
खास बातें
Adhikari Factor in Purba Medinipur: पश्चिम बंगाल में पूर्वी मेदिनीपुर जिले के 3 विधानसभा क्षेत्रों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच मुकाबला तेज हो गया है. यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री शिशिर अधिकारी के परिवार के दबदबे और उनकी राजनीतिक निष्ठा में बदलाव ने क्षेत्र की राजनीति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है.
भाजपा के साथ है अधिकारी परिवार
कभी इस क्षेत्र में वाम-विरोधी राजनीति का एक मजबूत स्तंभ रहा ‘अधिकारी परिवार’ पहले तृणमूल कांग्रेस का स्तंभ बना. अब यह परिवार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ जुड़ चुका है. इनमें शिशिर के बेटे एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, पूर्व सांसद दिव्येंदु और वर्तमान में कांथी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे सौमेंदु अधिकारी भी शामिल हैं.
2021 में टीएमसी-भाजपा में हुई थी कांटे की टक्कर
पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में तमलूक, कांथी उत्तर और कांथी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र में कांटे की टक्कर थी. तटीय क्षेत्र में तमलूक विधानसभा क्षेत्र एक महत्वपूर्ण निर्णायक सीट के रूप में उभरा है, जहां तृणमूल-भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है.
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तमलूक में टीएमसी ने भाजपा को हराया था
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के डॉ सौमेन कुमार महापात्रा ने तमलूक में भाजपा के हरेकृष्ण बेड़ा को महज 793 वोट से हराकर सीट बरकरार रखी थी. इसके बाद यह राज्य के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक बन गया. इस सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के गौतम पांडा भी मैदान में थे, लेकिन मुकाबला काफी हद तक द्विपक्षीय ही रहा.
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चुनौतीपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र बना तमलूक
हार-जीत के इस मामूली अंतर ने इस निर्वाचन क्षेत्र को राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण विधानसभा क्षेत्र का दर्जा दे दिया है. हालांकि, मतों के गणित से परे अधिकारी परिवार के दबदबे का असर साफ नजर आता है, जिसने तमलूक लोकसभा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बना रखी है.
शिशिर अधिकारी ने वामदलों का विरोध कर बनाया जनाधार
कांग्रेस के समय में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विरोधी ताकत बनने से लेकर ग्रामीण बंगाल में ममता बनर्जी के उदय का एक प्रमुख स्तंभ बनने तक शिशिर अधिकारी के नेतृत्व में इस परिवार ने एक ठोस राजनीतिक नेटवर्क का निर्माण किया.
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2021 के चुनाव में बदल गया तमलूक-कांथी का समीकरण
वर्ष 2021 के चुनाव से पहले यह समीकरण उस वक्त बदल गया, जब शुभेंदु भाजपा में शामिल हो गये. इससे पूर्वी मेदिनीपुर में तृणमूल कांग्रेस का संगठनात्मक आधार कमजोर हो गया. आगामी चुनाव के लिए तृणमूल ने महापात्रा के स्थान पर दीपेंद्र नारायण रॉय को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने एक बार फिर बेड़ा पर भरोसा जताया है.
भाकपा और कांग्रेस ने भी उतारे उम्मीदवार
भाकपा ने टीएमसी और भाजपा के उम्मीदवारों से लोहा लेने के लिए नबेंदु घारा को अपना उम्मीदवार बनाया है. बंगाल चुनाव 2026 की इस जंग में कांग्रेस पार्टी ने इस सीट से इस बार को अपना प्रत्याशी बनाया है. कांथी (कोंटाई) उपखंड में अधिकारी परिवार का दबदबा कायम है.
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