Saturday, September 19, 2026

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'पापा डॉक्टर-इंजीनियर बनाने चाहते थे,उनके बिना सपनों को करेंगे पूरा':मोतिहारी में सरकारी टीचर की हत्या; 7 साल की बेटी को पिता के घर आने का इंतजार


“पापा पढ़ाई में स्ट्रिक्ट थे। उन्होंने बचपन से हमलोगों का गोल सेट कर रखा था। मुझे डॉक्टर बनना था, तो मैं NEET की तैयारी कर रही थी। उनका कहना था- सारे बच्चे अपने पैरों पर खड़ा रहें। अब पापा ही नहीं रहे तो हमलोग कैसे पढ़ेंगे? मेरी छोटी बहन आज भी पापा के फोन का और उनके घर आने का इंतजार कर रही है, अब उसे कैसे समझाऊं की पापा हमारे बीच नहीं रहे।” ये कहना है मृतक टीचर श्मशाद आलम (45) की बड़ी बेटी शगुफ्ता परवीन का, जो अपने पिता के हत्यारे को फांसी की सजा की मांग कर रही है। दरअसल, मोतिहारी में एक सरकारी टीचर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। परिवार वालों ने गांव के पूर्व मुखिया चमन पर हत्या का आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी के खिलाफ 30 हजार रुपए की घोषणा की है। जो भी आरोपी की जानकारी देगा, उसे ये पैसे मिलेंगे। इसके अलावा पुलिस ने एक आरोपी को शुक्रवार को अरेस्ट कर लिया है। मामला बंजरिया थाना क्षेत्र के सिसवा सहवाद टोला का है। बता दें कि श्मशाद के 8 बच्चे हैं, 5 बेटियां और 3 बेटे…किसी को वो डॉक्टर बनाना चाहते थे, तो किसी को IITIAN और किसी को IAS…सबसे छोटी बेटी मात्र 7 साल की है, क्लास 1 में पढ़ती है। उसे तो ये तक समझ नहीं आ रहा कि घर में क्या हो रहा है? पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… कौन से विवाद में सरकारी टीचर की हत्या कर दी गई? आरोपियों से कब से चल रहा था विवाद? कितनी जमीन को लेकर थी लड़ाई? अब घर के बच्चों का कौन बनेगा सहारा? अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… सुबह घर से निकले, बच्चों से कहा- पढ़ाई करना दैनिक भास्कर की टीम इन सारे सवालों का जवाब जानने के लिए पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय से 40KM दूर सिसवा सहवाद टोला पहुंची। इस दौरान पूरे गांव के लोग श्मशाद के घर के बाहर जमा थे। आस-पड़ोस के गांव वाले भी श्मशाद के घर पर मौजूद थे। सभी लोग हत्यारे की मौत की सजा की मांग कर रहे थे। सबसे पहले हमारी टीम ने श्मशाद की दूसरी बेटी साजिया परवीण से बात की। इस दौरान उसने कहा- मेरी कल स्कूल में छुट्टी थी। मैं घर पर बैठकर पढ़ाई कर रही थी। तभी पापा स्कूल जाने के लिए तैयार हो रहे थे। उन्होंने मुझसे कहा- अच्छे से पढ़ाई करना, एग्जाम में अच्छे नंबर लाओगी तो कुछ खरीद देंगे। जाते-जाते उन्होंने मुझसे कहा- शाम में मैं घर आऊंगा तो देखूंगा कि तुमने पूरे दिन क्या पढ़ा है। इतना बोलने के बाद वो घर से स्कूल जाने के लिए निकल गए। शाम 4.30 बजे अम्मी ने हमलोगों से कहा- पापा लापता हो गए हैं। मैं शिकायत लिखवाने थाने जा रही हूं, अगर पापा घर आते हैं तो मुझे फोन करना। इसके 5 घंटे बाद जानकारी मिली की पापा की हत्या कर दी गई है। मैं प्रशासन से यही मांग करूंगी कि जिस तरह से अपराधियों ने मेरे पापा की तड़पा-तड़पा कर हत्या की है, उसी तरह से अपराधियों को भी तड़पा कर मारा जाए। जहां तक बात रही, हम भाई-बहनों के पढ़ाई की तो कोई न कोई रास्ता अब्बू ने हमारे लिए छोड़ा होगा। मैं पढ़-लिखकर IITIAN बनूंगी। एक बेटा UPSC की तैयारी कर रहा, दूसरा IIT का सपना देख रहा वहीं, बड़ी बेटी शगुफ्ता परवीन कहती है पापा ने हमलोगों के लिए जो सपने देखे थे, उन्हें पूरा करना