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बेतिया में पुलिस हिरासत में फाइनेंस कर्मी दिलशाद अंसारी की मौत का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मामले में वर्ष 2025 में बानुछापर थाना पुलिस की ओर से जारी निगरानी संबंधी विभागीय पत्र और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर पुलिस के पुराने पत्र में दिलशाद को सक्रिय अपराधी बताते हुए उस पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, वहीं दूसरी ओर वायरल वीडियो में उसे कथित तौर पर एक आर्केस्ट्रा कार्यक्रम के दौरान पिस्टल के साथ देखा जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें दिखाई दे रहे हथियार की वास्तविकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुराने पुलिस पत्र में लूटपाट का आरोप जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में बानुछापर थाना पुलिस की ओर से दिलशाद अंसारी पर निगरानी रखने के संबंध में एक विभागीय पत्र जारी किया गया था। पत्र में उसे सक्रिय अपराधी बताते हुए आरोप लगाया गया था कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर राहगीरों से लूटपाट करता है। इसी आधार पर उस पर निगरानी रखने की आवश्यकता जताई गई थी। विभागीय पत्र में दिलशाद के खिलाफ वर्ष 2020 के बानुछापर थाना कांड संख्या 756, आर्म्स एक्ट तथा गोपालपुर थाना कांड संख्या 92 का भी उल्लेख किया गया था। इस पत्र के सामने आने के बाद अब दिलशाद के आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस की पूर्व कार्रवाई को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, विभागीय पत्र में दर्ज आरोप अपने आप में किसी अपराध में दोषसिद्धि का प्रमाण नहीं हैं। हिरासत में मौत के बाद छह पुलिसकर्मी निलंबित गौरतलब है कि 12 अक्टूबर 2026 को एनडीपीएस से जुड़े सहोदरा थाना कांड संख्या 65/2025 में गिरफ्तारी के बाद दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। मामले में सहोदरा थानाध्यक्ष समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। दिलशाद की मौत के बाद पुलिस हिरासत में उसके साथ हुई कार्रवाई और मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठने लगे थे। घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी चर्चा में रही है। वायरल वीडियो में पिस्टल के साथ दिखने का दावा इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हो रहा है, जिसमें दिलशाद अंसारी के होने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में कथित तौर पर एक आर्केस्ट्रा कार्यक्रम के दौरान वह अपनी जींस की पिछली जेब में पिस्टल रखे दिखाई देता है। इसके बाद वह कथित रूप से पिस्टल एक नर्तकी को देता है और कुछ देर बाद वापस लेकर अपनी जेब में रख लेता है। वीडियो सामने आने के बाद इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, वीडियो कब और कहां बनाया गया, इसमें दिखाई दे रहा व्यक्ति वास्तव में दिलशाद अंसारी ही है या नहीं और हथियार असली है अथवा नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। अब जांच के निष्कर्ष पर टिकी नजरें एक तरफ दिलशाद से संबंधित पुराने पुलिस रिकॉर्ड और निगरानी पत्र चर्चा में हैं, तो दूसरी तरफ हिरासत में उसकी मौत का मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, विभागीय पत्र में दर्ज आरोपों और हिरासत में मौत की परिस्थितियों की अलग-अलग निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। फिलहाल, इन सभी पहलुओं पर आधिकारिक रूप से क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। वायरल वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में किए जा रहे दावों को भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
पुराने निगरानी पत्र और वायरल वीडियो से उठे नए सवाल:दिलशाद अंसारी की मौत का मामला, पुलिस ने 2025 में बताया था सक्रिय अपराधी
