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पूर्णिया में बैंड-बाजा के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा विर्सजित:पूरे रास्ते 'जय माता दी' के लगते रहे जयकारे, विदाई से पहले हुई महाआरती

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पूर्णिया में 9 दिन पूजा-अर्चना के बाद शनिवार को मां दुर्गा को विदाई दी गई। मां के अंतिम दर्शन के लिए भट्टा बाजार स्थित रामकृष्ण मठ और गुलाबबाग के सुनौली चौक दुर्गा स्थान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गाजे-बाजे के साथ मां को भव्य विदाई दी गई। विसर्जन यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। वहीं, चैत्र नवरात्र के दशमी पर रामकृष्ण मठ में सुबह से विसर्जन की तैयारी शुरू हो गई थी। विसर्जन से पहले बंगाली समाज की महिलाओं ने सिंदूर खेला और मां दुर्गा को भोग लगाया और पूजा-अर्चना की। विदाई से पहले मां दुर्गा की महाआरती हुई। ढाक और शंख की गूंज के बीच देवी दुर्गा की वंदना का नजारा अद्भुत था। जैसे ही मां की प्रतिमा के विसर्जन की तैयारी शुरू हुई, माहौल भावुक हो गया। जय माता दी, अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों से आसपास का इलाका गूंज उठा।
बंगाली रीति-रिवाज से मां दुर्गा की पूजा हुई सैकड़ों श्रद्धालु विसर्जन जुलूस में शामिल हुए। महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे मां के जयकारों से पूरे रास्ते को भक्तिमय बना रहे थे। करीब एक सदी पुरानी परंपरा वाले इस मठ में हर साल की तरह इस बार भी बंगाली रीति-रिवाज से मां दुर्गा की पूजा की गई। स्वामी जितेंद्रानंद ने बताया कि 1927 से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और भव्यता के साथ निभाई जा रही है। इस साल भी वासंती दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा स्थापित की गई थी, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। गुलाबबाग के सुनौली चौक दुर्गा स्थान पर भी आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। मां की विदाई के समय यहां का दृश्य बेहद मार्मिक था। महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालु मां के चरणों में फूल अर्पित कर भावुक हो उठे।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे विसर्जन यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए निर्धारित घाटों तक पहुंचा। इस दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। पुलिस बल के साथ-साथ दंडाधिकारी भी तैनात रहे और पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।

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