गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव में एक कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए हथियार प्रदर्शन के वीडियो ने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह सहित 9 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। यह मामला 3 मई का है, जब मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव में स्थानीय निवासी गुड्डू राय उर्फ अमरेश राय के घर पर उपनयन संस्कार (जनेऊ) का आयोजन किया गया था। इस समारोह में मोकामा के विधायक अनंत सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। FSL और बैलिस्टिक जांच कराने का निर्णय लिया कार्यक्रम के दौरान के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इन वीडियो में हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन करते हुए और नर्तकी के साथ डांस करते हुए लोग दिख रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद गोपालगंज पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी के निर्देश पर विधायक अनंत सिंह और 9 अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। ”फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा” पुलिस ने अब वायरल वीडियो में दिख रहे हथियारों की एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) और बैलिस्टिक जांच कराने का निर्णय लिया है। इस जांच से यह स्पष्ट होगा कि हथियार असली थे या केवल प्रदर्शन के लिए। साथ ही, यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या वे प्रतिबंधित श्रेणी के हैं। जिला पुलिस कप्तान ने कहा है कि फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलों को और बढ़ा सकता अनंत सिंह पहले भी कई आपराधिक मामलों और हथियार बरामदगी के केसों का सामना कर चुके हैं। गोपालगंज का यह नया मामला उनकी कानूनी मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कार्यक्रम में मौजूद सुरक्षाकर्मी सरकारी थे या निजी, और क्या उन हथियारों के लाइसेंस वैध थे। फिलहाल, पुलिस वीडियो के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। गोपालगंज पुलिस का यह कड़ा रुख जिले में कानून के राज का संदेश देने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है। बता दें कि एफएसएल और बैलिस्टिक जांच अपराधों की गुत्थी सुलझाने के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। संदिग्ध हथियार को भेजा जाता है बैलिस्टिक लैब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी एक ऐसी प्रयोगशाला होती है जहां अपराध स्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जैविक, रासायनिक या भौतिक सबूतों के आधार पर अपराधी की पहचान करना और अदालत में वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करना है। जबकि बैलिस्टिक जांच फॉरेंसिक विज्ञान की वह शाखा है जो पूरी तरह से हथियारों और गोलियों पर केंद्रित होती है। जब किसी अपराध में बंदूक का इस्तेमाल होता है, तो बैलिस्टिक विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि गोली किस हथियार से चली है। बैलिस्टिक जांच में हथियार की पहचान की जा सकती और यह पता लगाया जा सकता है किन संदिग्ध व्यक्ति के हाथों पर बारूद के अवशेष मौजूद हैं। FSL एक बड़ा विभाग है, और बैलिस्टिक उसी का एक हिस्सा है जो विशेष रूप से गोलीबारी से जुड़े मामलों को देखता है। जब पुलिस को कोई संदिग्ध हथियार मिलता है, तो उसे बैलिस्टिक लैब भेजा जाता है, जबकि खून या अन्य नमूनों को FSL के संबंधित विभागों में भेजा जाता है। मीरगंज थाना में सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज इस संदर्भ में एसपी विनय तिवारी ने बताया कि सेमराव में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम का वीडियो प्रकाश में आया था, जिसमें उपस्थित व्यक्तियों द्वारा लाइसेंसी या अवैध हथियारों को बिना किसी ‘कैरी-कवर’ के खुलेआम सार्वजनिक स्थान पर ले जाया गया और हवा में लहराकर शक्ति प्रदर्शन किया गया। यह कृत्य आयुध नियमों का सीधा और स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके आलोक में मीरगंज थाना में सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। उक्त वायरल वीडियो में प्रदर्शित एक प्रतिबंधित हथियार होने का भी गहरा संदेह है। पुलिस द्वारा इस संदिग्ध हथियार और वायरल वीडियो की सत्यता की वैज्ञानिक और बैलिस्टिक जांच के लिए इसे ‘विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL)’ भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में और भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस ने हथियारों की फोरेंसिक बैलिस्टिक जांच का लिया फैसला:गोपालगंज में वायरल हथियार केस में अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ीं
गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव में एक कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए हथियार प्रदर्शन के वीडियो ने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह सहित 9 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। यह मामला 3 मई का है, जब मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव में स्थानीय निवासी गुड्डू राय उर्फ अमरेश राय के घर पर उपनयन संस्कार (जनेऊ) का आयोजन किया गया था। इस समारोह में मोकामा के विधायक अनंत सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। FSL और बैलिस्टिक जांच कराने का निर्णय लिया कार्यक्रम के दौरान के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इन वीडियो में हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन करते हुए और नर्तकी के साथ डांस करते हुए लोग दिख रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद गोपालगंज पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी के निर्देश पर विधायक अनंत सिंह और 9 अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। ”फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा” पुलिस ने अब वायरल वीडियो में दिख रहे हथियारों की एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) और बैलिस्टिक जांच कराने का निर्णय लिया है। इस जांच से यह स्पष्ट होगा कि हथियार असली थे या केवल प्रदर्शन के लिए। साथ ही, यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या वे प्रतिबंधित श्रेणी के हैं। जिला पुलिस कप्तान ने कहा है कि फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलों को और बढ़ा सकता अनंत सिंह पहले भी कई आपराधिक मामलों और हथियार बरामदगी के केसों का सामना कर चुके हैं। गोपालगंज का यह नया मामला उनकी कानूनी मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कार्यक्रम में मौजूद सुरक्षाकर्मी सरकारी थे या निजी, और क्या उन हथियारों के लाइसेंस वैध थे। फिलहाल, पुलिस वीडियो के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। गोपालगंज पुलिस का यह कड़ा रुख जिले में कानून के राज का संदेश देने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है। बता दें कि एफएसएल और बैलिस्टिक जांच अपराधों की गुत्थी सुलझाने के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। संदिग्ध हथियार को भेजा जाता है बैलिस्टिक लैब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी एक ऐसी प्रयोगशाला होती है जहां अपराध स्थल से मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जैविक, रासायनिक या भौतिक सबूतों के आधार पर अपराधी की पहचान करना और अदालत में वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करना है। जबकि बैलिस्टिक जांच फॉरेंसिक विज्ञान की वह शाखा है जो पूरी तरह से हथियारों और गोलियों पर केंद्रित होती है। जब किसी अपराध में बंदूक का इस्तेमाल होता है, तो बैलिस्टिक विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि गोली किस हथियार से चली है। बैलिस्टिक जांच में हथियार की पहचान की जा सकती और यह पता लगाया जा सकता है किन संदिग्ध व्यक्ति के हाथों पर बारूद के अवशेष मौजूद हैं। FSL एक बड़ा विभाग है, और बैलिस्टिक उसी का एक हिस्सा है जो विशेष रूप से गोलीबारी से जुड़े मामलों को देखता है। जब पुलिस को कोई संदिग्ध हथियार मिलता है, तो उसे बैलिस्टिक लैब भेजा जाता है, जबकि खून या अन्य नमूनों को FSL के संबंधित विभागों में भेजा जाता है। मीरगंज थाना में सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज इस संदर्भ में एसपी विनय तिवारी ने बताया कि सेमराव में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम का वीडियो प्रकाश में आया था, जिसमें उपस्थित व्यक्तियों द्वारा लाइसेंसी या अवैध हथियारों को बिना किसी ‘कैरी-कवर’ के खुलेआम सार्वजनिक स्थान पर ले जाया गया और हवा में लहराकर शक्ति प्रदर्शन किया गया। यह कृत्य आयुध नियमों का सीधा और स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके आलोक में मीरगंज थाना में सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। उक्त वायरल वीडियो में प्रदर्शित एक प्रतिबंधित हथियार होने का भी गहरा संदेह है। पुलिस द्वारा इस संदिग्ध हथियार और वायरल वीडियो की सत्यता की वैज्ञानिक और बैलिस्टिक जांच के लिए इसे ‘विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL)’ भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में और भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


