
बांकुड़ा.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच बांकुड़ा जिले के रानीबांध ब्लॉक से विरोध की बड़ी खबर सामने आ रही है. यहाँ एक या दो नहीं, बल्कि एक साथ चार गांवों के निवासियों ने चुनाव के बहिष्कार (वोट बॉयकॉट) का ऐलान कर दिया है. खराब सड़कों और पीने के पानी की भारी किल्लत से नाराज ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे मतदान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे. इस फैसले से जिले की राजनीति में हलचल मच गयी है.10 साल से मरम्मत का इंतजार
रानीबांध विधानसभा क्षेत्र के चालसा, डुमुरडांगा, जावी और बगड़िया गांवों के लोगों ने एकजुट होकर यह कड़ा कदम उठाया है. ग्रामीणों के अनुसार, राज्य में सत्ता परिवर्तन के कुछ समय बाद चालसा चौराहे से बगड़िया तक करीब 5 किलोमीटर सड़क पक्की की गयी थी. लेकिन पिछले दस वर्षों से उचित रखरखाव न होने के कारण अब यह सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. बारिश के मौसम में इस कच्ची सड़क पर चलना असंभव हो जाता है. स्थिति इतनी गंभीर है कि गांवों में एंबुलेंस तो दूर, मोटरसाइकिल और साइकिल तक ले जाना दूभर है. सड़क की बदहाली के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं.पाइपलाइन बिछी पर पानी नहीं पहुंचा
सड़क के अलावा पानी की समस्या ने भी ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है. प्रदर्शनकारियों ने शिकायत की कि कुछ साल पहले गांवों में पाइपलाइन बिछायी गयी थी, लेकिन आज तक नलों में पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को बार-बार सूचित करने के बावजूद उनकी लगातार अनदेखी की जा रही है. इसी के विरोध में ग्रामीण बैनर-पोस्टर लेकर सड़कों पर उतर आए हैं.राजनीतिक समीकरण और प्रत्याशियों की प्रतिक्रिया
बांकुड़ा का रानीबांध कभी माओवादियों का गढ़ माना जाता था और 2011 तक इसे ””लाल दुर्ग”” कहा जाता था. हालांकि, 2016 से यहाँ तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है और 2021 में यहाँ से जीतकर ज्योत्सना मंडी राज्य सरकार में मंत्री बनीं.
ग्रामीणों के इस रुख पर राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है:भाजपा:
रानीबांध से भाजपा उम्मीदवार खुदीराम टुडू ने कहा कि चुनाव का बहिष्कार किसी समस्या का हल नहीं है. उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि भाजपा जीतती है, तो विधायक विकास निधि से इन समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जायेगा.तृणमूल कांग्रेस:
तृणमूल उम्मीदवार तनुश्री हांसदा ने कहा कि बहिष्कार करने से ग्रामीणों का ही नुकसान होगा. उन्होंने दावा किया कि चुनाव के तुरंत बाद विकास कार्य शुरू कर दिये जायेंगे.तमाम आश्वासनों के बावजूद, ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं. उनका कहना है कि वर्षों से उन्हें केवल वादे मिले हैं, काम नहीं. ऐसे में प्रशासन के लिए इन मतदाताओं को बूथ तक लाना एक बड़ी चुनौती बन गया है.
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