Saturday, August 22, 2026

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बिहार में पैसे से पैरामेडिकल डिग्री देने पर बवाल:नालंदा के कॉलेज में तोड़फोड़, सीवान में अधिकारी को पीटा; छात्र बोले-एडमिशन के टाइम बड़ी-बड़ी मशीनें दिखाई


“टाइम से पैसा जमा करना जरूरी है, बाकी तुमलोग कुछ भी लिखकर आ जाना, पास हो जाओगे। हमलोगों को यही कहकर वहम में रखा गया, अब हम अपने पैरेंट्स को क्या मुंह दिखाएंगे। फीस साढ़े सात लाख और अलग से सेमेस्टर पास कराने के साढ़े 10,500 मांगे जाते हैं। क्लास भी कभी-कभी चलती है। सभी टीचर यही बोलते हैं, क्लास से क्या लेना है, डिग्री से मतलब रखो।” पटना के गुरुदेव पैरामेडिकल कॉलेज की छात्रा नेहा कुमारी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में यह जानकारी दी है। दरअसल, बिहार की राजधानी पटना, सीवान, नालंदा समेत कई जगहों पर पैरामेडिकल कॉलेजों में मंगलवार को करीब 2 हजार छात्रों ने हंगामा और तोड़फोड़ की। स्टूडेंट्स ने आरोप लगाए कि कॉलेज प्रशासन ने पैसे लेकर सेमेस्टर पास कराने का भरोसा दिया था, लेकिन अब 95 प्रतिशत छात्रों को एक साथ फेल कर दिया गया। कॉलेज क्या वाकई पैसे लेकर डिग्री देता है? पटना समेत अन्य जिलों में छात्र क्यों हंगामे पर उतर आए? छात्रों का क्या कहना है? पैरामेडिकल के कितने कोर्स, कितने सेमेस्टर और कितनी फीस होती है? पढ़िए रिपोर्ट… सीवान-पटना-नालंदा में छात्रों के प्रदर्शन की तस्वीरें देखें… एडमिशन के टाइम बड़ी-बड़ी मशीनें दिखाई गई पटना के गुरुदेव पैरामेडिकल कॉलेज में शनिवार को सैकड़ों की संख्या में छात्रों ने हंगामा किया और कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए, तोड़फोड़ की। स्टूडेंट्स ने कहा कि इस बार के सेमेस्टर में 95 प्रतिशत स्टूडेंट्स फेल हो गए हैं। बीएससी नर्सिंग के स्टूडेंट आकाश का कहना है कि “हम सुपौल, मुंगेर, किशनगंज सहित विभिन्न जिलों से यहां पढ़ने आए हैं। एडमिशन के टाइम हमलोगों को बड़ी मशीनें दिखाई गई, लेकिन कॉलेज में पढ़ने के बाद उसका कहीं अता-पता नहीं है। टीचर सब कहते हैं कि पास करने से मतलब रखो। अब रिजल्ट भी गड़बड़ आ गया। ऐसे में हमलोगों के भविष्य का क्या होगा? छात्रों ने आरोप लगाया, “नामांकन और अन्य शुल्कों के नाम पर हमसे लाखों रुपए लिए गए। परीक्षा में पास कराने के नाम पर भी हमसे 10 हजार रुपए तक की अतिरिक्त राशि वसूली गई। इसके बावजूद रिजल्ट नहीं आया। आखिर ऐसा क्या कारण है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्र फेल हो गए हैं?” हंगामे की सूचना मिलने पर बहादुरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अधिकारी और मजिस्ट्रेट भी कॉलेज परिसर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं से बातचीत कर उन्हें शांत कराने और उनकी शिकायतें सुनने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और विद्यार्थियों के बीच कई बार नोकझोंक भी हुई। नाराज छात्र-छात्राएं कॉलेज परिसर में जमीन पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे और फिर से परीक्षा आयोजित करने की मांग करने लगे। छात्रों ने कहा, “जब तक हमारी शिकायतों की जांच नहीं होती, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।” छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन पर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। हंगामे के दौरान कॉलेज के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं दिखे, जिससे विद्यार्थियों का आक्रोश और बढ़ गया। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी छात्रों को समझाने में जुटे रहें। इस मामले को लेकर कॉलेज प्रबंधन के लोगों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉलेज प्रबंधन से बात नहीं हो सकी। बहादुरपुर थाना प्रभारी ने बताया, “छात्रों ने यूनिवर्सिटी को आवेदन देकर फिर से परीक्षा लेने की मांग की है।” नालंदा में CCTV कैमरे, बेंच, डेस्क, टीवी, प्रिंटर तहस-नहस नालंदा के गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज में पिछले 4 दिनों से छात्रों का हंगामा चल रहा था। शनिवार को भी छात्रों का आक्रोश देखने को मिला। एग्जाम रिजल्ट में गड़बड़ी, पढ़ाई नहीं होने और अवैध रूप से मोटी फीस वसूलने के गंभीर आरोपों को लेकर नर्सिंग और फिजियोथेरेपी के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा किया। भागन बीघा स्थित कॉलेज में चार दिनों से प्रदर्शन जारी है। शनिवार को भी कॉलेज भवन में भारी तोड़फोड़ की गई, जिससे CCTV कैमरे, बेंच, डेस्क, टीवी, प्रिंटर और अन्य कई कीमती सामान तहस-नहस हो गए। छात्रों का गुस्सा कॉलेज के इंफ्रास्ट्रक्चर पर फूट पड़ा। स्थिति को बेकाबू होता देख भागन बीघा, बेना और रहुई थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। इसके साथ ही रहुई प्रखंड के BDO और अंचलाधिकारी राजकमल भी पहुंचे और आक्रोशित छात्रों को समझाकर शांत कराया। छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी उदिता सिंह से मिलने गया। फिलहाल कॉलेज में स्थिति तनावपूर्ण है और सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। शनिवार को हंगामे के बाद मैनेजमेंट ने अगले आदेश तक कॉलेज में छुट्टी घोषित कर दी है, जिसके चलते कोई भी वरिष्ठ पदाधिकारी या शिक्षक परिसर में मौजूद नहीं हैं। BSC नर्सिंग (2024-28 बैच) के छात्र ऋषिकेश पटेल ने कहा, “हाल ही में आए फर्स्ट सेमेस्टर के रिजल्ट में भारी धांधली हुई है। 85 प्रतिशत छात्रों को फेल कर दिया गया है। कॉलेज ने परीक्षा और प्रैक्टिकल ‘मैनेज’ करने के नाम पर हमसे 80-80 हजार रुपए की अवैध वसूली की। इसके बावजूद प्रैक्टिकल में 50 में से मात्र 15 नंबर दिए गए। क्लिनिकल ड्यूटी के नाम पर भी पैसे वसूले गए।” छात्र विक्की यादव और ऋषिकेश ने कहा कि कॉलेज के शिक्षक पढ़ाने की बजाय रील्स बनाने में व्यस्त रहते हैं। छात्रों ने कहा, “जब हम अपनी समस्याओं को लेकर कॉलेज प्रबंधन से मिलने आए तो सभी ऑफिस में ताले लटके थे और कोई भी पदाधिकारी जवाब देने के लिए मौजूद नहीं था। इस कॉलेज का प्रबंधन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।” BSC नर्सिंग (2023-27 बैच) के थर्ड ईयर के छात्र बिट्टू कुमार ने कहा, “मेरे पांच सेमेस्टर हो चुके हैं, लेकिन आज तक मेरा एक भी रिजल्ट सही से नहीं आया है। मुझे बार-बार फेल किया जाता है। दोबारा परीक्षा देने पर भी वही रिजल्ट आता है।” फिजियोथेरेपी फर्स्ट ईयर के छात्र विवेक कुमार ने कहा, “हमारा सत्र पहले ही दो साल पीछे चल रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां ढंग से पढ़ाने वाले टीचर ही नहीं हैं। एक साल में तीन बार टीचर बदल चुके हैं। पांच विषयों को पढ़ाने के लिए सिर्फ तीन शिक्षक हैं और दो साल में एक भी विषय ठीक से पूरा नहीं हुआ है। कॉलेज में कोई प्रैक्टिकल नहीं होता। बस यह कहकर एडमिशन ले लिया जाता है कि पैसे दो और डिग्री मिल जाएगी। जब पढ़ाई ही नहीं हुई है, तो परीक्षा में क्या लिखेंगे? एक विषय तो ऐसा था, जिसका नाम हमने पहली बार परीक्षा केंद्र पर जाकर सुना।” लगातार चौथे दिन चल रहे हंगामे और तोड़फोड़ के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले में हस्तक्षेप किया। रहुई CO राजकमल ने बताया, “छात्रों की मांगों को पिछले दो दिनों से लगातार इंस्टीट्यूट प्रबंधन तक पहुंचाया जा रहा था। लंबी बातचीत के बाद इंस्टीट्यूट इस बात पर सहमत हो गया है कि जो भी बच्चे फेल हुए हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी। इसके लिए कॉलेज उनसे कोई अतिरिक्त फीस नहीं लेगा। इस समझौते पर छात्र भी तैयार हो गए हैं।” प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में कोई भी छात्र या प्रबंधन का व्यक्ति किसी गैर-कानूनी गतिविधि या उपद्रव में संलिप्त पाया गया तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी और FIR भी दर्ज की जाएगी। फिलहाल प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्थिति को सामान्य बनाए रखना है, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे। सीवान में इटर्न और प्रैक्टिकल परीक्षा के नाम पर वसूले गए पैसे सीवान के धनौती ओपी थाना क्षेत्र के पचौरा गांव स्थित शुभवंती इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में BSC नर्सिंग सेशन 2023-27 के छात्रों ने शनिवार को जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की। छात्रों ने CCTV कैमरे, फायर सेफ्टी यंत्र, पंखे, बेंच, वाटर ATM और खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए। पुलिस के पहुंचने के बाद भी छात्र शांत नहीं हुए। छात्रों ने कहा, “एडमिशन के समय हमसे कहा जाता है कि पैसा दो, पास कराते हुए डिग्री दे दिया जाएगा। यहां न प्रशिक्षित शिक्षक हैं, न लैब है और न नियमित क्लास होती है। यूनिवर्सिटी की फीस के अलावा डिग्री, परीक्षा, प्रैक्टिकल और इंटर्न के नाम पर अलग-अलग पैसे कैश में लिए गए। सभी पैसे देने के बावजूद तीसरे सेमेस्टर के रिजल्ट में करीब 80 प्रतिशत छात्रों को फेल कर दिया गया। कई विषयों में शून्य अंक दिए गए हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि हम 2-4 नंबर भी नहीं ला सकें?” छात्रों ने मांग की कि उनसे सिर्फ यूनिवर्सिटी की निर्धारित फीस ली जाए और पैसे नहीं देने पर फेल न किया जाए। छात्रों के अनुसार, एकाउंटेंट प्रभाकर भी सामने आने को तैयार नहीं था। पुलिस ने उसकी लोकेशन के आधार पर उसे कॉलेज के एक कमरे से बाहर निकाला। इस दौरान कुछ छात्र उससे भिड़ने के लिए दौड़े, लेकिन पुलिस ने बचा लिया। करीब आठ घंटे के प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया, जबकि कुछ बांस के सहारे छत पर चढ़कर कूदने की कोशिश करने लगे। इसके बाद फिर तोड़फोड़ हुई और कॉलेज कर्मियों की कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त कर दी गईं। करीब 10 घंटे बाद प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर लिखित आश्वासन दिया। एसडीओ आशुतोष गुप्ता ने कहा, “प्रशासन कमेटी बनाकर छात्रों के आरोपों की जांच कराएगा। जो दोषी पाए जाएंगे, उन पर कार्रवाई होगी। छात्रों को टारगेट नहीं करने का भी भरोसा दिया गया है। तोड़फोड़ में हुए नुकसान को ठीक करने के लिए एक सप्ताह तक क्लास सस्पेंड रहेंगी।” इसके बाद छात्रों ने प्रदर्शन खत्म किया और पुलिस ने सभी को कॉलेज की बस से सुरक्षित घर भेज दिया। कॉलेज प्रशासन ने मामले पर बात करने से इनकार कर दिया। री-एग्जाम, अटेंडेंस-प्रैक्टिकल के नाम पर वसूली की जाती सीवान के रहने वाले एक्सपर्ट नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि “यह पूरा मामला शिक्षा के बिजनेस मॉडल की तरह है। देश की किसी भी यूनिवर्सिटी से कॉलेज का एफिलिएशन लिया जाता है। इसके बाद यूनिवर्सिटी की ओर से तय फीस से दो गुना या ढाई गुना मार्जिन रखकर कॉलेज अपनी फीस तय करते हैं। बच्चों और उनके अभिभावकों को बेहतर शिक्षा, सुविधाएं और अच्छे भविष्य का भरोसा देकर एडमिशन कराया जाता है। इसके बाद तय फीस के अलावा अलग-अलग मदों में छात्रों से अतिरिक्त रकम वसूली जाती है। कभी री-एग्जामिनेशन के नाम पर, कभी अटेंडेंस के नाम पर, कभी प्रैक्टिकल के नाम पर तो कभी अन्य सुविधाओं के नाम पर छात्रों से पैसे लिए जाते हैं। कई जगहों पर छात्रों को यह भरोसा भी दिया जाता है कि पैसे देने पर परीक्षा में पास कराने या डिग्री दिलाने में मदद की जाएगी। इस तरह फीस और दूसरी वसूली के जरिए कॉलेज के लिए शिक्षा एक सेवा के बजाय कमाई का जरिया बन जाती है। यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि वर्षों से अलग-अलग जगहों पर इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन छात्रों और अभिभावकों से मोटी फीस ली जाती है, उन्हें उसके अनुपात में पढ़ाई, शिक्षक, लैब, प्रैक्टिकल और दूसरी जरूरी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। ऐसे में छात्र जब अपने अधिकार और पैसे का हिसाब मांगते हैं, तो विवाद की स्थिति पैदा होती है।”

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