झारखंड के सभी स्कूलों में अब शुगर बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को चीनी के अत्यधिक सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान की जानकारी दी जाएगी। साथ ही बच्चों को संतुलित खानपान अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जाएगा। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अनुरोध पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस दिशा में पहल की है। विभाग के अवर सचिव अरशद जमाल ने इस संबंध में पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। एनसीपीसीआर के सदस्य सचिव डॉ. संजीव शर्मा ने सात सितंबर 2026 को झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर राज्य के स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाने के लिए सर्कुलर जारी करने का अनुरोध किया था। आयोग के अनुसार, प्रधानमंत्री के फिट इंडिया मूवमेंट से प्रेरित होकर शिक्षा बोर्डों तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों को इस संबंध में सलाह दी गई है। प्रधानमंत्री ने 25 मई 2025 को मन की बात के 122वें एपिसोड में भी इस पहल की सराहना की थी। एनसीपीसीआर के अनुसार, देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों के अलावा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) की ओर से भी इस संबंध में सर्कुलर जारी किया जा चुका है। अब झारखंड में भी इसको लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य के प्रति छात्र किए जाएंगे जागरूक शुगर बोर्ड स्कूल परिसर में लगाया जाने वाला एक सूचना बोर्ड है। इसका उद्देश्य बच्चों को चीनी के अत्यधिक सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी देना है। इसके जरिए विद्यार्थियों को अधिक चीनी खाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया जाएगा और संतुलित आहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्कूलों में इस तरह की जानकारी उपलब्ध होने से बच्चों में बचपन से ही खानपान को लेकर बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। स्कूली शिक्षा विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किया है।

