किशनगंज में सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर 11 भारतीयों की जान बचाने वाले नजाकत से AIMIM नेताओं ने मुलाकात की। नेताओं ने नजाकत की बहादुरी और मानवता की भावना की सराहना करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से उन्हें सम्मानित करने और उचित इनाम देने की मांग की। मुलाकात के दौरान अख्तरुल ईमान, सरवर आलम, गुलाम सरवर और AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हुसैन मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि नजाकत ने कठिन परिस्थितियों में साहस और इंसानियत की मिसाल पेश की है, लेकिन अब तक उन्हें सरकार की ओर से कोई विशेष सम्मान या आर्थिक सहायता नहीं मिली है। ‘देश का हीरो माना जाना चाहिए’ AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने कहा कि पहलगाम हमले के दौरान जब लोग अपनी जान बचाने में लगे थे, उस समय नजाकत ने बहादुरी दिखाते हुए 11 भारतीयों की जान बचाई। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को देश का हीरो माना जाना चाहिए और सरकार को आगे बढ़कर उनका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक न तो केंद्र सरकार और न ही संबंधित राज्य सरकार की ओर से नज़ाकत को कोई सरकारी सम्मान या इनाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग देश और इंसानियत के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, उन्हें सम्मानित करना सरकार की जिम्मेदारी है। ‘इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल’ विधायक सरवर आलम और गुलाम सरवर ने भी नज़ाकत के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि नज़ाकत का कार्य केवल बहादुरी नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल है। नेताओं ने कहा कि देश को ऐसे युवाओं पर गर्व होना चाहिए, जो मुश्किल हालात में भी लोगों की रक्षा के लिए आगे आते हैं। उन्होंने मांग की कि नज़ाकत को सरकारी स्तर पर सम्मानित किया जाए और उनके लिए विशेष पुरस्कार की घोषणा की जाए। ‘आतंकवाद के खिलाफ समाज की भी भूमिका’ AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं होती, बल्कि आम नागरिक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि नज़ाकत जैसे लोगों ने यह साबित किया है कि देश की एकता, भाईचारा और मानवता सबसे ऊपर है। सरकार को ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और लोगों में मानवता की भावना मजबूत हो। स्थानीय लोगों ने भी उठाई सम्मान की मांग मुलाकात के दौरान नेताओं ने नज़ाकत और उनके परिवार का हौसला बढ़ाया तथा उनके साहस की खुलकर सराहना की। इस दौरान स्थानीय लोगों ने भी नज़ाकत के समर्थन में आवाज उठाई और उन्हें सरकारी सम्मान दिलाने की मांग की। लोगों का कहना था कि आतंक के माहौल में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की मदद करना बड़ी बहादुरी का काम है। ऐसे लोगों को सम्मान मिलने से समाज में सकारात्मक प्रेरणा जाएगी।
पहलगाम हमले के हीरो नजाकत से मिले AIMIM नेता:बहादुरी के लिए सरकार से सम्मान-इनाम देने की उठाई मांग, बोले-आतंकवाद के खिलाफ समाज की भी भूमिका
किशनगंज में सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर 11 भारतीयों की जान बचाने वाले नजाकत से AIMIM नेताओं ने मुलाकात की। नेताओं ने नजाकत की बहादुरी और मानवता की भावना की सराहना करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से उन्हें सम्मानित करने और उचित इनाम देने की मांग की। मुलाकात के दौरान अख्तरुल ईमान, सरवर आलम, गुलाम सरवर और AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हुसैन मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि नजाकत ने कठिन परिस्थितियों में साहस और इंसानियत की मिसाल पेश की है, लेकिन अब तक उन्हें सरकार की ओर से कोई विशेष सम्मान या आर्थिक सहायता नहीं मिली है। ‘देश का हीरो माना जाना चाहिए’ AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने कहा कि पहलगाम हमले के दौरान जब लोग अपनी जान बचाने में लगे थे, उस समय नजाकत ने बहादुरी दिखाते हुए 11 भारतीयों की जान बचाई। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को देश का हीरो माना जाना चाहिए और सरकार को आगे बढ़कर उनका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक न तो केंद्र सरकार और न ही संबंधित राज्य सरकार की ओर से नज़ाकत को कोई सरकारी सम्मान या इनाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग देश और इंसानियत के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, उन्हें सम्मानित करना सरकार की जिम्मेदारी है। ‘इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल’ विधायक सरवर आलम और गुलाम सरवर ने भी नज़ाकत के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि नज़ाकत का कार्य केवल बहादुरी नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल है। नेताओं ने कहा कि देश को ऐसे युवाओं पर गर्व होना चाहिए, जो मुश्किल हालात में भी लोगों की रक्षा के लिए आगे आते हैं। उन्होंने मांग की कि नज़ाकत को सरकारी स्तर पर सम्मानित किया जाए और उनके लिए विशेष पुरस्कार की घोषणा की जाए। ‘आतंकवाद के खिलाफ समाज की भी भूमिका’ AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं होती, बल्कि आम नागरिक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि नज़ाकत जैसे लोगों ने यह साबित किया है कि देश की एकता, भाईचारा और मानवता सबसे ऊपर है। सरकार को ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और लोगों में मानवता की भावना मजबूत हो। स्थानीय लोगों ने भी उठाई सम्मान की मांग मुलाकात के दौरान नेताओं ने नज़ाकत और उनके परिवार का हौसला बढ़ाया तथा उनके साहस की खुलकर सराहना की। इस दौरान स्थानीय लोगों ने भी नज़ाकत के समर्थन में आवाज उठाई और उन्हें सरकारी सम्मान दिलाने की मांग की। लोगों का कहना था कि आतंक के माहौल में अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की मदद करना बड़ी बहादुरी का काम है। ऐसे लोगों को सम्मान मिलने से समाज में सकारात्मक प्रेरणा जाएगी।

