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जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर मोतिहारी पहुंचे। यहां उन्होंने आरक्षण संशोधन, देश की अर्थव्यवस्था और बिहार में चीनी मिलों के मुद्दे पर राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण के अधिकार में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए और इसे वैसे ही बनाए रखना चाहिए। आरक्षण से जुड़े सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि संविधान ने समाज के गरीब वर्गों को जो अधिकार दिए हैं, उन्हें सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरक्षण व्यवस्था में किसी तरह के संशोधन की जरूरत नहीं है और इसे अभी जैसा है, वैसा ही जारी रहना चाहिए। बेरोजगारी-महंगाई से परेशान लोग देश की जीडीपी बढ़ने की दर को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत और विदेशों के कई अर्थशास्त्री जीडीपी पर अलग-अलग राय रखते हैं। उनका कहना था कि सरकार आर्थिक विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन असलियत यह है कि लोग बेरोजगारी और महंगाई से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ आंकड़े दिखाकर विकास बताने से आम लोगों की समस्याएं दूर नहीं होंगी। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 10 चीनी मिलें खोलने की पहल पर प्रशांत किशोर ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि अब सरकार विकास, चीनी मिल, शिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह जन सुराज के बढ़ते असर और दबाव का नतीजा है कि सरकार इन विषयों पर बात करने को मजबूर हुई है। नई योजनाओं पर आगे बढ़ने से पहले होनी चाहिए जांच हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जिन चीनी मिलों की जमीनें पहले थीं, उन्हें भाजपा के विधायक, सांसद, मंत्री और पार्टी से जुड़े लोगों ने बिकवाई और खरीदी। उन्होंने कहा कि नई चीनी मिलों की घोषणा करने से पहले सरकार को पुरानी चीनी मिलों की जमीनों की बिक्री और खरीद की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। इसके बाद ही नई योजनाओं पर आगे बढ़ना चाहिए। प्रशांत किशोर के इन बयानों से प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ने की उम्मीद है, खासकर आरक्षण और औद्योगिक विकास जैसे मुद्दों पर।
प्रशांत किशोर ने आरक्षण, चीनी मिलों पर सरकार को घेरा:मोतिहारी में बोले- नई चीनी मिलों से पहले पुरानी जमीनों की निष्पक्ष जांच हो
