत मोर्चा संभाला। प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध लगने पर उन्होंने समस्तीपुर साइबर डीएसपी से संपर्क साधा, जहां से किसी भी टीम के कतरीसराय भेजे जाने की बात से साफ इनकार कर दिया गया। मामला फर्जीवाड़े का निकलते ही डीएसपी संजीत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। अपर थानाध्यक्ष ने बताया कितकनीकी साक्ष्यों (लोकेशन और सर्विलांस) के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की और महज साढ़े तीन घंटे के भीतर पूरे मामले का खुलासा करते हुए रौशन कुमार और उसके दो साथियों को वारसलीगंज से गिरफ्तार कर लिया। कर्ज से बचने को रची थी साजिश अपर थानाध्यक्ष ने बताया कि पुलिस की पूछताछ में मुख्य आरोपी रौशन कुमार ने स्वीकार किया कि उस पर कर्ज है। लेनदारों के बढ़ते दबाव और बदनामी के डर से बचने के लिए उसने इस अपहरण कांड की पटकथा खुद लिखी थी। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी साजिश में आधुनिक तकनीक और एआई जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया गया था, जिसे विफल कर दिया गया। फिलहाल इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी पर कितना कर्ज है।
नालंदा में खुद की किडनैपिंग प्लान करने वाला युवक गिरफ्तार:फर्जी साइबर अफसर बनकर आए थे दोस्त; कर्ज से बचने के लिए रची थी साजिश
कर्ज के दलदल से बाहर निकलने और लेनदारों को गुमराह करने के लिए नालंदा के कतरीसराय थाना क्षेत्र में अपहरण की साजिश की। एक युवक ने खुद ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपने अपहरण का हाई-वोल्टेज ड्रामा रचा था। ये परिवार से 10 लाख वसूलने के फिराक में था। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और तकनीकी सूझबूझ के आगे यह साजिश महज साढ़े तीन घंटे में ढह गई। पुलिस ने मुख्य आरोपी युवक सहित तीन साजिशकर्ताओं को नवादा के वारसलीगंज से गिरफ्तार कर लिया है। फर्जी ‘साइबर सेल अधिकारी’ बनकर आए थे दोस्त कतरीसराय के संगत टोला निवासी स्वर्गीय टुनटुन प्रसाद का 28 वर्षीय बेटा रौशन कुमार कर्ज के भारी दबाव में था। खुद को इस स्थिति से निकालने के लिए उसने एक हैरान करने वाली योजना बनाई। योजना के तहत उसके कुछ दोस्त उसके घर पहुंचे। उन्होंने खुद को समस्तीपुर साइबर सेल का अधिकारी बताया और रौशन के परिजनों को बकायदा मुहर लगा हुआ एक फर्जी सरकारी पत्र भी दिखाया। पूछताछ का बहाना बनाकर वे रौशन को अपने साथ ले गए। शुरुआती तौर पर रौशन के परिजन इसे असली पुलिसिया कार्रवाई समझकर शांत रहे, लेकिन काफी देर तक संपर्क न होने पर उन्हें अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने तुरंत स्थानीय कतरीसराय थाने को इसकी सूचना दी। कतरीसराय पुलिस की मुस्तैदी से साढ़े तीन घंटे में भंडाफोड़ मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कतरीसराय के अपर थानाध्यक्ष आदित्य कुमार ने तुरंत मोर्चा संभाला। प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध लगने पर उन्होंने समस्तीपुर साइबर डीएसपी से संपर्क साधा, जहां से किसी भी टीम के कतरीसराय भेजे जाने की बात से साफ इनकार कर दिया गया। मामला फर्जीवाड़े का निकलते ही डीएसपी संजीत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। अपर थानाध्यक्ष ने बताया कितकनीकी साक्ष्यों (लोकेशन और सर्विलांस) के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की और महज साढ़े तीन घंटे के भीतर पूरे मामले का खुलासा करते हुए रौशन कुमार और उसके दो साथियों को वारसलीगंज से गिरफ्तार कर लिया। कर्ज से बचने को रची थी साजिश अपर थानाध्यक्ष ने बताया कि पुलिस की पूछताछ में मुख्य आरोपी रौशन कुमार ने स्वीकार किया कि उस पर कर्ज है। लेनदारों के बढ़ते दबाव और बदनामी के डर से बचने के लिए उसने इस अपहरण कांड की पटकथा खुद लिखी थी। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी साजिश में आधुनिक तकनीक और एआई जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया गया था, जिसे विफल कर दिया गया। फिलहाल इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी पर कितना कर्ज है।

