झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को वोटिंग होगी। विधानसभा में सुबह नौ बजे से वोटिंग शुरू होगी, जो शाम चार बजे तक चलेगी। मतपेटी सीलबंद करने के बाद चुनाव आयोग को सूचना दी जाएगी। आयोग का निर्देश आने पर शाम करीब पांच बजे से मतगणना शुरू होगी और रात आठ बजे के करीब नतीजे आने की उम्मीद है। इसके लिए विधानसभा तैयार है। इस चुनाव में झामुमो से बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी मैदान में हैं। इससे चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। महागठबंधन के पास कुल 56 वोट हैं, जो दोनों प्रत्याशी की जीत के लिए पर्याप्त है। वहीं एनडीए के पास सिर्फ 24 वोट हैं। इस चार वोट के जुगाड़ ने ही पूरे खेल को बदल दिया है। इधर, चुनाव से पहले राजधानी रांची का राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की एंट्री से बिगड़े चुनावी गणित के बीच बुधवार को दिनभर विधायकों की निगरानी, बैठकों का दौर और संख्या बल के आकलन का दौर जारी रहा। मतदान से पहले किसी भी तरह की राजनीतिक अनिश्चितता या सेंधमारी से बचने के लिए कांग्रेस विधायक भी होटल में सिमट गए हैं। एनडीए के विधायक मंगलवार से ही होटल में डटे हैं। इन्हें वोट डालने के तरीके के साथ जरूरी निर्देश दिए जा रहे हैं। सीएम हाउस में फिर महागठबंधन का मॉक पोल, बैजनाथ को 29, प्रणव को 25 वोट मिले महागठबंधन के 56 में से 54 विधायक बुधवार शाम कांके रोड स्थित सीएम हाउस में जुटे। वहां एक बार फिर मॉक पोल हुआ, जिसमें सभी 54 विधायकों ने महागठबंधन के दोनों प्रत्याशियों के समर्थन में वोटिंग की। बैजनाथ को 29 और प्रणव को 25 वोट मिले। बैठक में स्पीकर रबींद्र नाथ महतो और हेमलाल मुर्मू उपस्थित नहीं थे। दोनों ने फोन पर वोट देने पर सहमति जताई। हेमलाल मुर्मू बीमार हैं। वे गुरुवार को सीधे विधानसभा पहुंचेंगे। बैठक के बाद झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झामुमो के सभी विधायक अपने घर में रहेंगे। गुरुवार सुबह 10 बजे तक सभी विधानसभा पहुंचेंगे। एनडीए पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हमलोगों को होटल में विधायकों को रखना और एकसाथ विधानसभा जाने की जरूरत नहीं है। महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करेंगे। द्वितीय वरीयता के वोट डालने पर भी रणनीति बनी। करीब 30 विधायक द्वितीय वरीयता का वोट डालेंगे। गौरतलब है कि मंगलवार शाम को भी महागठबंधन के सभी विधायकों की सीएम हाउस में बैठक हुई थी। इसमें भी मॉक पोल कराया गया था। उसमें भी 54 वोट मिले थे। स्पीकर रबींद्र नाथ महतो बैठक में शामिल नहीं हुए थे। अब कांग्रेस विधायक भी होटल में शिफ्ट होटल में कांग्रेस विधायकों की दो-तीन दौर की बैठक चली एनडीए के बाद कांग्रेस विधायक भी बुधवार को होटल में शिफ्ट हो गए। वे रात में यहीं रुकेंगे। सुबह यहीं से वोट डालने विधानसभा जाएंगे। होटल में दो-तीन बार बैठक कर रणनीति तय की गई। राजनीतिक समीकरणों पर मंथन का दौर चला। राजद के केंद्रीय महासचिव भोला यादव भी अपने चारों विधायकों संजय प्रसाद यादव, संजय सिंह यादव, सुरेश पासवान और नरेश प्रसाद सिंह के साथ पहुंचे। बैठक में हिस्सा लेकर वापस लौट गए। वहीं माले के विधायक अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो भी बैठक में शामिल हुए और अपना समर्थन देने की घोषणा की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि होटल में