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झारखंड में तेज गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है। ऐसे में पीने का पानी भी ना मिले, ये स्थिति और भी खराब परिस्थिति को दिखाती है। ऐसा ही हाल है चतरा के प्रतापपुर प्रखंड स्थित सिद्दीकी पंचायत के हेसातू गांव की। यहां करीब 150 आदिम जनजाति के लोग प्यास बुझाने के लिए नदी की गंदी जलधारा और रेत में चूआ खोदकर पानी पीने को मजबूर हैं। यह स्थिति ‘हर घर नल से जल’ योजना के सरकारी दावों पर सवाल उठा रही है। पीने के पानी की भारी किल्लत हेसातू गांव स्थित परहिया टोला में बैगा, बिरहोर और गंझू समुदाय के लोग निवास करते हैं। टोला में करीब 40 घर हैं। इन समुदायों को भीषण गर्मी के दौरान पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। पानी की कमी के कारण, ग्रामीण नदी के सूखे तल में गड्ढे खोदकर रिसते हुए मटमैले पानी का उपयोग करते हैं। हैंडपंप जैसी सुविधाओं के अभाव में, यह दूषित जल ही उनकी प्यास बुझाने का एकमात्र साधन बन गया है। गंदा पानी पीकर बच्चे बीमार पड़ रहे: महेंद्र बैगा स्थानीय निवासियों का कहना है कि जंगली इलाके में रहने के कारण उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय महेंद्र बैगा ने बताया मुखिया सुरेश राम से कई बार कहा, लेकिन उन्होंने एक बार भी नहीं सुनी। 6 हैंडपंप सूख गए हैं, नदी का गंदा पानी पीकर हमारे बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। इलाज में सारा पैसा खत्म हो रहा है, हम क्या करें? पर्वनती देवी का दर्द इस टोले के हर घर की कहानी है। 6 जलमिनार है, जो अब काम नहीं कर रहे हैं। यहां प्यास सिर्फ गला नहीं सुखा रही, बल्कि मासूमों की सेहत से भी खिलवाड़ कर रही है। गंदा पानी पीने से बच्चे संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। बालू का चूआ बनाकर हम लोग मुंह लगाकर पानी पीते हैं। हमारे पास कोई और रास्ता नहीं है। नदी सूखी तो प्यासे मरना होगा: ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि जल स्तर गिरने से कुएं और चापाकल जवाब दे चुके हैं और अब नदी ही एकमात्र विकल्प बची है। गर्मी इतनी है कि सब फेल हो गया है। अभी तो नदी में थोड़ा पानी है, लेकिन अगर यह भी सूख गया, तो हमारे पास प्यासे मरने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। जिले में चापाकल और जलमीनार दुरुस्त करने का काम जोरों पर चल रहा है। दैनिक भास्कर के माध्यम से जो प्रतापपुर के हेसातू गांव की जानकारी मिली है, वह गंभीर है। मैंने तुरंत प्रतापपुर बीडीओ को सख्त निर्देश दिए हैं कि उस गांव के हैंडपंप और जलमीनार को युद्धस्तर पर दुरुस्त कराया जाए ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके। -रवि आनंद, डीसी, चतरा
