Saturday, September 5, 2026

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बच्चों को पढ़ाने के लिए खतरों से खेलते हैं ब्रह्मदेव:नदी को पैदल पार कर पहुंचते हैं स्कूल, 19 साल से जान जोखिम में डाल जाते हैं पढ़ाने


कोडरमा जिले के सदर प्रखंड में एक ऐसे शिक्षक हैं जो,अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को पढ़ाने स्कूल जाते हैं। वह घने जंगलों के बीच स्थित एक दूरदराज के गांव में बने स्कूल में इकलौते शिक्षक हैं। हम बात कर रहे हैं शिक्षक ब्रह्मदेव शर्मा की। वो उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय सपहा, जरगा पंचायत के झरखी में तैनात हैं। यहां तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को एक नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दिनों में यह गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाता है। काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है
ऐसे मौसम में जहां ग्रामीण भी बहुत जरूरी होने पर ही गांव से बाहर निकलते हैं, वहीं शिक्षक ब्रह्मदेव शर्मा रोज बच्चों को पढ़ाने आते हैं। वह अपनी जान जोखिम में डालकर यह काम करते हैं। प्रखंड मुख्यालय से स्कूल करीब 18 किलोमीटर दूर है। ब्रह्मदेव शर्मा को स्कूल पहुंचने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वह रोज सुबह बाइक से सपहा के लिए निकलते हैं। कुछ दूर चलने के बाद उन्हें रुकना पड़ता है, क्योंकि रास्ते में वृन्दाहा नदी पड़ती है। इस नदी के पानी का बहाव इतना तेज होता है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कपड़े बदल नदी में उतरते हैं
ब्रह्मदेव शर्मा बताते हैं कि वृन्दाहा नदी के पास उन्हें अपनी बाइक खड़ी करनी पड़ती है। इसके बाद उनकी असली चुनौती शुरू होती है। वह अपने बैग से हाफ पैंट निकालकर कपड़े बदलते हैं। फिर एक हाथ में जूते और दूसरे हाथ में बैग लेकर नदी में उतर जाते हैं। कमर से ऊपर तक पानी में घुसकर वह जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। काफी संघर्ष के बाद वह स्कूल पहुंचते हैं। विद्यालय में एक मात्र शिक्षक हैं ब्रह्मदेव
ब्रह्मदेव शर्मा ने बताया कि वे पिछले 19 वर्षों से लगातार इस विद्यालय में पठन पाठन का कार्य करते आ रहे हैं। वे विद्यालय में एक मात्र शिक्षक हैं। इतने वर्षों से लगातार सेवा देते आने के कारण इनका इस विद्यालय और यहां के बच्चों से एक विशेष लगाव हो गया है। बच्चों को इनसे और इन्हें बच्चों से हो गया है लगाव
ब्रह्मदेव शर्मा बताते हैं कि चूंकि वे लंबे अरसे से इस विद्यालय में पढ़ाते आ रहे हैं, इस कारण उन्हें इस विद्यालय के 34 बच्चों से और बच्चों को इनसे विशेष लगाव हो गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि इस गांव में इस स्कूल के अलावे शिक्षा प्राप्ति के लिए ना तो कोई अन्य सरकारी या निजी विद्यालय की व्यवस्था है और न ही गांव में कोई ऐसा व्यक्ति है जो बच्चों को ट्यूशन पढ़ा सके। ऐसे में शिक्षा के मद्देनहर बच्चे पूरी तरह से मुझ पर निर्भर हैं। इस परिस्थिति में मुझे हर दिन विद्यालय जाना ही पड़ता है। दो सेट कपड़े अलग से साथ लेकर चलना पड़ता है
ब्रह्मदेव शर्मा ने बताया कि इस विद्यालय में पढ़ाने जाने से पूर्व इन्हें अपने बैग में दो सेट कपड़े अलग से रखने होते हैं। नदी पार करने के दौरान उन्हें एक सेट कपड़ा बदलना पड़ता है और कभी-कभी नदी में तेज बहाव आने के कारण इन्हें विद्यालय में ही ठहरना पड़ता है, जिसके लिए एक अन्य सेट कपड़े की जरूरत इन्हें होती है। प्रशासन व जन प्रतिनिधि के उदासीन रवैये के कारण हो रही है समस्या
ब्रह्मदेव शर्मा ने बताया कि चूंकि यह समस्या काफी पुरानी है और इससे ना केवल मुझे बल्कि नदी के उस पार रहने वाले करीब 4 गांव के लोग इससे प्रभावित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मेरे व ग्रामीणों द्वारा भी कई बार इस समस्या से जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। बावजूद इसके किसी का भी इस समस्या की ओर पहल ना करना समझ से परे है। हालांकि दो वर्ष पूर्व जिला प्रशासन द्वारा इस ओर पहल कर इसके समाधान की बात कही गई थी। लेकिन उसके बाद भी स्थिति यथावत बनी हुई है।

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