नालंदा के उपभोक्ताओं का लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। चंडी के जैतीपुर मोड़ के पास निर्माणाधीन जिले का आठवां ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस 132/33) का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अगर सब कुछ निर्धारित योजना और वर्तमान रफ्तार के अनुसार चला, तो 30 जून से इस ग्रिड के माध्यम से बिजली की आपूर्ति विधिवत शुरू हो जाएगी। इस ग्रिड के चालू होते ही चंडी, नगरनौसा, थरथरी, नूरसराय और हिलसा प्रखंडों के हजारों उपभोक्ताओं को ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज के रोजमर्रा के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी और उन्हें बिना किसी रुकावट के गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलेगी। टावर लगाने का काम 90 फीसदी पूरा इस नए चंडी ग्रिड में 50-50 एमवीए के दो पावर ट्रांसफॉर्मर सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही पैनल और कंट्रोल रूम का निर्माण काम भी पूरी तरह से संपन्न हो गया है। सर्किट लाइन बिछाने के लिए करीब 187 टावर लगाए जाने हैं, जिनमें से 90 फीसदी का काम पूरा कर लिया गया है। इस ग्रिड को 132 केवी की चार सर्किट लाइनों के जरिए आधुनिक रिंग सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसे अस्थावां ग्रिड (220/132/33 केवी) और चेरन ग्रिड (132/33 केवी) के साथ कनेक्ट किया जा रहा है। इसके लिए चंडी से चेरन के बीच लगभग 20 किलोमीटर और अस्थावां के बीच 40 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जा रही है। रिंग सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि किसी एक ग्रिड या एक सर्किट लाइन में तकनीकी खराबी आती है, तो बिना समय गंवाए दूसरे ग्रिड व सर्किट लाइन से बिजली की आपूर्ति तुरंत बहाल हो जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में चंडी और नगरनौसा के पावर सब स्टेशनों (पीएसएस) को हरनौत के चेरन ग्रिड से बिजली दी जाती है। वहीं, नूरसराय और थरथरी को बिहारशरीफ की बड़ी पहाड़ी ग्रिड से, जबकि हिलसा को एकंगरसराय से बिजली मिलती है। ग्रिड से दूरी अधिक होने के कारण लाइन ट्रिप होने और लो-वोल्टेज की समस्या आम बात हो गई है, जिसका सीधा खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। पावर सब स्टेशनों को वोल्टेज मिलेगा चंडी ग्रिड से बिजली की आपूर्ति बहाल होने के बाद न केवल ट्रिपिंग की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी, बल्कि बड़ी पहाड़ी, चेरन ग्रिड और एकंगरसराय ग्रिड पर पड़ने वाला ओवरलोड भी काफी हद तक घट जाएगा। नए ग्रिड से जुड़ने वाले चंडी, नगरनौसा, भोभी, नूरसराय, थरथरी और हिलसा के पावर सब स्टेशनों को भरपूर वोल्टेज मिलने लगेगा, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। आपको बता दें कि जिले में वर्तमान में सात ग्रिड सब स्टेशन पहले से संचालित हैं, जिनमें सुपर ग्रिड कैंपस (पुलिस लाइन के पास), बिहारशरीफ बड़ी पहाड़ी, राजगीर, नालंदा, एकंगरसराय, चेरन (हरनौत) और बेनार (अस्थावां) शामिल हैं। चंडी का यह नया ग्रिड जिले का आठवां ग्रिड होगा। ट्रांसमिशन डिपार्टमेंट, बिहारशरीफ के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शैलेश कुमार सिंहा ने जानकारी देते हुए बताया कि चंडी ग्रिड में पावर ट्रांसफॉर्मर लगाए जा चुके हैं और पैनल व कंट्रोल रूम का निर्माण हो चुका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सर्किट लाइन बिछाने का काम बेहद तेज रफ्तार से चल रहा है और 30 जून तक यहां से आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी, जिसके बाद उपभोक्ताओं को बिना रुकावट बिजली मिलने लगेगी।
नालंदा में 30 जून से शुरू होगा चंडी ग्रिड सब-स्टेशन:पांच प्रखंडों के उपभोक्ताओं को मिलेगी बिजली, लो-वोल्टेज से मिलेगा छुटकारा
