Sunday, October 25, 2026
⚡

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

Investigation : छोटे शहर बन रहे बिहार के बड़े कर्मशियल कैपिटल, 90 प्रतिशत MSME सेक्टर हुए पटना से बाहर

Investigation : पटना. बिहार की आर्थिक संरचना में बड़ा बदलाव सामने आया है. राज्य में छोटे और मझोले कारोबार अब केवल राजधानी पटना तक सीमित न रहकर अन्य जिलों में भी तेजी से पैर पसार रहे हैं. राज्य के गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के 91.77 प्रतिशत प्रतिष्ठान पटना के बाहर अन्य जिलों में स्थित हैं, जबकि राजधानी पटना की हिस्सेदारी इसमें महज 8.23 प्रतिशत है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा सितंबर में जारी रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार जारी इन जिलेवार आंकड़ों से पता चला है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेजी से मजबूत हो रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के तहत कुल 43.19 लाख से अधिक प्रतिष्ठान संचालित हैं. इसमें कुल 58.51 लाख से ज्यादा लोग कार्यरत हैं.

NSO रिपोर्ट में खुलासा

  • पटना नहीं, यह जिला बन रहा बिहार का नया आर्थिक केंद्र
  • बिहार में छोटे कारोबारियों का 91% नेटवर्क पटना से बाहर
  • 43 लाख छोटे कारोबारों से बदला बिहार का नक्शा
  • शहर के साथ अब ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार की बहार

मुख्य तथ्य

  • बिहार में फूड सेक्टर में कामगारों में 52% महिलाएं हैं (राष्ट्रीय औसत 41%).
  • ई-श्रम पोर्टल पर बिहार के 1.90 लाख फूड सेक्टर कामगार पंजीकृत हैं (देश में यूपी 3.82 लाख के बाद दूसरे स्थान पर).
  • कुल 4.36 लाख से अधिक लोग स्ट्रीट फूड, ढाबा व ठेला-खोमचा कारोबार से जुड़े हैं.

कमर्शियल पावरहाउस बने मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर

पटना के ठीक बाद उत्तर बिहार में मुजफ्फरपुर, दक्षिण बिहार में गया, अंग क्षेत्र में भागलपुर और सारण प्रमंडल में छपरा राज्य के सबसे बड़े कमर्शियल और सर्विस हब के रूप में उभरे हैं. भारी जनसंख्या, पारंपरिक मंडियों और बेहतर ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी के कारण यहां छोटे कारखानों और ट्रेड का बड़ा क्लस्टर स्थापित हुआ है.

मॉल से हाट तक फैला 'सिंगल-ओनरशिप' कारोबार

पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी और दरभंगा के घनी आबादी वाले जिलों में असंगठित प्रतिष्ठानों का बड़ा आधार है. यहां लोकल मार्केट में रिटेल ट्रेड, हथकरघा, कारीगरी, कृषि-उपकरणों की रिपेयरिंग और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स संचालित हो रही हैं. पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सहरसा और सुपौल में में छोटे कारोबार मुख्य रूप से एग्री-बिजनेस, वीकली हाट-बाजारों और ट्रांसपोर्ट सर्विस पर आधारित हैं, जहां ''सिंगल-ओनरशिप'' वाली छोटी दुकानों का जाल फैला हुआ है.

इन जिलों में माइक्रोलेंडिंग व स्वरोजगार के अवसर बढ़े

रोहतास, भोजपुर, नालंदा, नवादा, औरंगाबाद, जमुई, बांका, लखीसराय, शेखपुरा, जहानाबाद और अरवल में माइक्रोलेंडिंग और स्वरोजगार के अवसरों के चलते छोटे उद्यम लगातार बढ़ रहे हैं. रोहतास, भोजपुर और नालंदा जैसे इलाकों में सर्विस सेक्टर (एजुकेशन, ट्रांसपोर्ट, रिपेयरिंग) और ट्रेडिंग यूनिट्स अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों से ही धमाकेदार तरीके से ऑपरेट हो रही हैं. बांका, जमुई और रोहतास के पहाड़ी व झारखंड बॉर्डर से सटे इलाके में लोकल फॉरेस्ट प्रोड्यूस और लघु निर्माण से जुड़े असंगठित कारखाने यहां की लोकल इकॉनमी की बैकबोन बने हुए हैं.

क्रम संख्या जिले छोटे उद्यमों के प्रमुख क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों की विशेषता
1 रोहतास सर्विस सेक्टर, ट्रेडिंग, लघु निर्माण, वन उत्पाद माइक्रोलेंडिंग और स्वरोजगार से छोटे उद्यमों का विस्तार; ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सेवा और व्यापारिक इकाइयों की सक्रियता
2 भोजपुर एजुकेशन, ट्रांसपोर्ट, रिपेयरिंग, ट्रेडिंग ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से सेवा क्षेत्र और व्यापारिक इकाइयों का संचालन
3 नालंदा एजुकेशन, ट्रांसपोर्ट, रिपेयरिंग, ट्रेडिंग स्वरोजगार और स्थानीय मांग के आधार पर सेवा व व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि
4 नवादा माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार छोटे उद्यमों के विस्तार में वित्तीय सहायता और स्वरोजगार की भूमिका
5 औरंगाबाद माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यमों और स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार
6 जमुई वन उत्पाद, लघु निर्माण, छोटे उद्यम पहाड़ी और झारखंड सीमा से सटे इलाकों में स्थानीय वन उत्पाद तथा निर्माण गतिविधियां आजीविका का आधार
7 बांका वन उत्पाद, लघु निर्माण, छोटे उद्यम पहाड़ी क्षेत्रों में वन उत्पादों और स्थानीय निर्माण से जुड़ी असंगठित इकाइयों की भूमिका
8 लखीसराय माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार छोटे उद्यमों के विकास में स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का योगदान
9 शेखपुरा माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार छोटे स्तर पर उद्यमिता और स्थानीय व्यापार के अवसर
10 जहानाबाद माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे कारोबार और स्वरोजगार की संभावनाएं
11 अरवल माइक्रोलेंडिंग आधारित स्वरोजगार, छोटे कारोबार स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यमों के विस्तार और रोजगार सृजन की संभावनाएं

बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठानों का वितरण

क्रम संख्या क्षेत्र प्रतिष्ठानों की हिस्सेदारी
1 पटना जिला 8.23%
2 पटना के बाहर अन्य जिले 91.77%
कुल बिहार 100%

43.19 लाख से अधिक प्रतिष्ठान, 58.51 लाख लोग कार्यरत

बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के 43.19 लाख से अधिक प्रतिष्ठानों में 58.51 लाख से ज्यादा लोग कार्यरत हैं. कुल रोजगार का लगभग 74% हिस्सा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में केंद्रित है. इन प्रतिष्ठानों में 99.3 प्रतिशत इकाइयां एकल स्वामित्व वाली हैं. कुल रोजगार का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा (43.6 लाख श्रमिक) ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में केंद्रित है, जबकि शहरी क्षेत्र की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत (16.6 लाख श्रमिक) है. व्यापार और सेवाओं के अलावा, लघु विनिर्माण और मरम्मत केंद्रों के मामले में पटना के बाद मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और सारण जिले राज्य के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं. इसके अतिरिक्त, इस असंगठित क्षेत्र में लगभग 9.27 लाख महिला श्रमिक भी जुड़ी हुई हैं.

बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र की स्थिति

बिहार में गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र के प्रमुख आंकड़े

क्रम संख्या प्रमुख बिंदु आंकड़े
1 कुल प्रतिष्ठानों की संख्या 43.19 लाख से अधिक
2 कुल कार्यरत लोग 58.51 लाख से अधिक
3 एकल स्वामित्व वाली इकाइयां 99.3%
4 ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार 43.6 लाख श्रमिक (लगभग 74%)
5 शहरी क्षेत्रों में रोजगार 16.6 लाख श्रमिक (लगभग 26%)
6 महिला श्रमिकों की संख्या लगभग 9.27 लाख
7 लघु विनिर्माण और मरम्मत के प्रमुख केंद्र पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर और सारण

कुल रोजगार का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण इलाके में

बिहार के असंगठित क्षेत्र में रोजगार की स्थिति

क्रम संख्या प्रमुख बिंदु आंकड़े
1 एकल स्वामित्व वाले उद्यम 99.3%
2 ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार 43.6 लाख श्रमिक (लगभग 74%)
3 शहरी क्षेत्रों में रोजगार 16.6 लाख श्रमिक (लगभग 26%)
4 असंगठित क्षेत्र में महिला श्रमिकों की संख्या लगभग 9.27 लाख

क्या कहते हैं मंत्री

Image

इन वजहों से बदली तस्वीर

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की ओर से शुरू की गयी विकेंद्रीकृत औद्योगिक नीतियां और प्रोत्साहन, पिछले कुछ वर्षों में राज्य के हर कोने को सड़कों, पुलों और बिजली से जोड़ा गया है. बेहतर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी के कारण अब छोटे कारखाने और व्यापारिक क्लस्टर जिला स्तर पर भी सुचारू रूप से ऑपरेट हो रहे हैं. आसान ऋण (माइक्रोलेंडिंग) और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर नये उद्यमों को स्थापित करने में पूंजी की बाधा दूर हुई है. युवाओं को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे कृषि-प्रसंस्करण, हथकरघा और लघु निर्माण इकाइयों को गति मिली है.

स्थानीय स्तर पर कारोबार की बड़ी मौजूदगी

गैर-कृषि असंगठित क्षेत्र में छोटी दुकानें, मरम्मत केंद्र, छोटे कारखाने और विभिन्न तरह की सेवाएं देने वाले प्रतिष्ठान शामिल होते हैं. ये कारोबार स्थानीय लोगों की जरूरतें पूरी करने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी आगे बढ़ाते हैं. पटना के बाहर बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिष्ठानों की मौजूदगी बताती है कि छोटे कारोबार राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैल रहे हैं.

बिहार की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

जिलेवार योजना बनाने का मिलेगा आधार

जिलेवार आंकड़ों से सरकार को अलग-अलग क्षेत्रों में छोटे कारोबार की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है. इसके आधार पर कारोबारियों को कर्ज, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की योजनाएं तैयार की जा सकती हैं. साथ ही, स्थानीय स्तर पर कारोबार को आगे बढ़ाने की संभावनाओं की पहचान करने में भी आसानी हो सकती है.

Also Read: Bodh Gaya Master Plan: फल्गु नदी पर ऐसा बनेगा रिवरफ्रंट, महाबोधि कॉरिडोर से बदलेगी बोधगया की तस्वीर

The post Investigation : छोटे शहर बन रहे बिहार के बड़े कर्मशियल कैपिटल, 90 प्रतिशत MSME सेक्टर हुए पटना से बाहर appeared first on Prabhat Khabar.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles