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जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के हित में महत्वपूर्ण व्यवस्था की है। जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने शुक्रवार को रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को एसआईटी की जांच का मॉनिटर नियुक्त किया। वे जांच के दौरान अभ्यर्थियों को परेशान किए जाने से संबंधित शिकायतों को देखेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिटायर्ड जज की नियुक्ति से एसआईटी की जांच पर रोक नहीं लगेगी। एजेंसी किसी भी व्यक्ति को समन या नोटिस जारी कर सकती है और जांच जारी रख सकती है। कोर्ट ने यह आदेश सीजीएल, फूड सेफ्टी अफसर, सीडीपीओ और जेपीएससी 11वीं-13वीं सिविल सेवा सहित अन्य रिट याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई के दौरान दिया। इन याचिकाओं में सरकार के भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने कहा कि एसआईटी की जांच के दौरान कुछ निर्दोष अभ्यर्थियों को भी बुलाया जा रहा है और उन्हें परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को जांच के दौरान सामने आई सामग्री के आधार पर किसी भी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाने का अधिकार है। केवल किसी व्यक्ति को समन करना अपने आप में उत्पीड़न नहीं माना जा सकता। पर निष्पक्षता और न्याय के हित में उन अभ्यर्थियों की शिकायतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिन्हें जांच के दौरान अनुचित व्यवहार की आशंका है। इसी कारण रिटायर्ड जज को नियुक्त किया है। कोर्ट ने कहा-नियुक्त अभ्यर्थी को एसआईटी का समन मिले तो जांच में करना होगा सहयोग
कोर्ट ने कहा कि मॉनिटर की नियुक्ति का उद्देश्य किसी अभ्यर्थी को जांच से बाहर रखना नहीं है। यदि किसी नियुक्त अभ्यर्थी को एसआईटी का समन मिलता है, तो उसे जांच में पूरा सहयोग करना होगा। लेकिन यदि उसे लगता है कि उसके साथ उत्पीड़न किया जा रहा है, तो वह रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी के समक्ष शिकायत कर सकता है। वे शिकायत की वास्तविकता और सत्यता को देखेंगे। शिकायत सही पाई गई तो इसकी जानकारी एसआईटी प्रमुख को दी जाएगी और उन्हें आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने मामले में परीक्षा रद्द करने के सरकार के आदेश पर रोक बरकरार रखी। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। सीजीएल परीक्षा पर सरकार का जवाब- परीक्षा की पूरी प्रक्रिया दूषित, सही-गलत अभ्यर्थियों में अंतर मुश्किल
सीजीएल परीक्षा रद्द करने मामले में सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया। इसमें परीक्षा रद्द करने को सही ठहराया गया है। कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार की ओर से दाखिल शपथपत्र में कहा गया है कि सीजीएल परीक्षा की पूरी प्रक्रिया ही दूषित हो गई थी। ऐसी स्थिति में सही तरीके से परीक्षा पास करने वाले और गलत तरीके से लाभ लेकर सफल होने वाले अभ्यर्थियों के बीच अंतर कर पाना बेहद मुश्किल है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित दिशा-निर्देशों के आलोक में पूरी परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने शपथपत्र में परीक्षा रद्द करने के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है। इसमें वानशिखा बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश का भी उल्लेख किया गया है। गोपनीय काम संभालने वाली एजेंसी पर गड़बड़ी का आरोप
शपथपत्र में कहा गया है कि सीजीएल परीक्षा से संबंधित गोपनीय कार्य आईसीएन टेक्नोलॉजी को दिया गया था। एजेंसी के जिम्मे प्रश्नपत्र की छपाई, परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य थे। परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में कंपनी के सीईओ सोमांश प्रकाश सहित 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मामले की जांच अभी जारी है। जांच में 265 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। सरकार के अनुसार जांच में एजेंसी की ओर से बड़े पैमाने पर अनियमितता किए जाने के तथ्य सामने आए हैं। जांच में नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो में अलग-अलग केंद्रों पर अभ्यर्थियों को सवालों के जवाब रटाए जाने की जानकारी मिलने की बात शपथपत्र में कही गई है।
परीक्षा रद्द पर रोक बरकरार:एसआईटी जांच की निगरानी करेंगे रिटायर्ड जज, जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने पर हाईकोर्ट में सुनवाई