नालंदा के उपभोक्ताओं का लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। चंडी के जैतीपुर मोड़ के पास निर्माणाधीन जिले का आठवां ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस 132/33) का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अगर सब कुछ निर्धारित योजना और वर्तमान रफ्तार के अनुसार चला, तो 30 जून से इस ग्रिड के माध्यम से बिजली की आपूर्ति विधिवत शुरू हो जाएगी। इस ग्रिड के चालू होते ही चंडी, नगरनौसा, थरथरी, नूरसराय और हिलसा प्रखंडों के हजारों उपभोक्ताओं को ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज के रोजमर्रा के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी और उन्हें बिना किसी रुकावट के गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलेगी। टावर लगाने का काम 90 फीसदी पूरा इस नए चंडी ग्रिड में 50-50 एमवीए के दो पावर ट्रांसफॉर्मर सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही पैनल और कंट्रोल रूम का निर्माण काम भी पूरी तरह से संपन्न हो गया है। सर्किट लाइन बिछाने के लिए करीब 187 टावर लगाए जाने हैं, जिनमें से 90 फीसदी का काम पूरा कर लिया गया है। इस ग्रिड को 132 केवी की चार सर्किट लाइनों के जरिए आधुनिक रिंग सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इसे अस्थावां ग्रिड (220/132/33 केवी) और चेरन ग्रिड (132/33 केवी) के साथ कनेक्ट किया जा रहा है। इसके लिए चंडी से चेरन के बीच लगभग 20 किलोमीटर और अस्थावां के बीच 40 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाई जा रही है। रिंग सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यदि किसी एक ग्रिड या एक सर्किट लाइन में तकनीकी खराबी आती है, तो बिना समय गंवाए दूसरे ग्रिड व सर्किट लाइन से बिजली की आपूर्ति तुरंत बहाल हो जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में चंडी और नगरनौसा के पावर सब स्टेशनों (पीएसएस) को हरनौत के चेरन ग्रिड से बिजली दी जाती है। वहीं, नूरसराय और थरथरी को बिहारशरीफ की बड़ी पहाड़ी ग्रिड से, जबकि हिलसा को एकंगरसराय से बिजली मिलती है। ग्रिड से दूरी अधिक होने के कारण लाइन ट्रिप होने और लो-वोल्टेज की समस्या आम बात हो गई है, जिसका सीधा खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। पावर सब स्टेशनों को वोल्टेज मिलेगा चंडी ग्रिड से बिजली की आपूर्ति बहाल होने के बाद न केवल ट्रिपिंग की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी, बल्कि बड़ी पहाड़ी, चेरन ग्रिड और एकंगरसराय ग्रिड पर पड़ने वाला ओवरलोड भी काफी हद तक घट जाएगा। नए ग्रिड से जुड़ने वाले चंडी, नगरनौसा, भोभी, नूरसराय, थरथरी और हिलसा के पावर सब स्टेशनों को भरपूर वोल्टेज मिलने लगेगा, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। आपको बता दें कि जिले में वर्तमान में सात ग्रिड सब स्टेशन पहले से संचालित हैं, जिनमें सुपर ग्रिड कैंपस (पुलिस लाइन के पास), बिहारशरीफ बड़ी पहाड़ी, राजगीर, नालंदा, एकंगरसराय, चेरन (हरनौत) और बेनार (अस्थावां) शामिल हैं। चंडी का यह नया ग्रिड जिले का आठवां ग्रिड होगा। ट्रांसमिशन डिपार्टमेंट, बिहारशरीफ के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शैलेश कुमार सिंहा ने जानकारी देते हुए बताया कि चंडी ग्रिड में पावर ट्रांसफॉर्मर लगाए जा चुके हैं और पैनल व कंट्रोल रूम का निर्माण हो चुका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सर्किट लाइन बिछाने का काम बेहद तेज रफ्तार से चल रहा है और 30 जून तक यहां से आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी, जिसके बाद उपभोक्ताओं को बिना रुकावट बिजली मिलने लगेगी।