ही अब हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। श्मशाद के परिवार में पढ़ाई को लेकर माहौल हमेशा से गंभीर रहा है। बेटी NEET की तैयारी कर रही है। उससे बड़ा एक बेटा दिल्ली में रहकर UPSC की तैयारी कर रहा हैं। दूसरे बेटे को पिता IIT की तैयारी के लिए प्रेरित करते थे। मृतक के पिता मो. रफीस के मुताबिक, श्मशाद आलम का पूर्व प्रमुख चमन से मिट्टी कटाई को लेकर एक साल से विवाद चल रहा था। जब चमन प्रमुख था, तब उसने हमारे खेत से मिट्टी कटाई की थी। इसे लेकर श्मशाद आलम ने यहां के अधिकारियों और पुलिस को इसकी शिकायत की थी। उसके बाद से ही चमन श्मशाद आलम से नाराज रहता था। मेरे बेटे को लगातार धमकी दे रहा था। वो लोग बेटे के स्कूल में घुसकर धमकी दे रहे थे कि अगर तुम कहीं भी दिखे तो तुम्हें गोली मार देंगे। आज उनलोगों ने मेरे बेटे की हत्या कर दी। इस घटना की जानकारी आस-पास के लोगों ने पुलिस को दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल श्मशाद को इलाज के लिए पहले बंजरिया सीएचसी लेकर पहुंची, वहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने सदर अस्पताल रेफर कर दिया। जिसके बाद पुलिस जब घायल को सदर अस्पताल लेकर पहुंची तो वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद हमने श्मशाद के पिता से बात करने पहुंचे। बेटी बोली- 2016 से मिल रही थी धमकी बड़ी बेटी के मुताबिक, 2016 से ही पिता श्मशाद को जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। एक बार तो आरोपियों ने पिस्तौल निकालकर भी पापा के सिर पर सटाकर जान से मारने की धमकी देकर धमकाया था। उस समय आरोपी अपने भाई मुन्ना मुखिया का पिस्टल लेकर आया था। जब आरोपियों ने धमकी दी थी, तब मैं वहीं पर सहमे हुए मौजूद थी। इस घटना के बाद से मैं बहुत डर गई थी। हालांकि, दादा जी के आने के बाद किसी तरह से मामला सुलझा और आरोपी पापा को बिना किसी नुकसान किए वहां से चले गए। उस समय तो आरोपियों ने मेरे पापा को छोड़ दिया, लेकिन कल वो लोग अकेला पाकर मेरे पापा की हत्या कर दिए। ‘बेटा घर नहीं पहुंचा तो शाम 4:30 बजे थाने पहुंचे’ मृतक के पिता मो.रफीस ने आगे बताया, जब श्मशाद शाम 4.30 बजे तक घर नहीं लौटा तो हमलोगों ने उसके नंबर पर फोन किया था। पहले तो फोन लगा, लेकिन किसी ने उठाया नहीं। आधे घंटे बाद फोन लगना भी बंद हो गया। 5 बजे तक वो घर नहीं पहुंचा तो हमलोगों ने बंजरिया थाने में पहुंचकर घटना की जानकारी दी। मैंने पुलिस को बताया कि मेरा बेटा नहीं मिल रहा है। वो सुबह स्कूल गया था, घर लौटते समय लापता हो गया है। आपलोग उसकी तलाश कीजिए। हालांकि, पुलिस ने मेरी बात को गंभीरता से नहीं लिया। उनलोगों ने मेरे बेटे की तलाश नहीं की। थानाध्यक्ष ने मुझसे कहा कि अगर आपके बेटे के लापता होने की बात झूठी निकली तो मैं आपके खिलाफ कार्रवाई करूंगा। मैं बार-बार थानाध्यक्ष को बेटे की तलाश के लिए गुहार लगा रहा था, लेकिन उनलोगों ने कोई कार्रवाई नहीं की। अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो शायद मेरा बेटा आज जिंदा होता। ‘कुछ घंटे बाद थाना से फोन आया, सदर अस्पताल में है श्मशाद’ मो.रफीस के मुताबिक, थाने में शिकायत करने के करीब 3-4 घंटे बाद बंजरिया थाना से मुझे फोन आया। उन्होंने कहा, श्मशाद सदर अस्पताल में है। उन्होंने हमें मौत की सूचना नहीं दी। जब तक हमलोग आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचे, वहां देखा श्मशाद का शव पड़ा है। इस दौरान वहां पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। मृतक के पिता ने कहा कि मिट्टी कटाई के विवाद को लेकर भी हमने पहले भी अधिकारियों के यहां शिकायत की थी। इसके बावजूद विवाद का समाधान नहीं हुआ और धमकियां मिलती रहीं। पुराने विवाद के कारण ही श्मशाद को निशाना बनाया गया है। मेरा इकलौता बेटा था, मेरी उम्र 85 वर्ष है, बीमार रहते है, उसी के कमाए पैसे से ही घर चलता था, अब हमारा घर कौन चलाएगा? जिस पंचायत सरकार भवन के पास से उठाने का आरोप, वहां पहुंची FSL टीम इसके बाद हमारी टीम श्मशाद के घर से 5KM दूर जिला पंचायत भवन पहुंची। ग्रामीणों का आरोप है, इसी जगह पर श्मशाद को किडनैप कर लाया गया। उसके साथ मारपीट की गई। उसे टॉर्चर किया गया। इसके बाद अधमरे हालात में कार की डिग्गी में बंद कर वहां से 3km दूर ले जाकर जंगल में फेंक दिया गया। इसी बीच हमारी मुलाकात श्मशाद के वकील से हुई। उन्होंने कहा- कोर्ट से लौटने के क्रम में शाम करीब 4.30 बजे मुझे घटना की जानकारी मिली। बताया गया कि श्मशाद सर स्कूल से अपनी ड्यूटी पूरी करके लौट रहे थे। पंचायत सरकार भवन, सिसुआ पूर्वी के पास चमन और उसके साथियों ने उन्हें कथित तौर पर अगवा कर बंधक बना लिया और उनके साथ मारपीट की। मारपीट के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने शव को गाड़ी की डिग्गी में रखकर ले जाकर जंगल में फेंक दिया। फिलहाल, पुलिस अपना काम कर रही है। जटवा से एक संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी की भी जानकारी मिली है। उससे पूछताछ के बाद पुलिस को कुछ सुराग मिले हैं और आगे की कार्रवाई की जा रही है। मेरी जानकारी के अनुसार पुलिस की ओर से इस मामले में कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही है। डीएसपी, इंस्पेक्टर समेत पुलिस के अधिकारी मामले की जांच में जुटे हुए हैं। इस दुख की घड़ी में हम मृतक के परिजनों के साथ खड़े हैं। पूरे इलाके के नौजवान इस घटना से दुखी हैं। हम इस जुल्म का विरोध करते हैं और आगे भी करते रहेंगे। हमारी मांग है कि घटना में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। पुलिस ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की बात कही वारदात के बाद पुलिस ने मुख्य अभियुक्त शब्बीर आलम को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। पुलिस ने एक गाड़ी भी जब्त की है, जिस पर मुखिया का प्लेट लगा होने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, शव शब्बीर आलम की जमीन से बरामद हुआ था। वहीं, श्मशाद के वकील ने बताया कि जटवा से एक संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी की जानकारी भी मिली है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। डीएसपी, इंस्पेक्टर समेत पुलिस के अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं। पुलिस की ओर से फिलहाल जांच में लापरवाही नहीं बरती जा रही है। जनाजे में उमड़ा हुजूम, हर आंख में गुस्सा और आंसू शुक्रवार शाम श्मशाद का जनाजा निकला तो सिसवा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। एक हजार से अधिक लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। जिस गांव में श्मशाद बच्चों को पढ़ाई और आगे बढ़ने की सीख देते थे, उसी गांव की गलियों से उनकी अंतिम यात्रा निकली। भीड़ में गुस्सा भी था और गम भी। लोग परिवार के साथ खड़े थे। हर कोई घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा था। बता दें कि श्मशाद की मौत की वजह से उनका स्कूल एक दिन के लिए बंद किया गया था।

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