रुकने की बाध्यता नहीं है। जो रुकना चाहते थे, उनके लिए व्यवस्था की गई है। एनडीए ने दो बार किया मॉक पोल, दोनों में 24 वोट वैध मिले एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 21 और आजसू, जदयू व लोजपा (आर) के एक-एक विधायक हैं। होटल में ठहरे इन विधायकों का बुधवार को दो बार मॉक पोल कराया गया। पहली बार दोपहर 12:30 बजे और दूसरे बार दोपहर तीन बजे। दोनों बार सभी 24 विधायकों के बैलेट पेपर सही पाए गए। होटल में विधायकों की बैठक भी हुई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में विधायकों को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई। तय हुआ कि सभी विधायक होटल से सुबह नौ बजे बस से विधानसभा जाएंगे। एनडीए का दावा-जयराम मेरे साथ, विधायक बोले-आज लेंगे फैसला एनडीए के एक विधायक ने जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का समर्थन मिलने का दावा किया है। लेकिन जयराम ने इससे साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे बारे में सारे पक्ष सिर्फ कयास लगा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव पर मेरी न एनडीए से कोई बात हुई है और न महागठबंधन से। मैं किसी के संपर्क में नहीं हूं। वोटिंग पर गुरुवार की सुबह निर्णय लूंगा। झामुमो की रणनीति-अपने प्रत्याशी को 30 वोट दिलाएगा: सीएम आवास में महागठबंधन की बैठक में चुनाव की पूरी रणनीति बनाई गई। तय हुआ कि झामुमो अपने प्रत्याशी बैजनाथ राम को लेकर कोई जोखिम मोल नहीं लेगा। उन्हें जीत के लिए निर्धारित 28 की जगह 29 या 30 वोट दिलवाएगा। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को झामुमो की ओर से दूसरी वरीयता का वोट दिलवासर जरउगर। इससे कांग्रेस की जीत अब दूसरी वरीयता के वोट पर टिक गई है।। नाथवानी की जीत के 4 रास्ते अगर नाथवानी को यह सीट निकालनी है, तो माननीयों को इन चार में से किसी एक शॉर्टकट या रणनीति का सहारा लेना पड़ सकता है। 1. रद्द वोट की कलाकारी: पार्टी फरमान के डर से एजेंट को बैलेट पेपर तो दिखा दिया जाएगा, लेकिन टिक मार्क जानबूझकर ऐसी जगह या इस तरह लगाया जाएगा कि वोट काउंटिंग के वक्त खारिज (अमान्य) हो जाए। इससे कुल वैध वोट कम हो जाएगा। 2. एब्सेंट पॉलिटिक्स : वोटिंग के ठीक पहले अचानक तबीयत बिगड़ने का बहाना या कोई इमरजेंसी आ जाए। सदन से गायब रहने पर विरोधी खेमे का जीत का आंकड़ा खुद नीचे आ जाएगा। 3. दूसरी वरीयता का गेमचेंजर: पहली प्राथमिकता में किसी को भी 28 वोट नहीं मिले, तो दूसरी वरीयता के वोट ट्रांसफर का खेल शुरू होगा। यही वो जगह है जहां असली क्रॉस-करंट चलता है। 4. हाई-रिस्क क्रॉस वोटिंग: पार्टी फरमान को सीधे ठेंगा दिखाकर वरीयता चेंज या गलत मार्किंग करना। हालांकि, इससे सदस्यता नहीं जाती है, लेकिन पार्टी का कोपभाजन बन सकते हैं। प्रणव की जीत के रास्ते प्रणव झा को प्रथम वरीयता के 28 वोट मिलते हैं तो जीत जाएंगे। क्रॉस वोटिंग के कारण कम वोट मिले तो द्वितीय वरीयता के वोट की जरूरत होगी। महागठबंधन ने द्वितीय वरीयता की जो रणनीति बनाई है, उसमें उतना ही वोट का लाभ मिल पाएगा, जितना बैजनाथ राम को कोटे से अतिरिक्त वोट मिलेगा। अगर बैजनाथ को 29 वोट मिलता है तो प्रणव को एक वोट का लाभ मिलेगा। भले ही उन्हें द्वितीय वरीयता का 30 वोट ही क्यों न मिल जाए।
परिमल या प्रणव… आज खत्म होगा सस्पेंस:रास चुनाव… वोटिंग सुबह 9 बजे से: महफिल में जो साथ हैं, क्या वो साथ रहेंगे?
