
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल अनुमंडल (Ghatal Division) में सांपों का आतंक और सर्पदंश (Snake Bite) की घटनाएं बढ़ गयीं हैं. सबसे ज्यादा शिकार खेत में काम करने वाले किसान और खेतिहर मजदूर हो रहे हैं. हालात की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के अधिकारियों और वन्यजीव बचावकर्मियों ने किसानों को तड़के (सुबह-सुबह) खेतों में नहीं जाने की सलाह दी है.
सुबह-सुबह खेतों में मौत का खतरा
घाटाल सब-डिवीजन सोशल फॉरेस्ट्री के रेंजर रतन सरकार ने बताया कि अंधेरे में या तड़के खेतों में जाना अपनी जान को जोखिम में डालने जैसा है. वर्तमान में घाटाल इलाके में किसान आलू की खेती की तैयारी, धान की कटाई और फसलों पर कीटनाशक के छिड़काव के लिए खेतों में पहुंच रहे हैं. यही जल्दबाजी किसानों के लिए घातक साबित हो रही है.
मौत के खतरे का वैज्ञानिक कारण
घाटाल रेंज के वन्यजीव बचावकर्मी मलय घोष ने इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण समझाया. उन्होंने कहा कि प्राणी विज्ञान के मुताबिक, सांप शीत-रक्ती (Ectothermic या Cold-Blooded) प्राणी होते हैं. वे इंसानों की तरह अपने शरीर का आंतरिक तापमान खुद नियंत्रित नहीं कर सकते. उनका शरीर पूरी तरह से बाहरी तापमान पर निर्भर है.
ये भी पढ़ें: सर्पदंश का इलाज करने वाले कृष्ण मंडल को जहरीले सांप चंद्रबोड़ा ने डंसा, हो गयी मौत
सुबह की ठंड में मांसपेशियों का जकड़ना
मलय घोष के मुताबिक, इस मौसम में सुबह ठंड और दोपहर में गर्मी रहती है. भोर की ठंड में सांपों का शारीरिक तापमान कम हो जाता है. इससे उनकी मांसपेशियां जकड़ जाती हैं और वे तेजी से भागने में असमर्थ होते हैं.
सबसे खतरनाक सांप चंद्रबोड़ा (Russell's Viper)
घोष ने बताया कि अत्यधिक विषैला चंद्रबोड़ा (रसल्स वाइपर) सांप भोर के समय शरीर ठंडा होने के कारण खेत की मेड़ों (आल) से हिल भी नहीं पाता. जब किसान बिना देखे या अंधेरे में वहां काम करते हैं, तो असहाय और डरा हुआ सांप आत्मरक्षा में तुरंत उसे डस लेता है.
जब सूरज की रोशनी पड़ती है और शरीर गर्म होता है, तब सांप सक्रिय होकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं. इसलिए किसानों को पर्याप्त धूप खिलने के बाद ही खेतों में जाने की सलाह दी गयी है.
ये भी पढ़ें: सांप को रेस्क्यू कर लौट रहे थे वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू टीम के सदस्य मलय घोष, उसी सांप ने काटा
सांपों से बचने के लिए वन विभाग की सलाह
- खेत में कीटनाशक का छिड़काव कभी भी चारों तरफ से घेरकर न करें. इससे सांप को भागने का रास्ता नहीं मिलता. हमेशा खेत की मेड़ से कम से कम 5 फीट की दूरी बनाकर एक तरफ से छिड़काव करें, ताकि सांपों को निकलने का मौका मिले.
- धान की कटाई और गट्ठर बांधने का काम सूरज के चढ़ने यानी जब मौसम में गर्मी आ जाये, तभी करें.
- यदि किसी को सांप काट ले, तो घाव के ऊपर रस्सी, गमछा या कपड़ा कसकर कदापि न बांधें.
- झाड़-फूंक या ओझा के चक्कर में समय बर्बाद न करें. मरीज को बिना देरी किये सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं, जहां एंटी-वेनम (Anti-Venom) उपलब्ध है.
ये भी पढ़ें: 15 साल बाद फिर बंगाल में बनेगी सांप के जहर की जीवनरक्षक दवा, जानें 150 करोड़ के प्रोजेक्ट की क्या होंगी शर्तें
बंगाल में पिछले 4 साल में सर्पदंश के मामले
| वर्ष | सर्पदंश के मामले | सर्पदंश से मौत |
| 2022 | 48870 | 478 |
| 2023 | 60984 | 245 |
| 2024 | 85835 | 485 |
| 2025 | 27471 | 65 |
ये भी पढ़ें: West Bengal : सर्पदंश की नयी दवा ने जगायी उम्मीद ,मौतों पर लगेगा अंकुश
The post पश्चिम बंगाल : घाटाल में सांपों का खौफ, किसानों के लिए वन विभाग की विशेष वैज्ञानिक गाइडलाइन appeared first on Prabhat Khabar.
