Wednesday, April 22, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रंगों से ही होली खेलें : डॉ. सरोज


राग, रंग, उल्लास का त्योहार होली है। बच्चों से लेकर बड़े तक सभी इस रंगीन त्योहार को पसंद करते हैं। एक-दूसरे के साथ रंग-गुलाल खेल कर और खा-पीकर इसे मनाते हैं। पहले के समय में होली पारंपरिक तरीके से मनायी जाती थी, जिसमें प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रंगों का प्रयोग होता था। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. सरोज राय ने कहा कि आज मिलावटी व सिंथेटिक रंगों का प्रचलन अधिक बढ़ा है। ऐसे रंग हमारी त्वचा, आंखों, नाखून, बाल एवं आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। इन रासायनिक रंगों से त्वचा पर खुजली, दाने, एलर्जी, एग्जिमा, ब्रेकआउट आदि होने का खतरा रहता है। इस लिए कुछ सावधानियां बरत कर हम होली का त्योहार मस्ती और उल्लास के साथ मना सकते हैं। ये बरतनी होंगी सावधानियां सलाह…सिंथेटिक रंग हमारी त्वचा, आंखों, नाखून और बाल को पहुंचाते हैं नुकसान {हमेशा प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रंगों से ही होली खेलें {गीले रंगों की जगह सूखे रंगों का प्रयोग करें {होली खेलने से पहले शरीर की खुली त्वचा जैसे कि चेहरे, गर्दन, हाथ-पांव के पीछे मॉस्चराइजर या ऑलिव ऑयल को अच्छे से लगा कर उसके ऊपर सनस्क्रीन लगाएं। {होंठों पर सनस्क्रीन युक्त लिप बाम तथा नाखून पर नेल पॉलिश लगाएं {बालों को धोकर सुखाकर तेल लगाएं व अच्छी तरह से बांध लें {हमेशा पूरे गहरे रंग के सूती कपड़े पहने {आभूषण पहन कर होली ना खेलें {आंखों को बचाने के लिए सनग्लास लगाएं {अधिक देर तक रंगों को शरीर पर न रहने दें {अधिक देर तक धूप में रंग न खेलें {पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। {अस्थमा या एक्जिमा के मरीज दूर ही रहें {रंगों को छुड़ाने में हड़बड़ी न करें, अधिक साबुन, सोडा, केरोसिन का प्रयोग ना करें, दही-बेसन, एलोवेरा की मदद से रंगों को छुड़ाएं {समस्या हो तो चर्म रोग विशेषज्ञ से मिलें

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles