Tuesday, July 28, 2026

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नेपाली बहुओं को मतदाता-सूची में जुड़ने के लिए नए नियम:7 साल का वैवाहिक जीवन और मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य


भारत में विवाह के बाद रह रही नेपाली मूल की महिलाओं के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब भारतीय दूल्हों से शादी के सात साल पूरे कर चुकी नेपाली बहुओं का नाम ही मतदाता सूची में शामिल किया जा सकेगा। इसके लिए विवाह का विधिवत निबंधन (मैरिज रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा। साल 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चलाए गए मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के दौरान किशनगंज जिले में लगभग 8,500 नेपाली मूल की महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। अब भारत सरकार और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत इन नामों को दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है। महिलाओं ने अपनी परेशानी की साझा सीमावर्ती ठाकुरगंज क्षेत्र में विवाह कर भारत आईं पूजा कुमारी यादव, चंदना देवी, चंपा देवी, सामसा खातून और जहाना बेगम सहित कई महिलाओं ने अपनी परेशानी साझा की। उनका कहना है कि उनकी शादी 15 से 20 वर्ष पहले भारत में हुई थी और वे वर्षों से मतदाता सूची में शामिल थीं, लेकिन 2025 के पुनरीक्षण अभियान में अचानक उनके नाम हटा दिए गए। महिलाओं के अनुसार, भारतीय नागरिकता प्राप्त करने और मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए अब उनसे नेपाली नागरिकता त्याग पत्र, पति का जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट, पंजीकृत विवाह प्रमाण पत्र और भारत में लगातार सात वर्षों तक निवास करने का प्रमाण मांगा जा रहा है। आवश्यक दस्तावेजों की दी जा रही जानकारी ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं का कहना है कि इतनी जटिल कागजी प्रक्रिया और औपचारिकताओं को पूरा करना उनके लिए बेहद कठिन साबित हो रहा है। प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान चलाकर महिलाओं को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी जा रही है। नेपाली बहुओं को वैधानिक मान्यता दिलाने के उद्देश्य से विवाह निबंधन की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। अब तक निबंधन कार्यालय में मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए 167 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। गौरतलब है कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र के कई जिले नेपाल सीमा से जुड़े हुए हैं, जिससे यह मुद्दा इन क्षेत्रों में विशेष महत्व रखता है। किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और सुपौल में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं रहती हैं, जिनका मायका नेपाल में है और विवाह के बाद वे भारत में रह रही हैं। ऐसे में नई प्रक्रिया का असर हजारों नेपाली मूल की बहुओं पर पड़ने वाला है।

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