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चतरा | कृषि विज्ञान केंद्र चतरा के प्रधान सह वरीय वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र मोहन मिश्रा ने वर्तमान मौसम और खेती की स्थिति को देखते हुए किसानों को फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में धान की रोपाई हो चुकी है, वहां जलभराव नहीं होने दें और फसल की जरूरत के अनुसार ही पानी रखें। कम बारिश वाले क्षेत्रों में उपलब्ध सिंचाई साधनों का उपयोग कर फसल को नमी की कमी से बचाएं। धान में खरपतवार नियंत्रण के साथ कीट एवं रोग की नियमित निगरानी करें और प्रकोप होने पर कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही दवा का प्रयोग करें। जिन खेतों में अभी धान की रोपाई नहीं हुई है, वहां किसान कम अवधि वाली किस्मों को प्राथमिकता दें। खाली खेतों में दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती की जा सकती है। खेत की नमी बनाए रखने के लिए मेड़बंदी और मल्चिंग जैसे उपाय अपनाएं। अनावश्यक रूप से अधिक यूरिया या रासायनिक खाद का प्रयोग न करें, बल्कि मिट्टी जांच के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल करें। खरीफ फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करा चुके किसानों को फसल में नुकसान होने पर समय पर संबंधित विभाग को सूचना देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए कृषि कार्य की योजना बनाना इस समय सबसे जरूरी है। 1. फसलों का सही चयन : कम अवधि वाली फसलें: देरी से मानसून आने पर कम समय (90-120 दिन) में पकने वाली फसलें चुनें। 2.सूखा-प्रतिरोधी किस्में: बाजरा, ज्वार, सोयाबीन, मूंग, और अरहर जैसी फसलों को प्राथमिकता दें जो कम पानी में भी जीवित रह सकती हैं। 3.सब्जियों की खेती: सीमित सिंचाई सुविधा होने पर सब्जियों की खेती करें, जो कम लागत में रोज़ाना आमदनी देती हैं। डॉ. रविंद्र मोहन। आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 947014 7400 पर सिर्फ मैसेज करें।
बारिश की अनिश्चितता के बीच फसलों को सुरक्षित रखने के लिए प्रबंधन जरूरी
