![]()
रिम्स से ठीक होने वाले रोगियों को जिला अस्पताल में शिफ्ट कराने का था निर्देश, पर…
रिम्स में मरीजों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए एक नई गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया गया था। इसके तहत ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल में शिफ्ट किया जाना था, जिन्हें डॉक्टर स्वस्थ घोषित कर चुके हैं और जिन्हें अब सिर्फ नर्सिंग केयर की जरूरत है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि ठीक हो चुके मरीज भी लंबे समय तक भर्ती रहते हैं। दैनिक भास्कर ने पिछले दो दिनों में मेडिसिन विभाग के सभी वार्डों में भर्ती करीब 200 मरीजों के बारे में संबंधित वार्ड के नर्सिंग स्टाफ से जानकारी ली। हर वार्ड से लगभग एक जैसी स्थिति सामने आई… करीब 50% मरीज ऐसे हैं जो लगभग स्वस्थ हो चुके हैं और उन्हें सिर्फ 2-3 दिन की नर्सिंग केयर की जरूरत है। यह नर्सिंग केयर केवल रिम्स में ही नहीं, बल्कि जिला अस्पतालों में भी आसानी से दी जा सकती है। इसके बावजूद कई मरीजों के परिजन उन्हें डिस्चार्ज कराने के बजाय रिम्स में ही रखना चाहते हैं, जिससे अस्पताल पर अनावश्यक दबाव बना रहता है। बेड खाली नहीं रहने के कारण इमरजेंसी में मरीज 72-72 घंटे तक पड़े रह जा रहे हैं। 29 वर्षीय विक्रम स्वस्थ हो चुके, पर छुट्टी नहीं ले रहे…
मेडिसिन विभाग के डी2 वार्ड में भर्ती मोराबादी का 29 वर्षीय विक्रम कुमार सिंह करीब 10 दिन पहले रिम्स में भर्ती हुआ था। तब उसे पेट फूलने और बुखार की समस्या थी। पिछले 3-4 दिन से वह स्वस्थ है। लेकिन डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी है। परिजनों का कहना है कि अब अल्ट्रासाउंड भी कराने के बाद ही छुट्टी लेकर घर जाएंगे। आईसीयू में जगह नहीं मिली, कारण- वेंटिलेटर खाली नहीं…
इमरजेंसी में बेड नंबर ई46 में भर्ती लोहरदगा के रहने वाले महानंद महतो को 15 दिन पहले रिम्स के इमरजेंसी में एडमिट किया गया था। तब से ये यहीं भर्ती हैं। इन्हें पेट दर्द और सांस लेने में तकलीफ थी। अभी वेंटिलेटर सपोर्ट पर एफआईओ2 60% पर इलाजरत हैं। इनके परिजनों ने बताया कि इमरजेंसी से किसी आईसीयू में इसलिए शिफ्ट नहीं किया गया क्योंकि कहीं वेंटिलेटर खाली नहीं था। इन विभागों में मरीजों का सबसे ज्यादा दबाव…
रिम्स में मरीजों का सबसे ज्यादा लोड न्यूरोसर्जरी विभाग में रहता है। यहां भी कई बार देखा जाता है कि ऑपरेशन के बाद 15-20 दिन तक मरीज एडमिट रहते हैं। हालांकि, ये काफी गंभीर रोगी होते हैं और सर्जरी के बाद भी इन्हें ऑब्जर्वेशन में रहना पड़ता है। इसके बाद सबसे ज्यादा भीड़ मेडिसिन विभाग, फिर कार्डियोलॉजी, सर्जरी, न्यूरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी विभाग में है। स्वास्थ्य विभाग के स्तर से बननी थी गाइडलाइन
स्वास्थ्य विभाग के स्तर से इस संबंध में गाइडलाइन तैयार होनी थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रिम्स में बढ़ती मरीजों की भीड़, सीमित बेड और संसाधनों को देखते हुए यह निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि जल्द से जल्द गाइडलाइन बनाई जाए और सदर अस्पतालों में नर्सिंग केयर की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अब तक यह गाइडलाइन तैयार नहीं हो सकी है।

