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देवघर स्थित बाबा मंदिर परिसर को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के उद्देश्य से स्थापित 2.50 करोड़ रुपए की सौर ऊर्जा परियोजना कई वर्षों से बंद पड़ी है। जलेसार क्षेत्र में लगाया गया यह 100 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट अब बदहाली का शिकार है। परियोजना स्थल पर सोलर पैनल और उससे जुड़ा ढांचा घास व झाड़ियों से पूरी तरह ढक चुका है। इसकी बैटरी भी निष्क्रिय है, जिससे यह करोड़ों की लागत से तैयार योजना पूरी तरह बेकार साबित हो रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर को लगातार बिजली उपलब्ध कराना और बिजली कटौती के दौरान भी व्यवस्था को सुचारु रखना था। शुरुआती दौर में यह सिस्टम मंदिर की स्ट्रीट लाइट, मुख्य परिसर और अन्य जरूरतों को पूरा करने में सक्षम था, जिससे डीजल जनरेटर का उपयोग काफी कम हो गया था। हालांकि, समय के साथ उचित देखरेख और नियमित रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था धीरे-धीरे ठप हो गई। तकनीकी खराबियों को समय रहते ठीक नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप बैटरी और अन्य उपकरण खराब होते चले गए। डीजल जनरेटर पर निर्भरता बढ़ी सोलर प्लांट बंद होने से मंदिर प्रबंधन पर सीधा असर पड़ा है। बिजली आपूर्ति के लिए अब फिर से डीजल जनरेटर पर निर्भरता बढ़ गई है, जिससे प्रतिदिन हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। यह सालाना लाखों रुपए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय पर देखभाल की जाती तो यह परियोजना आज भी सुचारु रूप से चल सकती थी। वहीं, संबंधित अधिकारियों ने मामले की जानकारी लेकर प्लांट को दोबारा चालू करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही है।
