पाकुड़ विधानसभा से दो बार विधायक रहे बेनी प्रसाद गुप्ता का बुधवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका देहांत हृदय गति रुकने से हुआ। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वो तीन दिन पहले इलाज के लिए रांची गए थे और बुधवार सुबह ही अपने घर लौटे थे। दोपहर में उन्हें बेचैनी महसूस हुई, जिसके बाद परिजन उन्हें तुरंत सोनाजोड़ी सदर अस्पताल ले गए। अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई। उनके पार्थिव शरीर को सदर अस्पताल से उनके निजी आवास लाया गया। आवास पर भाजपा कार्यकर्ताओं, आम लोगों और विशिष्ट व्यक्तियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्होंने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने उनके निधन को पाकुड़ की राजनीति के एक युग का अंत बताया। बेनी प्रसाद गुप्ता का निजी आवास रेलवे फाटक के पास था। वे युवावस्था से ही समाज सेवा से जुड़े थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ काम किया और भारतीय जनसंघ के स्थापना काल से ही सक्रिय सदस्य रहे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गठन के बाद भी उन्होंने पार्टी में सक्रिय योगदान दिया। 1990 में पहली बार पाकुड़ विधानसभा से जीत दर्ज की थी झारखंड राज्य बनने से पहले, बिहार में भाजपा ने उन्हें 1990 में पाकुड़ विधानसभा से विधायक उम्मीदवार बनाया था। बेनी प्रसाद गुप्ता ने 1990 में पहली बार पाकुड़ विधानसभा से जीत दर्ज की। 1995 के चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया और वे लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए। हालांकि, तीसरी बार वे कांग्रेस के आलमगीर आलम से चुनाव हार गए। इसके बाद वे किसी भी चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए। इस दौरान, उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा का दामन भी थामा और लगभग एक वर्ष तक उसके साथ रहे। बाद में वे पुनः भाजपा में लौट आए। 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें फिर से विधायक का टिकट दिया था, लेकिन वे जीत नहीं सके। बेनी प्रसाद गुप्ता लगातार सामाजिक और राजनीतिक भूमिका में सक्रिय रहते थे।
पाकुड़ के पूर्व विधायक बेनी प्रसाद गुप्ता का निधन:81 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से हुआ देहांत, दो बार रह चुके थे MLA
पाकुड़ विधानसभा से दो बार विधायक रहे बेनी प्रसाद गुप्ता का बुधवार को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका देहांत हृदय गति रुकने से हुआ। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वो तीन दिन पहले इलाज के लिए रांची गए थे और बुधवार सुबह ही अपने घर लौटे थे। दोपहर में उन्हें बेचैनी महसूस हुई, जिसके बाद परिजन उन्हें तुरंत सोनाजोड़ी सदर अस्पताल ले गए। अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई। उनके पार्थिव शरीर को सदर अस्पताल से उनके निजी आवास लाया गया। आवास पर भाजपा कार्यकर्ताओं, आम लोगों और विशिष्ट व्यक्तियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्होंने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने उनके निधन को पाकुड़ की राजनीति के एक युग का अंत बताया। बेनी प्रसाद गुप्ता का निजी आवास रेलवे फाटक के पास था। वे युवावस्था से ही समाज सेवा से जुड़े थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ काम किया और भारतीय जनसंघ के स्थापना काल से ही सक्रिय सदस्य रहे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गठन के बाद भी उन्होंने पार्टी में सक्रिय योगदान दिया। 1990 में पहली बार पाकुड़ विधानसभा से जीत दर्ज की थी झारखंड राज्य बनने से पहले, बिहार में भाजपा ने उन्हें 1990 में पाकुड़ विधानसभा से विधायक उम्मीदवार बनाया था। बेनी प्रसाद गुप्ता ने 1990 में पहली बार पाकुड़ विधानसभा से जीत दर्ज की। 1995 के चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया और वे लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए। हालांकि, तीसरी बार वे कांग्रेस के आलमगीर आलम से चुनाव हार गए। इसके बाद वे किसी भी चुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए। इस दौरान, उन्होंने झारखंड विकास मोर्चा का दामन भी थामा और लगभग एक वर्ष तक उसके साथ रहे। बाद में वे पुनः भाजपा में लौट आए। 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें फिर से विधायक का टिकट दिया था, लेकिन वे जीत नहीं सके। बेनी प्रसाद गुप्ता लगातार सामाजिक और राजनीतिक भूमिका में सक्रिय रहते थे।