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को वोटिंग होगी। विधानसभा में सुबह नौ बजे से वोटिंग शुरू होगी, जो शाम चार बजे तक चलेगी। मतपेटी सीलबंद करने के बाद चुनाव आयोग को सूचना दी जाएगी। आयोग का निर्देश आने पर शाम करीब पांच बजे से मतगणना शुरू होगी और रात आठ बजे के करीब नतीजे आने की उम्मीद है। इसके लिए विधानसभा तैयार है। इस चुनाव में झामुमो से बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी मैदान में हैं। इससे चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। महागठबंधन के पास कुल 56 वोट हैं, जो दोनों प्रत्याशी की जीत के लिए पर्याप्त है। वहीं एनडीए के पास सिर्फ 24 वोट हैं। इस चार वोट के जुगाड़ ने ही पूरे खेल को बदल दिया है। इधर, चुनाव से पहले राजधानी रांची का राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की एंट्री से बिगड़े चुनावी गणित के बीच बुधवार को दिनभर विधायकों की निगरानी, बैठकों का दौर और संख्या बल के आकलन का दौर जारी रहा। मतदान से पहले किसी भी तरह की राजनीतिक अनिश्चितता या सेंधमारी से बचने के लिए कांग्रेस विधायक भी होटल में सिमट गए हैं। एनडीए के विधायक मंगलवार से ही होटल में डटे हैं। इन्हें वोट डालने के तरीके के साथ जरूरी निर्देश दिए जा रहे हैं। सीएम हाउस में फिर महागठबंधन का मॉक पोल, बैजनाथ को 29, प्रणव को 25 वोट मिले महागठबंधन के 56 में से 54 विधायक बुधवार शाम कांके रोड स्थित सीएम हाउस में जुटे। वहां एक बार फिर मॉक पोल हुआ, जिसमें सभी 54 विधायकों ने महागठबंधन के दोनों प्रत्याशियों के समर्थन में वोटिंग की। बैजनाथ को 29 और प्रणव को 25 वोट मिले। बैठक में स्पीकर रबींद्र नाथ महतो और हेमलाल मुर्मू उपस्थित नहीं थे। दोनों ने फोन पर वोट देने पर सहमति जताई। हेमलाल मुर्मू बीमार हैं। वे गुरुवार को सीधे विधानसभा पहुंचेंगे। बैठक के बाद झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झामुमो के सभी विधायक अपने घर में रहेंगे। गुरुवार सुबह 10 बजे तक सभी विधानसभा पहुंचेंगे। एनडीए पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हमलोगों को होटल में विधायकों को रखना और एकसाथ विधानसभा जाने की जरूरत नहीं है। महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करेंगे। द्वितीय वरीयता के वोट डालने पर भी रणनीति बनी। करीब 30 विधायक द्वितीय वरीयता का वोट डालेंगे। गौरतलब है कि मंगलवार शाम को भी महागठबंधन के सभी विधायकों की सीएम हाउस में बैठक हुई थी। इसमें भी मॉक पोल कराया गया था। उसमें भी 54 वोट मिले थे। स्पीकर रबींद्र नाथ महतो बैठक में शामिल नहीं हुए थे। अब कांग्रेस विधायक भी होटल में शिफ्ट होटल में कांग्रेस विधायकों की दो-तीन दौर की बैठक चली एनडीए के बाद कांग्रेस विधायक भी बुधवार को होटल में शिफ्ट हो गए। वे रात में यहीं रुकेंगे। सुबह यहीं से वोट डालने विधानसभा जाएंगे। होटल में दो-तीन बार बैठक कर रणनीति तय की गई। राजनीतिक समीकरणों पर मंथन का दौर चला। राजद के केंद्रीय महासचिव भोला यादव भी अपने चारों विधायकों संजय प्रसाद यादव, संजय सिंह यादव, सुरेश पासवान और नरेश प्रसाद सिंह के साथ पहुंचे। बैठक में हिस्सा लेकर वापस लौट गए। वहीं माले के विधायक अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो भी बैठक में शामिल हुए और अपना समर्थन देने की घोषणा की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि होटल में रुकने की बाध्यता नहीं है। जो रुकना चाहते थे, उनके लिए व्यवस्था की गई है। एनडीए ने दो बार किया मॉक पोल, दोनों में 24 वोट वैध मिले एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 21 और आजसू, जदयू व लोजपा (आर) के एक-एक विधायक हैं। होटल में ठहरे इन विधायकों का बुधवार को दो बार मॉक पोल कराया गया। पहली बार दोपहर 12:30 बजे और दूसरे बार दोपहर तीन बजे। दोनों बार सभी 24 विधायकों के बैलेट पेपर सही पाए गए। होटल में विधायकों की बैठक भी हुई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में विधायकों को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई। तय हुआ कि सभी विधायक होटल से सुबह नौ बजे बस से विधानसभा जाएंगे। एनडीए का दावा-जयराम मेरे साथ, विधायक बोले-आज लेंगे फैसला एनडीए के एक विधायक ने जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का समर्थन मिलने का दावा किया है। लेकिन जयराम ने इससे साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे बारे में सारे पक्ष सिर्फ कयास लगा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव पर मेरी न एनडीए से कोई बात हुई है और न महागठबंधन से। मैं किसी के संपर्क में नहीं हूं। वोटिंग पर गुरुवार की सुबह निर्णय लूंगा। झामुमो की रणनीति-अपने प्रत्याशी को 30 वोट दिलाएगा: सीएम आवास में महागठबंधन की बैठक में चुनाव की पूरी रणनीति बनाई गई। तय हुआ कि झामुमो अपने प्रत्याशी बैजनाथ राम को लेकर कोई जोखिम मोल नहीं लेगा। उन्हें जीत के लिए निर्धारित 28 की जगह 29 या 30 वोट दिलवाएगा। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को झामुमो की ओर से दूसरी वरीयता का वोट दिलवासर जरउगर। इससे कांग्रेस की जीत अब दूसरी वरीयता के वोट पर टिक गई है।। नाथवानी की जीत के 4 रास्ते अगर नाथवानी को यह सीट निकालनी है, तो माननीयों को इन चार में से किसी एक शॉर्टकट या रणनीति का सहारा लेना पड़ सकता है। 1. रद्द वोट की कलाकारी: पार्टी फरमान के डर से एजेंट को बैलेट पेपर तो दिखा दिया जाएगा, लेकिन टिक मार्क जानबूझकर ऐसी जगह या इस तरह लगाया जाएगा कि वोट काउंटिंग के वक्त खारिज (अमान्य) हो जाए। इससे कुल वैध वोट कम हो जाएगा। 2. एब्सेंट पॉलिटिक्स : वोटिंग के ठीक पहले अचानक तबीयत बिगड़ने का बहाना या कोई इमरजेंसी आ जाए। सदन से गायब रहने पर विरोधी खेमे का जीत का आंकड़ा खुद नीचे आ जाएगा। 3. दूसरी वरीयता का गेमचेंजर: पहली प्राथमिकता में किसी को भी 28 वोट नहीं मिले, तो दूसरी वरीयता के वोट ट्रांसफर का खेल शुरू होगा। यही वो जगह है जहां असली क्रॉस-करंट चलता है। 4. हाई-रिस्क क्रॉस वोटिंग: पार्टी फरमान को सीधे ठेंगा दिखाकर वरीयता चेंज या गलत मार्किंग करना। हालांकि, इससे सदस्यता नहीं जाती है, लेकिन पार्टी का कोपभाजन बन सकते हैं। प्रणव की जीत के रास्ते प्रणव झा को प्रथम वरीयता के 28 वोट मिलते हैं तो जीत जाएंगे। क्रॉस वोटिंग के कारण कम वोट मिले तो द्वितीय वरीयता के वोट की जरूरत होगी। महागठबंधन ने द्वितीय वरीयता की जो रणनीति बनाई है, उसमें उतना ही वोट का लाभ मिल पाएगा, जितना बैजनाथ राम को कोटे से अतिरिक्त वोट मिलेगा। अगर बैजनाथ को 29 वोट मिलता है तो प्रणव को एक वोट का लाभ मिलेगा। भले ही उन्हें द्वितीय वरीयता का 30 वोट ही क्यों न मिल जाए।


