Saturday, September 19, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

नीलाइगोट में जल संरक्षण से बदली तस्वीर, गांव में बढ़ेगा स्वरोजगार


भास्कर न्यूज |चाईबासा जिले के सोनुआ प्रखंड के नीलाइगोट गांव में जल संरक्षण की पहल ने वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या के समाधान की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। कभी गर्मी के मौसम में पानी के लिए दूर-दराज के गांवों तक पैदल जाने को विवश ग्रामीण अब जल संरक्षण के माध्यम से कृषि, मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों की नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहे हैं। नीलाइगोट गांव के करीब 140 आदिवासी परिवार लंबे समय से गर्मी के दिनों में जल संकट का सामना करते रहे हैं। गांव के तालाब एवं अन्य जलस्रोत सूख जाने के कारण महिलाओं को स्नान और कपड़े धोने जैसी दैनिक आवश्यकताओं के लिए पड़ोसी गांव तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। जल संकट का सीधा प्रभाव कृषि एवं ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ता था। इस चुनौती से निपटने के लिए ग्रामीणों ने ग्राम सभा एवं पानी पंचायत के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर पहल शुरू की। ग्रामीणों ने गांव में उपलब्ध जल संसाधनों का आकलन कर जल संकट के कारणों को समझा तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संभावित समाधान पर विचार-विमर्श किया। इसी क्रम में जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के लिए रिसाव तालाब (परकोलेशन टैंक) निर्माण की आवश्यकता सामने आई। सर्वेक्षण के दौरान तालाब निर्माण के लिए पोमा माझी की भूमि को उपयुक्त पाया गया। पोमा माझी ने सामुदायिक हित को प्राथमिकता देते हुए अपनी भूमि पर संरचना निर्माण के लिए सहमति दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस जलस्रोत का उपयोग गांव के अन्य परिवार भी कर सकेंगे। पानी पंचायत में विचार-विमर्श एवं सामुदायिक सहमति के बाद प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई और झारखंड सरकार के भूमि संरक्षण निदेशालय के माध्यम से रिसाव तालाब का निर्माण कराया गया। इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि गांव की स्मृति में पहली बार किसी सामुदायिक जल परिसंपत्ति का स्वामित्व एक महिला के नाम दर्ज हुआ है। निर्मित जल संरचना से लगभग 5 एकड़ भूमि की सिंचाई की संभावना है। पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि नीलाइगोट की पहल यह दर्शाती है कि जब ग्रामीण अपने प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी करता है, तो स्थानीय स्तर पर स्थायी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की संरचनाओं को केवल जल संचयन तक सीमित न रखते हुए उन्हें कृषि, मत्स्य पालन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़ना आवश्यक है। डीसी ने कहा कि नीलाइगोट की यह पहल इस बात का उदाहरण बन रही है कि सामुदायिक भागीदारी, महिला नेतृत्व और जल संरक्षण को एक साथ जोड़कर गांवों में जल सुरक्षा एवं आजीविका के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles