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बंगाल उपचुनाव : नंदीग्राम में क्यों बार-बार हार जाती है तृणमूल, कुणाल घोष ने बतायी अपनी ही पार्टी की कमजोरी

कोलकाता : नंदीग्राम में तृणमूल के प्रभारी रहे बेलेघाटा से तृणमूल विधायक कुणाल घोष ने पार्टी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया. उन्होंने कई नेताओं के नाम लिए. उन्होंने एआईपीएसी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा- नुकसान पहुंचाने के लिए आत्म-आलोचना की जरूरत है. बेलेघाटा से तृणमूल विधायक ने कहा- अगर तृणमूल नंदीग्राम में बुरी स्थिति में है, तो सच्चाई यह है कि इसके लिए शुभेंदु अधिकारी से ज़्यादा हमारे कुछ प्रमुख नेता ज़िम्मेदार हैं, जो कोलकाता में बैठे-बैठे सोचते थे कि वे चुटकी बजाकर सभी ज़िलों को चला लेंगे. नंदीग्राम को नंदीग्राम के कार्यकर्ताओं ने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. हमें आत्म-विश्लेषण करना होगा.

पार्टी प्रभारी को बताया कमजोर

विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद तृणमूल पार्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गई. हालांकि, कुणाल अभी भी ममता बनर्जी के साथ हैं. इसके बावजूद, उन्होंने नंदीग्राम मुद्दे पर पार्टी के खिलाफ आवाज उठाई. कई नेताओं का नाम लेते हुए कुणाल ने कहा- राजीव बनर्जी, तन्मय घोष, ये उम्मीदवार थे. वे समझ जाएंगे. जब तक मैं प्रभारी था, मैंने सबके साथ काम किया. सब कुछ सकारात्मक दिशा में जा रहा था और अगर कोई यह सोचता है कि कुणाल घोष को बिना सूचना दिए हटा दिया गया और उनकी जगह प्रमुख जन नेताओं को भेज दिया गया, तो वे समझ जाएंगे. अचानक, बिना मुझे कुछ बताए, एआईपीएसी और अन्य लोगों ने सब कुछ समझ लिया है, तो उन्हें माफी क्यों मांगनी चाहिए, ये तो कमजोर लोग हैं.

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क्या बोले राजीव बनर्जी

कुणाल की टिप्पणियों के संबंध में, पूर्व राज्य मंत्री राजीव बनर्जी ने कहा-मुझे कभी भी नंदीग्राम किसी विशेष कार्य के लिए नहीं भेजा गया था. बल्कि, कुणालदा मुझे एक-दो बार बैठकों में ले गए थे. लोकसभा चुनाव के दौरान मैं तामलुक से लोकसभा उम्मीदवार की मदद करने गया था. मैं कुणालदा को याद दिलाता हूं कि जब भी पार्टी ने मुझे विशिष्ट जिम्मेदारियां सौंपीं, मैंने उन्हें पूरी ईमानदारी से निभाया. ममता समर्थक तृणमूल नेता तन्मय घोष ने कहा- जहां तक ​​मुझे याद है, ऐसा कभी नहीं था. जब मैं पूर्वी मेदिनीपुर का प्रभारी था, तब वहां के परिणाम साफ दिखते थे, पंचायत समेत. बाद में जिम्मेदारी बांट दी गई. कुणालदा नंदीग्राम का काम देखते थे. पार्टी द्वारा कुणालदा को नंदीग्राम की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद मैंने वहां काम नहीं किया.

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