Thursday, April 30, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

पाकुड़ की ‘लखपति दीदियां’ बदल रहीं गांवों की तस्वीर:घर की चौखट से निकलकर बनीं बदलाव की मिसाल, सैकड़ों महिलाओं को दिया रोजगार


झारखंड के पाकुड़ जिले की महिलाएं आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल पेश कर रही हैं। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज गांव-गांव जाकर अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं। जन लोक कल्याण परिषद और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ी ‘दीदियां’ इस बदलाव की अगुआ बनी हैं। दीपाली देवी, सोनाली तुरी, सुनीता कोर, सुनीता कुमारी, जोशना तुरी, शांति तुरी, आशा प्रमाणिक और आरती कुमारी जैसी महिलाएं अब सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। इन महिलाओं ने न सिर्फ अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि समाज में महिलाओं की भूमिका को भी नई पहचान दी। गांव-गांव जाकर महिलाओं की समस्याएं समझीं इन ‘दीदियों’ ने महिलाओं के सशक्तिकरण की जानकारी मिलने के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ समाज में बदलाव लाने का संकल्प लिया। उन्होंने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर उन महिलाओं से संपर्क किया, जो अपने जीवन की परेशानियों से जूझ रही थीं। उनसे बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा और समाधान का रास्ता बताया। इसके साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बकरी, सूअर, गाय, मुर्गी और बत्तख पालन जैसे छोटे-छोटे व्यवसाय अपनाने की प्रेरणा दी। जिन महिलाओं की रुचि अन्य कार्यों में थी, उन्हें खेती, सिलाई और कढ़ाई जैसे कामों से जोड़ने की पहल की गई। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर बदली जिंदगी इन प्रयासों के तहत महिलाओं को JSLPS के स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया, जिससे उन्हें आर्थिक सहयोग और प्रशिक्षण मिल सका। आज इन समूहों से जुड़कर जिले की कई महिलाएं अपनी आजीविका खुद चला रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। अलग-अलग गांवों में महिलाओं को प्रेरित करने वाली ये महिलाएं अब ‘लखपति दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं। इनकी पहल का असर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले आदिम जनजाति समुदाय तक भी पहुंचा है, जहां की महिलाएं भी अब आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। आदिम जनजाति समुदाय की महिलाएं भी बनीं आत्मनिर्भर आदिम जनजाति समुदाय से आने वाली सोनी पहाड़ीन इसकी एक मिसाल हैं। उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग और JSLPS के सहयोग से जोबा आजीविका सखी मंडल से जुड़कर अपना व्यवसाय शुरू किया। बतख पालन और बकरी पालन जैसे कार्यों से उन्हें अच्छी आय होने लगी और उनका जीवन बदलने लगा। दीपाली देवी, सोनाली तुरी और आशा प्रमाणिक बताती हैं कि पहले ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था, लेकिन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद अब वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं और अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles