जमशेदपुर से निसार की रिपोर्ट
Sunil Chhetri, जमशेदपुर: भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान और स्टार स्ट्राइकर सुनील छेत्री ने कहा है कि पहले हमें एशिया में अपनी रैंकिंग सुधारनी होगी, तभी फीफा के टॉप टूर्नामेंट में खेल सकते हैं. इसके लिए हमें एशिया की टॉप टीमों के साथ लगातार खेलते रहना होगा. सुनील छेत्री गुरुवार को बेंगलुरु एफसी के साथ जमशेदपुर पहुंचे और शुक्रवार को फ्लैट लेट में टीम के साथ अभ्यास किया. बेंगलुरु का शनिवार को जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (जेएफसी) के साथ मुकाबला है. पेश है प्रभात खबर के साथ सुनील छेत्री की बातचीत का मुख्य अंश
सवाल . भारतीय फुटबॉल टीम कब फीफा के टॉप टूर्नामेंट में खेलती नजर आयेगी ?
जवाब : भारतीय फुटबॉल टीम को सबसे पहले एशिया में अपनी रैकिंग बेहतर करनी होगी. अभी हम एशिया में 24वें स्थान पर हैं. सबसे पहले हमें एशिया में 10-12 के बीच में रैकिंग हासिल करनी होगी. इससे हमें एशिया की टॉप टीमें ऑस्ट्रेलिया, ईरान, जापान, साउथ कोरिया, सऊदी अरब से भिड़ने का मौका मिलेगा, जो फीफा विश्वकप में खेलती है. इनके विरुद्ध खेलने के बाद ही हमें अपनी ताकत का सही अंदाजा लग पायेगा कि हम फीफा के टॉप टूर्नामेंट खेल सकते हैं या नहीं. हम तीन वर्ष पहले ईरान से व दो वर्ष पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले थे. लेकिन, हमें निरंतर एशिया की बड़ी टीमों के साथ खेलना होगा.
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सवाल : किस खिलाड़ी में आप अपना अक्स देखते हैं?
जवाब : मेरे ख्याल से इस समय भारतीय घरेलू फुटबॉल में कई प्रतिभावान खिलाड़ी हैं. जो नेशनल और इंटरनेशनल मंच पर अच्छा कर रहे हैं. किसी एक खिलाड़ी का नाम लेना सही नहीं होगा. भारतीय फुटबॉल में कई युवा खिलाड़ी काफी प्रतिभाशाली हैं और भारतीय फुटबॉल इनके हाथों में पूरी तरह से सुरक्षित है. आगे बढ़ रहा है. बस हमारे युवा ब्रिगेड को सिर झुकाकर कड़ी ट्रेनिंग व इंस्ट्रक्शन फॉलो करने की जरूरत है, जिससे वे लंबे समय तक फुटबॉल के मैदान पर अपना योगदान दे सकें.
सवाल : भारतीय महिला फुटबॉल टीम के हाल के प्रदर्शन पर क्या राय है ?
जवाब : मेरे ख्याल से भारतीय महिला फुटबॉल अलग-अलग एज ग्रुप में काफी बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है. मुझे लगता है कि महिला टीम भारतीय पुरुष टीम से पहले फीफा के बड़े टूर्नामेंट में खेलते नजर आ सकती है. महिला टीम को पुरुष टीम की तरह हर सुविधा समान रूप से मिले. दोनों टीमों के साथ एक ट्रीटमेंट होना चाहिए.
सवाल : शॉर्ट फॉर्मेट में आइएसएल का होना सही है?
जवाब : आइएसएल का प्रारूप पहले की तरह ही होना चाहिए. शॉर्ट फॉर्मेट में और कम समय में आइएसएल के मैच होने से ट्रैवलिंग अधिक होती है. होम व अवे फॉर्मेट में ही मुकाबले होने चाहिए. सभी फिक्सचर व वेन्यू पहले से सुनिश्चित हो. आइएसएल के आने से कई अच्छे बदलाव हुए हैं. पहले जब हम आइलीग खेलते थे. तो दोपहर में मैच होता था. लेकिन अब शाम को होता है. प्रशंसक आइएसएल को टीवी पर भी देखते हैं. जो फुटबॉल के लिए सकारात्मक है.
सवाल : रेलिगेशन और वीएआर के बारे में आपकी क्या राय है ?
जवाब : दोनों ही आधुनिक फुटबॉल लीग की मांग है. रेलिगेशन सिस्टम (जिस टीम का नंबर अंक तालिका में सबसे कम होगा, वह नीचे डिवीजन में चली जाती है) को तो एआइएफएफ ने इस वर्ष से आइएसएल में लागू किया है. इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ गयी है. हर टीम व खिलाड़ी हर मैच में जी-जान लगाकर खेलते हैं. कोई हारना नहीं चाहता. वहीं, वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) को अब पूरी दुनिया अपना रही है. भारत में भी इसे लागू होना चाहिए. इससे रेफरी के ऊपर से प्रेशर कम होगा. किसी फैसले को लेकर कोई विवाद नहीं होगा.
सवाल : भारतीय फुटबॉल के ग्रासरुट को कैसे मजबूत किया जाये?
जवाब : भारत में हाल के दिनों में बेशक बहुत सी एकेडमी खुली है. लेकिन, अभी भी हमारी आबादी के हिसाब से कम है. भारतीय फुटबॉल के ग्रासरुट को मजबूत करने के लिए सही समय में सही खिलाड़ी का चयन करने और उन्नत ट्रेनिंग देने की जरूरत है. वहीं, एज फ्रॉड की रोकथाम पर भी काम करने की जरूरत है. जिस उम्र का जो खिलाड़ी है, वह उसी ग्रुप में खेले. यह नहीं कि ज्यादा उम्र के खिलाड़ी कम उम्र करके जूनियर स्तर पर खेले. इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की जरूरत है.
सवाल : JFC और जमशेदपुर के प्रशंसकों के बारे में क्या कहेंगे?
जवाब : जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (जेएफसी) एक मजबूत प्रतिद्वंदी है. खासकर जब वह घर में खेलता है. बीते आठ वर्षों में देखा है कि जेएफसी को घर में हराना काफी मुश्किल है. इसलिए हमें कल के मैच में सतर्क रहने की जरूरत है. जमशेदपुर के प्रशंसक लाजवाब हैं. इसका सबसे बड़ा कारण जमशेदपुर में टाटा फुटबॉल एकेडमी का होना है. यहां, लोग लंबे समय से फुटबॉल देख और समझ रहे हैं. इसलिए उनको स्टेडियम तक लाने में ज्यादा कन्वेंस करने की जरूरत नहीं होती.


