
पटना से अनुराग प्रधान की रिपोर्ट
बिहार में परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार जीआइएस आधारित डिजिटल अभिलेख तैयार करने जा रही है. इसके तहत राज्य के रेलवे नेटवर्क, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों, जिला सड़कों, ग्रामीण मार्गों और पुल-पुलियों का डिजिटल नक्शा तैयार किया जायेगा. इस व्यवस्था में परिवहन परियोजनाओं से जुड़े पर्यावरणीय जोखिमों को भी दर्ज किया जायेगा. योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को दी गयी है. प्रस्तावित डिजिटल मैप में राज्य के परिवहन ढांचे से संबंधित विभिन्न जानकारियां एकीकृत रूप में उपलब्ध रहेंगी. इससे अलग-अलग क्षेत्रों में सड़कों और रेलवे लाइनों की स्थिति, उनके बीच संपर्क तथा पुल-पुलियों की भौगोलिक स्थिति का आकलन करना आसान होगा. बिहार के मौजूदा जीआइएस पोर्टल पर उपलब्ध एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, प्रमुख जिला सड़कें और रेलवे ट्रैक से संबंधित आंकड़ों को भी इस पहल के तहत अधिक उपयोगी बनाया जायेगा.
खास बातें
- -पर्यावरणीय बदलावों पर भी नजर
- -निर्माण कार्यों की तस्वीरों से होगी निगरानी
बाढ़, जलजमाव और कटाव वाले क्षेत्रों की भी होगी पहचान
परिवहन नेटवर्क का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ उसके आसपास मौजूद पर्यावरणीय चुनौतियों को भी चिह्नित किया जायेगा. इसके अंतर्गत बाढ़ प्रभावित इलाकों, जलजमाव वाले क्षेत्रों, नदियों, नालों, कटाव की समस्या, वन क्षेत्रों और प्रदूषण से जुड़े संभावित जोखिमों का विवरण शामिल किया जा सकेगा. इससे सड़क, रेल या पुल निर्माण से जुड़ी योजनाओं को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों की जानकारी मिल सकेगी. परियोजनाओं के संभावित प्रभावों का आकलन करने और आवश्यक सावधानियां बरतने में भी सहायता मिलेगी. सरकार की योजना इस अभिलेख को समय-समय पर अपडेट करने की है. इससे नयी सड़कों के निर्माण, मौजूदा मार्गों के विस्तार, मरम्मत और अन्य परिवहन परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा. इसके अलावा, समय के साथ होने वाले पर्यावरणीय बदलावों की जानकारी भी संकलित की जा सकेगी.
काम शुरू होने और पूरा होने की तस्वीरों का होगा मिलान
योजना में परियोजना स्थलों की निगरानी पर भी जोर दिया गया है. इसके तहत निर्माण कार्य शुरू होने से पहले और काम पूरा होने के बाद संबंधित स्थल की तस्वीरें ली जायेंगी. इन तस्वीरों को जीआइएस अभिलेख में दर्ज कर उनके आधार पर स्थल की स्थिति में आये बदलावों का आकलन किया जायेगा. इस प्रक्रिया से अधिकारियों को निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने और परियोजना की वास्तविक स्थिति का पता लगाने में सुविधा होगी. साथ ही, स्थल निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली समस्याओं और संभावित अनियमितताओं की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है.
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जरूरत के मुताबिक तय होगी परियोजनाओं की प्राथमिकता
जीआइएस अभिलेख से राज्य में परिवहन सुविधाओं के विस्तार की योजना तैयार करने में भी मदद मिलेगी. उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाया जा सकेगा कि किन क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर करने, रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ाने या पुलों के निर्माण की आवश्यकता है. इससे विकास योजनाओं के लिए प्राथमिकताएं निर्धारित करने में सहूलियत होगी. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारियां उपलब्ध रहने से संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और परियोजनाओं की निगरानी को बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला मंडल ने कहा कि जीआइएस आधारित व्यवस्था से परिवहन परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और विकास कार्यों की निगरानी करने में मदद मिलेगी. इसके माध्यम से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर सड़क संपर्क, रेलवे कनेक्टिविटी और पुलों की जरूरत का आकलन भी किया जा सकेगा.
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