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पटना में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में डेंगू के 4 नए मरीज सामने आए हैं, जिससे इस सीजन में कुल संक्रमितों की संख्या 156 तक पहुंच गई है। बारिश और जगह-जगह जलजमाव के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, कुल 156 मरीजों में से 76 सरकारी अस्पतालों में दर्ज किए गए हैं। वहीं, 62 मरीजों की पुष्टि निजी अस्पतालों में हुई है, जबकि 18 मरीजों में विभिन्न जांच लैब के माध्यम से डेंगू संक्रमण की पुष्टि हुई है। बारिश के साथ मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। पटना में जुलाई महीने से ही डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। महीने की शुरुआत में इक्का-दुक्का मरीज सामने आ रहे थे, लेकिन अब संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जलजमाव और घरों के आसपास जमा साफ पानी को समय रहते नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिनों में संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ सकता है। पटना सिविल सर्जन कार्यालय ने सरकारी और निजी अस्पतालों को बुखार के संदिग्ध मरीजों की जांच पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, डेंगू की पुष्टि होने के बाद मरीज की जानकारी तत्काल संबंधित पोर्टल पर अपलोड करने को कहा गया है। बारिश और जलजमाव ने बढ़ाई चिंता यह निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि स्वास्थ्य विभाग संक्रमित मरीज के आसपास के क्षेत्र में मच्छर नियंत्रण की प्रभावी कार्रवाई कर सके और संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। डेंगू का खतरा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी को माना जा रहा है। खासकर घरों, दुकानों, छतों और खाली प्लॉट में जमा साफ पानी एडीज एजिप्टी मच्छर के लिए प्रजनन का स्थान बन सकता है।
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें जलजमाव वाले इलाकों में एंटी-लार्वा छिड़काव, फॉगिंग और मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान करने में जुटी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्तर पर चलने वाले अभियानों के साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। डेंगू बढ़ने की प्रमुख वजहें बारिश के बाद जगह-जगह साफ पानी जमा होना, कूलर, गमले और पानी रखने वाले बर्तनों में पानी का लंबे समय तक जमा रहना, छतों पर खुली पानी की टंकियां और कंटेनर, पुराने टायर और कबाड़ में बारिश का पानी भर जाना, घनी आबादी वाले इलाकों में मच्छरों के प्रजनन स्थल बढ़ना, दिन में काटने वाले एडीज मच्छरसे बचाव को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी, नमी और तापमान का मच्छरों के प्रजनन के अनुकूल होना।
दोबारा डेंगू हुआ तो गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है आईजीआईएमएस के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गोविन्द कुमार के अनुसार, एक बार डेंगू होने के बाद व्यक्ति भविष्य में डेंगू संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता। डेंगू वायरस के चार प्रमुख सीरोटाइप डेनवी-1, डेनवी-2, डेनवी-3 और डेनवी-4 होते हैं। एक सीरोटाइप से संक्रमण के बाद उसी प्रकार के वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। लेकिन भविष्य में किसी दूसरे सीरोटाइप से संक्रमण होने पर कुछ लोगों में गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में गंभीर डेंगू, डेंगू हेमोरेजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए जिन लोगों को पहले डेंगू हो चुका है, उन्हें भी इस मौसम में मच्छरों से बचाव को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
दिन में काटता है एडीज मच्छर डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी मच्छर सामान्य मच्छरों से अलग व्यवहार करता है। यह मुख्य रूप से दिन के समय सक्रिय रहता है। सुबह और शाम इसके काटने की संभावना अधिक रहती है। यही वजह है कि सिर्फ रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं माना जाता।
एडीज मच्छर की खास बातें मुख्य रूप से दिन के समय काटता है, साफ और रुके हुए पानी में अंडे देता है, आमतौर पर अपने प्रजनन स्थल के आसपास ही रहता और उड़ता है, मादा मच्छर ही डेंगू वायरस को इंसानों तक पहुंचाती है, इसके अंडे सूखी सतह पर भी कुछ समय तक जीवित रह सकते हैं और पानी मिलने पर दोबारा विकसित हो सकते हैं।
घर में इन जगहों पर जरूर रखें नजर डेंगू से बचाव के लिए घर के अंदर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना सबसे जरूरी है। कूलर का पानी नियमित रूप से खाली कर उसे साफ करना चाहिए। गमलों की ट्रे, बाल्टी, ड्रम, टूटे बर्तन, पुराने टायर और छत पर रखे ऐसे सभी सामान की जांच करनी चाहिए, जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है। पानी की टंकियों को ढककर रखें। घर के आसपास जमा पानी को हटाएं और जरूरत होने पर मच्छररोधी उपायों का इस्तेमाल करें। दिन में बाहर निकलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनना भी बचाव में मददगार हो सकता है।
तेज बुखार को नजरअंदाज न करें स्वास्थ्य विशेषज्ञ मनोज कुमार सिन्हा के अनुसार डेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द, उल्टी, कमजोरी और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और जरूरत के अनुसार जांच करानी चाहिए। पटना सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने लोगों से अपील की है की अपने घर और आसपास पानी जमा नहीं होने दें । उनका कहना है कि डेंगू को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। कूलर और पानी रखने वाले बर्तनों को नियमित रूप से साफ करने, दिन में भी मच्छरों से बचाव करने और बुखार की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है। * कुल डेंगू मरीज:- 156
* पिछले 24 घंटे में नए मरीज:- 4
* सरकारी अस्पतालों में:- 76
* निजी अस्पतालों में:- 62
* विभिन्न लैब जांच में:- 18 बारिश का दौर जारी रहने के बीच स्वास्थ्य विभाग की चुनौती अब संक्रमण की रफ्तार को नियंत्रित करने की है। इसके लिए फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान के साथ लोगों को अपने घर और आसपास मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करने होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू की रोकथाम सरकारी अभियान से ज्यादा घर-घर की सावधानी पर निर्भर करती है।
