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पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला है। इसको लेकर उन्होंने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस अपने आवास पर किया था। उन्होंने न्होंने जल संसाधन मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के इस्तीफे की मांग की। पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हैं, लेकिन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। 25 साल से सत्ता में रहने के बावजूद नदियों और तटबंधों की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने बाढ़ के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपए खर्च होने के बावजूद नदियों में गाद जमा होने और तटबंधों के टूटने पर सवाल उठाया। नदियों में गाद जमा होने पर उठाए सवाल पप्पू यादव ने कहा कि गंगा समेत बिहार की कई नदियों में भारी मात्रा में गाद जमा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर यह गाद किसने जमा की है? क्या इसे नासा ने जमा किया है? उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ के नाम पर सरकार और अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर पैसा खर्च किया, लेकिन नदियों की वास्तविक स्थिति सुधारने पर ध्यान नहीं दिया गया।
तटबंध टूटने और इंजीनियरों पर कार्रवाई की जांच की मांग पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में एक ही जगह बार-बार तटबंध क्यों टूटते हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच सांठगांठ है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सात इंजीनियरों पर कार्रवाई और निलंबन हुआ है, लेकिन सिर्फ इंजीनियरों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। सांसद ने मांग की कि जिन ठेकेदारों के काम में गड़बड़ी सामने आई है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। सिंगला और श्रीराम कंस्ट्रक्शन पर लगाए आरोप पप्पू यादव ने निर्माण कार्यों को लेकर सिंगला कंपनी और श्रीराम कंस्ट्रक्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों को दिए गए कई कामों में तटबंध और अन्य निर्माण कार्य टूटे हैं। उनका आरोप है कि कुछ चुनिंदा लोगों को ही बड़े टेंडर दिए जा रहे हैं। सरिया की गुणवत्ता पर भी सवाल पप्पू यादव ने पंचायत भवन और अन्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले सरिया की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने श्याम स्टील के सरिया का नाम लेते हुए इसके इस्तेमाल की जांच कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता खराब है तो इसकी जांच होनी चाहिए और दोषी लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में ठेकेदारी व्यवस्था में बड़े स्तर पर गड़बड़ी है और इसके पीछे मंत्री, अधिकारी और ठेकेदारों का गठजोड़ है। बाढ़ प्रभावितों के बीच 26वें दिन भी जाने की बात पप्पू यादव ने कहा कि वह लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वह 25 दिनों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और अब 26वें दिन भी पीड़ितों से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने छपरा में करीब 50 लाख रुपए की मदद बांटने की बात भी कही। नेताओं के बाढ़ दौरे पर भी साधा निशाना पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भागलपुर गए, लेकिन वहां कुछ ही मिनट रुके। चंपारण में भी मुख्यमंत्री के कम समय रुकने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति में नेताओं को प्रभावित लोगों के बीच अधिक समय देना चाहिए। उन्होंने चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किए जाने का जिक्र करते हुए सवाल किया कि बाढ़ के समय प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए उसी तरह की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती। बाढ़ आती है तो सरकार फोटो शूट करती है- पप्पू यादव पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में बाढ़ और कोरोना जैसी आपदा के समय सरकार लोगों की मदद करने के बजाय केवल फोटो शूट तक सीमित रह जाती है। उन्होंने केंद्र से बिहार को राहत राशि देने की भी मांग की। साथ ही कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य संबंधित लोगों को इस मामले में कई बार पत्र लिखा है। सुप्रीम कोर्ट में मामला ले जाने की बात पप्पू यादव ने कहा कि बाढ़ और तटबंधों से जुड़े मामलों को लेकर वह सुप्रीम कोर्ट में भी फाइल कर चुके हैं। उन्होंने मांग की कि जिन ठेकेदारों के काम में गड़बड़ी सामने आई है, उन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि बिहार की स्थिति अच्छी नहीं है और सरकार को बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के साथ-साथ तटबंधों और नदियों की स्थायी समस्या का समाधान करना चाहिए। MLC चुनाव पर भी बोले पप्पू यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव ने बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एमएलसी चुनाव में बड़े पैमाने पर पैसे का इस्तेमाल होता है और चुनाव लड़ने वाले कई लोग माफिया हैं।
पप्पू यादव ने मंत्री विजय चौधरी से मांगा इस्तीफा:बोले- बाढ़ में 56 लाख लोग प्रभावित हैं, मंत्री-अधिकारी-ठेकेदारों की मिलीभगत से तटबंध टूटे

